त्रेता युग की भव्यता का एहसास कराने की तैयारी: अयोध्या में राम भक्तों के स्वागत के लिए तैयार हो रहा भरत द्वार, फरवरी में लोकार्पण की संभावना

अयोध्या|07 मार्च 2026
अयोध्या में राम भक्तों के स्वागत के लिए तैयार हो रहा भरत द्वार, फरवरी में लोकार्पण की संभावना

रामलला के दर्शन करने अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं का अभिनंदन अब भरत द्वार करेगा। राम भक्तों के स्वागत के लिए अयोध्या–सुल्तानपुर मार्ग पर इस प्रवेश द्वार को बनाया जा रहा है। यह महत्वकांक्षी परियोजना सीएम योगी के पर्यटन विकास की प्राथमिकताओं में शामिल है। इस द्वार पर लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। अब तक इसका 90 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है। फरवरी 2026 तक इसके तैयार होकर लोकार्पण होने की संभावना है।

यूपी प्रोजेक्ट्स कारपोरेशन लिमिटेड के परियोजना प्रबंधक मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि टारगेट है कि फरवरी 2026 तक सभी निर्माण कार्यों को अंतिम रूप दे दिया जाए। यह द्वार अयोध्या नगरी में प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रथम स्वागत स्थल के रूप में कार्य करेगा। यह भगवान राम के छोटे भाई भरत की भक्ति और मर्यादा का प्रतीकात्मक स्वागत होगा।

छह मार्गों पर बन रहे रामायण से प्रेरित द्वार

योगी सरकार ने राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या को विश्व स्तर का पर्यटन केंद्र बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें अयोध्या से जुड़ने वाले प्रमुख छह मार्गों पर रामायण से प्रेरित भव्य राम द्वार, लक्ष्मण द्वार, शत्रुघ्न द्वार, भरत द्वार, सीता द्वार और हनुमान द्वार बनेंगे। अयोध्या- सुल्तानपुर मार्ग पर स्थित भरत द्वार इसी श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह द्वार न केवल सौंदर्य की दृष्टि से आकर्षक होगा, बल्कि इसमें रामायण काल की थीम पर आधारित मूर्तियां, नक्काशी, प्रकाश व्यवस्था और अन्य सुविधाएं भी होंगी, जो आने वाले तीर्थयात्रियों को त्रेता युग की याद दिलाएंगी।

रोजाना पहुंच रहे लाखों श्रद्धालु

अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा के बाद से यहां पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। लाखों रामभक्त प्रतिदिन दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसे में शहर के प्रवेश द्वारों को भव्य बनाने से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

भारतीय शिल्पकला व आधुनिक तकनीक के संगम पर जोर

पर्यटन विभाग की इस परियोजना में स्थानीय कारीगरों, वास्तुकारों और इंजीनियरों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है, ताकि परंपरागत भारतीय शिल्पकला और आधुनिक तकनीक का सुंदर संगम हो सके। इस कार्य से आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी रोजगार के अवसर बढ़े हैं। निर्माणाधीन द्वार के आसपास हरित क्षेत्र, पार्किंग, शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं, जिससे श्रद्धालुओं को सुगम यात्रा मिलेगी।

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