राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सियासत तेज: पीएमओ ने मांगी रिपोर्ट, विपक्ष ने उठाए सवाल

अयोध्या|10 जून 2026
पीएमओ ने मांगी रिपोर्ट, विपक्ष ने उठाए सवाल

राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए धन में कथित अनियमितता और करोड़ों रुपये की चोरी के आरोपों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने मंदिर ट्रस्ट से पूरे प्रकरण पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की। इससे पहले भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग की थी। वहीं समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार और मंदिर प्रशासन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने मंगलवार को मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। मंदिर परिसर के एक बंद कक्ष में करीब चार घंटे तक चली इस बैठक में चढ़ावे की राशि, उसके प्रबंधन, उपयोग और लेखा-जोखा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। हालांकि बैठक समाप्त होने के बाद नृपेंद्र मिश्र ने मीडिया के सवालों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। ऐसे में बैठक को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। माना जा रहा है कि हाल में उठे आरोपों और राजनीतिक विवाद के बीच ट्रस्ट आंतरिक स्तर पर पूरे मामले की समीक्षा कर रहा है।

भाजपा नेता ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग

भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे और दान की राशि को लेकर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि मामले की जांच सीबीआई या प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी स्वतंत्र और उच्चस्तरीय एजेंसी से कराई जाए। साथ ही दान राशि के संग्रहण, गिनती, परिवहन और बैंक में जमा करने की पूरी प्रक्रिया का विशेष ऑडिट भी कराया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी कर्मचारी, अधिकारी या संबंधित व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

विपक्ष ने सरकार और ट्रस्ट को घेरा

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने एक बार फिर कथित चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठाते हुए सरकार से कई सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि देश की सनातन आस्था से जुड़े इस मामले में पारदर्शिता सबसे जरूरी है। अखिलेश ने पूछा कि यदि कोई गड़बड़ी नहीं हुई है तो सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने में क्या दिक्कत है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि चढ़ावे की गिनती जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में निजी कंपनियों की भागीदारी किस आधार पर तय की गई। सपा नेताओं का आरोप है कि मामले में पर्याप्त स्पष्टता नहीं दी जा रही है। जिससे संदेह और बढ़ रहा है।

ट्रस्ट ने आरोपों को बताया निराधार

विवाद बढ़ने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की वित्तीय प्रक्रियाएं पूरी तरह व्यवस्थित और पारदर्शी हैं। उन्होंने बताया कि समय-समय पर ट्रस्ट का आंतरिक ऑडिट कराया जाता है। जिसमें ट्रस्ट के प्रतिनिधियों के साथ भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारी भी शामिल रहते हैं। चंपत राय के अनुसार अब तक किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या चोरी की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में नियमित ऑडिट प्रक्रिया जारी है। किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए।

आरोपों से बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने हाल ही में दावा किया था कि राम मंदिर के चढ़ावे में पांच से साढ़े सात करोड़ रुपये तक की हेराफेरी हुई है। इसके बाद यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया। अब पीएमओ द्वारा रिपोर्ट मांगे जाने के बाद पूरे प्रकरण पर सबकी नजरें टिकी हैं। श्रद्धालुओं और आम लोगों की अपेक्षा है कि जांच या ऑडिट प्रक्रिया के माध्यम से जल्द ही स्थिति स्पष्ट होगी। आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर सभी संदेह दूर किए जाएंगे।

नव्य जागरण

पूरी खबर पढ़ें ऐप पर

ऐप डाउनलोड करने के लिए QR कोड
ऐप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करेंGET IT ON Google Play

अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर

ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।