तीन-भाषा नीति पर तत्काल सुनवाई की मांग: सुप्रीम कोर्ट में सीबीएसई नियम को चुनौती, याचिका में उठाया संसाधनों की कमी का मुद्दा

कक्षा नौ में तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य करने संबंधी सीबीएसई की नई नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग की गई है। मंगलवार को याचिकाकर्ताओं की ओर से शीर्ष अदालत से अनुरोध किया गया कि नए शैक्षणिक सत्र को देखते हुए इस मामले पर बुधवार या गुरुवार को सुनवाई की जाए। याचिका में तीन-भाषा नीति के क्रियान्वयन को चुनौती देते हुए शिक्षकों और अध्ययन सामग्री की उपलब्धता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ के समक्ष कहा कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है, इसलिए मामले पर शीघ्र सुनवाई आवश्यक है। उन्होंने दलील दी कि सीबीएसई की नई व्यवस्था लागू करने के लिए पर्याप्त संख्या में शिक्षक और आवश्यक पुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत इस अनुरोध पर विचार करेगी।
केंद्र, CBSE और NCERT ने किया नीति का बचाव
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने तीन-भाषा नीति को चुनौती देने वाली दो नई याचिकाओं पर केंद्र सरकार, एनसीईआरटी और सीबीएसई से जवाब मांगा था। 29 जुलाई को सूचीबद्ध सुनवाई में तीनों पक्षों ने अपने-अपने हलफनामे दाखिल कर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लागू तीन-भाषा व्यवस्था का समर्थन किया। उनका कहना था कि यह नीति बहुभाषावाद को प्रोत्साहित करने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही उन्होंने याचिकाओं को खारिज करने की मांग भी की।
पहले भी उठ चुके हैं कानूनी सवाल
पूर्व सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी तर्क दिया गया था कि सीबीएसई ऐसा सर्कुलर लागू कर रहा है, जो शिक्षा का अधिकार अधिनियम की भावना के विपरीत है। उनका कहना था कि छात्रों को भाषा चयन का पर्याप्त विकल्प दिए बिना नई व्यवस्था लागू की जा रही है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से नीति के क्रियान्वयन को लेकर सीबीएसई की लॉजिस्टिक तैयारियों पर विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी थी।
एक जुलाई से लागू हुआ नया नियम
सीबीएसई के 15 मई को जारी सर्कुलर के अनुसार, एक जुलाई 2026 से कक्षा नौ के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य कर दिया गया है। इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना आवश्यक है। यदि कोई छात्र विदेशी भाषा का चयन करना चाहता है, तो उसे पहले दो भारतीय भाषाएं पढ़नी होंगी। इसी नीति को चुनौती देते हुए दायर याचिकाओं पर अब सुप्रीम कोर्ट के अगले निर्णय का इंतजार है।










