राम जन्मभूमि ट्रस्ट के नए महासचिव बने कृष्ण मोहन: 10 महीने में मिली अहम जिम्मेदारी, चढ़ावा चोरी मामले की कराई थी पहली FIR

अयोध्या|07 जुलाई 2026
10 महीने में मिली अहम जिम्मेदारी, चढ़ावा चोरी मामले की कराई थी पहली FIR

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में रिटायर्ड भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारी कृष्ण मोहन को महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सितंबर 2025 में ट्रस्टी बनने के महज 10 महीने के भीतर उन्हें यह महत्वपूर्ण पद मिला है। इससे पहले चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद चंपत राय के इस्तीफे से महासचिव का पद रिक्त हो गया था।

73 वर्षीय कृष्ण मोहन को ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद सितंबर 2025 में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में शामिल किया गया था। इसके बाद उन्होंने संगठन में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उल्लेखनीय है कि रामलला मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने पर ट्रस्ट की ओर से पहली एफआईआर भी कृष्ण मोहन ने ही दर्ज कराई थी। अब उसी प्रकरण के बाद रिक्त हुए महासचिव पद की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई है।

हरदोई से संघ तक का सफर

कृष्ण मोहन मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के शाहाबाद के निवासी हैं। उनके पिता धर्मवीर सिंह भारतीय रेलवे में कार्यरत थे। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से जियोलॉजी में एमएससी की पढ़ाई पूरी की। परिवार में दो भाई और चार बहनें हैं। उनके छोटे भाई महेंद्र सिंह लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल में चिकित्सक हैं। पत्नी कुसुमलता का निधन हो चुका है। उनके एक पुत्र सौरव और पुत्री स्नेहा मोहन हैं। सौरव लखनऊ में डाक विभाग में कार्यरत हैं, जबकि स्नेहा नोएडा में सरकारी डॉक्टर हैं। 2012 में RSS से जुड़ गए थे।

आईएफएस से संघ नेतृत्व तक

कृष्ण मोहन ने अपने करियर की शुरुआत परमाणु ऊर्जा विभाग से की थी। वर्ष 1977 में उनका चयन भारतीय वन सेवा (आईएफएस) में हुआ और उन्होंने महाराष्ट्र कैडर में लंबे समय तक सेवाएं दीं। प्रशासनिक अनुभव और प्रबंधन क्षमता के कारण उनकी अलग पहचान बनी। वर्ष 2012 में सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सक्रिय जिम्मेदारियां संभालीं। संघ में उन्हें पहले हरदोई नगर संघचालक बनाया गया। इसके बाद उन्होंने जिला संघचालक, अवध प्रांत संघचालक और वर्तमान में पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संघचालक (क्षेत्र प्रभारी) का दायित्व संभाला। वर्ष 2024 में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भी वह यजमानों में शामिल रहे थे। संघ और ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों के अनुसार, उनकी ईमानदार और भरोसेमंद कार्यशैली के कारण उन्हें संगठन में लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती रहीं।

नव्य जागरण

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