सूरत बैंक डकैती का खुलासा: अयोध्या और गोंडा के दो आरोपी अरेस्ट, 13 मिनट में 52 लाख की लूट

अयोध्या|05 मई 2026
अयोध्या और गोंडा के दो आरोपी अरेस्ट, 13 मिनट में 52 लाख की लूट

प्रदेश के अयोध्या और गोंडा से दो शातिर बदमाशों को गुजरात क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान शुभम कुमार और विकास सिंह के रूप में हुई है। इन दोनों पर सूरत में हुई बैंक डकैती का आरोप है। यह कार्रवाई सूरत में हुई बड़ी लूट के बाद की गई है। पुलिस ने दोनों को कोर्ट में पेश किया। वहां से तीन दिन की ट्रांजिट रिमांड मिली। अब उन्हें आगे की पूछताछ के लिए सूरत ले जाया गया है।

27 अप्रैल को एसबीआई की वराछा शाखा में दिनदहाड़े डकैती हुई थी। सात हथियारबंद बदमाश बैंक में घुस गए। सभी के चेहरे खुले थे। उनके हाथ में पिस्टल थी। उन्होंने बैंक कर्मचारियों को बंदूक की नोक पर बंधक बना लिया। पूरे ऑपरेशन में सिर्फ 13 मिनट लगे। इस दौरान उन्होंने 52 लाख रुपए लूट लिए। इसके बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए।

सीसीटीवी और टेक्नोलॉजी से मिला सुराग

घटना के बाद पुलिस ने तेजी से जांच शुरू की। बैंक और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। फुटेज में लुटेरों की गतिविधियां साफ दिखीं। इसके अलावा वारदात के दौरान आरोपियों की बातचीत भी रिकॉर्ड हुई। इससे पुलिस को अंदाजा हुआ कि आरोपी यूपी के रहने वाले हो सकते हैं। इसके बाद पुलिस ने मोबाइल टावर डेटा की मदद ली। जिन इलाकों में आरोपी रुके थे, वहां की लोकेशन ट्रैक की गई।

नकली आधार से लिया किराए का कमरा

जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ। लुटेरे वारदात से करीब एक महीने पहले ही सूरत पहुंच गए थे। उन्होंने शहर के रांदेर इलाके में एक कमरा किराए पर लिया था। इसके लिए नकली आधार कार्ड का इस्तेमाल किया गया। यह कमरा उनकी प्लानिंग का बेस बना। यहीं बैठकर उन्होंने पूरी साजिश रची।

फर्जी आईडी से खरीदी बाइक

पुलिस को यह भी पता चला कि लुटेरों ने वारदात के लिए खास तैयारी की थी। उन्होंने तेलंगाना से एक चोरी की बाइक खरीदी थी। यह खरीद फर्जी पहचान पत्र के जरिए की गई थी। ‘धीरज कुमार’ नाम की आईडी का इस्तेमाल हुआ। इसी बाइक का इस्तेमाल डकैती के दौरान किया गया। इससे साफ है कि पूरी वारदात पहले से प्लान की गई थी।

कैमरों ने खोली पोल

16 अप्रैल को आरोपी एयरपोर्ट रोड पर लगे एएनपीआर कैमरे में कैद हुए थे। यह कैमरा नंबर प्लेट को पहचानता है। इसके अलावा डकैती के दिन भी वे कई सीसीटीवी कैमरों में नजर आए। इन्हीं डिजिटल सबूतों के आधार पर पुलिस ने आरोपियों तक पहुंच बनाई। टेक्नोलॉजी ने इस केस को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई।

जांच में जुटे 120 पुलिसकर्मी

इस हाई-प्रोफाइल केस को सुलझाने के लिए पुलिस की बड़ी टीम बनाई गई। 120 से ज्यादा पुलिसकर्मी लगातार काम कर रहे हैं। अलग-अलग राज्यों में दबिश दी जा रही है। अब तक दो आरोपियों को पकड़ लिया गया है। बाकी की तलाश जारी है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही सभी आरोपी गिरफ्तार कर लिए जाएंगे।

गिरफ्तारी के बाद पूछताछ

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। उनसे बाकी साथियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही लूट की रकम कहां छिपाई गई है, इसका भी पता लगाया जा रहा है। पुलिस को उम्मीद है कि इस पूछताछ से कई और खुलासे होंगे।

नव्य जागरण

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