जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच सरकार की वार्ता की पेशकश: दिल्ली में सुरक्षा कड़ी, अलग-अलग थानों में 10 FIR दर्ज

कॉकरोच जनता पार्टी के जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने दूसरी बार बातचीत की पहल की है। पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि सरकार के प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय कोर टीम से चर्चा के बाद लिया जाएगा। दूसरी ओर राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दी गई है। एहतियात के तौर पर दिल्ली मेट्रो के 16 स्टेशनों को बंद कर दिया गया है, जबकि संसद और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
बुधवार को प्रदर्शन के 33वें दिन सुबह से ही जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे। इनमें 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई का सामना करने वाले प्रदर्शनकारी भी शामिल हैं। इसी बीच दिल्ली पुलिस ने संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के संबंध में अलग-अलग थानों में 10 एफआईआर दर्ज की हैं। प्रदर्शनकारियों पर रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों पर हमला, पथराव, तोड़फोड़ और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
बंगाल से पहुंचे अतिरिक्त जवान
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल से सीआरपीएफ की 20 अतिरिक्त कंपनियां दिल्ली भेजने का निर्णय लिया है। गृह मंत्रालय के निर्देश पर करीब दो हजार जवानों को कोलकाता से एयरलिफ्ट कर राजधानी लाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार इन बलों की तैनाती संसद के मानसून सत्र और जारी प्रदर्शन के मद्देनजर की जा रही है। इससे पहले भी सीआरपीएफ और आरएएफ की करीब 30 कंपनियां दिल्ली पुलिस के साथ सुरक्षा व्यवस्था संभाल रही हैं।
हाईकोर्ट में सुनवाई आज
सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में अनशनरत सोनम वांगचुक से मुलाकात की। वांगचुक 28 जून से अनशन पर हैं और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश पर उन्हें सफदरजंग अस्पताल से मेदांता स्थानांतरित किया गया है। उधर, जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। याचिका में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग और हिरासत की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं।
नीट विवाद पर कांग्रेस का हमला
इधर, कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने नीट विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि छात्रों के हितों की रक्षा करने में केंद्र सरकार विफल रही है और इस मामले में शिक्षा मंत्री की नैतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
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