गोरखपुर को मिलेगी ग्रीन एनर्जी की सौगात: चिलुआताल में बनेगा फ्लोटिंग सोलर प्लांट, 115 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट मंजूर

पूर्वांचल के औद्योगिक और ऊर्जा विकास को नई दिशा देने वाली एक और बड़ी परियोजना शहर को मिली है। चिलुआताल स्थित महेसरा ताल में 115 करोड़ रुपये की लागत से 20 मेगावाट क्षमता का फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट स्थापित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का जिम्मा शहर की कंपनी नॉर्दर्न एक्सप्रेस इंफ्राडेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को मिला है। कोयला मंत्रालय के अधीन कोल इंडिया लिमिटेड की इस परियोजना को पूर्वांचल में हरित ऊर्जा क्रांति की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
परियोजना के तहत महेसरा ताल के करीब 80 एकड़ जल क्षेत्र में अत्याधुनिक फ्लोटिंग सोलर पैनल लगाए जाएंगे। खास बात यह है कि इस परियोजना के लिए देशभर की 25 कंपनियों ने भागीदारी की थी, जिनमें से 17 कंपनियां तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन में सफल घोषित हुईं। 25 मई 2026 को वित्तीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद लगभग 115 करोड़ रुपये मूल्य की यह परियोजना शहर की कंपनी नॉर्दर्न एक्सप्रेस इंफ्राडेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित की गई।
गोरखपुर के लिए गौरव की परियोजना
परियोजना मिलने के बाद कंपनी के प्रबंध निदेशक नितीश त्रिपाठी ने इसे गोरखपुर और पूर्वांचल के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। कंपनी इससे पहले हिंदुस्तान उर्वरक एंड रसायन लिमिटेड के लिए महेसरा ताल ड्रेजिंग परियोजना का सफल संचालन कर चुकी है, जिसके चलते उसे इस क्षेत्र में कार्य का अनुभव भी प्राप्त है। इन्वेस्ट यूपी के पीएसयू हेड सुबोध दीक्षित ने कहा कि यह परियोजना प्रदेश की बढ़ती औद्योगिक क्षमता और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत होती भागीदारी का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस तरह की परियोजनाएं प्रदेश की आर्थिक और औद्योगिक ताकत को नई मजबूती देंगी।
पानी पर तैरेंगे सोलर पैनल, बढ़ेगी कार्यक्षमता
एक्सपर्ट्स के अनुसार फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट पारंपरिक सोलर प्लांट की तुलना में अधिक प्रभावी माने जाते हैं। इसमें सोलर पैनल झील, तालाब या जलाशय की सतह पर तैरते विशेष प्लेटफॉर्म पर लगाए जाते हैं। इससे खाली जल क्षेत्र का बेहतर उपयोग हो पाता है। जमीन की आवश्यकता कम होती है। इसके अलावा पानी की सतह से मिलने वाली प्राकृतिक ठंडक के कारण सोलर पैनलों की कार्यक्षमता भी बढ़ जाती है। यह पैनल सूर्य की रोशनी से डीसी बिजली तैयार करते हैं। जिसे इन्वर्टर के माध्यम से एसी बिजली में बदलकर ग्रिड तक पहुंचाया जाता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि फ्लोटिंग सोलर तकनीक भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा व्यवस्था का अहम हिस्सा बनने जा रही है।
रोजगार और औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। निर्माण कार्य, तकनीकी सेवाओं, परिवहन और रखरखाव से जुड़े क्षेत्रों में युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। साथ ही गोरखपुर का औद्योगिक इकोसिस्टम और मजबूत होगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पूर्वांचल में इस तरह की बड़ी ग्रीन एनर्जी के आने से निवेश का माहौल बेहतर होगा और गोरखपुर देश के उभरते ऊर्जा एवं औद्योगिक हब के रूप में नई पहचान हासिल करेगा।
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