सपा नेत्री काजल निषाद समेत सात नेता हाउस अरेस्ट: सोशल मीडिया पर बोलीं- ‘खौफ अच्छा है’, प्रदूषण के मुद्दे पर प्रस्तावित था प्रदर्शन

जिले में बुधवार को प्रस्तावित गीडा प्रदूषण विरोधी आंदोलन से पहले पुलिस प्रशासन ने समाजवादी पार्टी की नेता और पूर्व लोकसभा प्रत्याशी काजल निषाद समेत सात नेताओं को हाउस अरेस्ट कर लिया। देर रात की गई इस कार्रवाई के बाद जिले की राजनीति अचानक गर्मा गई। समाजवादी पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए सरकार पर विरोध की आवाज दबाने का आरोप लगाया है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, समाजवादी पार्टी की ओर से बुधवार को गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण और स्थानीय लोगों की समस्याओं को लेकर प्रदर्शन का ऐलान किया गया था। यह प्रदर्शन सहजनवा रेलवे स्टेशन के पास आयोजित होना था, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के जुटने की संभावना जताई जा रही थी। इसी को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पहले से अलर्ट मोड पर था।
देर रात घर पहुंची पुलिस
बताया जा रहा है कि मंगलवार देर रात तारामंडल थाने की पुलिस काजल निषाद के आवास पर पहुंची और उन्हें घर से बाहर न निकलने की हिदायत दी। पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा कि उन्हें किसी भी स्थिति में प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके बाद उन्हें औपचारिक रूप से हाउस अरेस्ट कर लिया गया। इसी कार्रवाई के तहत समाजवादी पार्टी के कई अन्य पदाधिकारियों को भी उनके घरों पर नजरबंद रखा गया। हाउस अरेस्ट किए गए नेताओं में पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी, पूर्व विधायक यशपाल रावत, जिला महासचिव रामनाथ यादव, जिला उपाध्यक्ष गिरीश यादव और सहजनवा विधानसभा अध्यक्ष मनीष कमांडो समेत सात प्रमुख नेता शामिल हैं। वहीं जिलाध्यक्ष ब्रजेश गौतम को भी कुछ समय के लिए रोका गया, हालांकि बाद में लखनऊ कार्यक्रम में शामिल होने की जानकारी देने पर उन्हें जाने की अनुमति दे दी गई।
सोशल मीडिया पर सरकार को घेरा
हाउस अरेस्ट के बाद काजल निषाद ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि “यह खौफ अच्छा है, यह होना भी चाहिए। अन्याय के खिलाफ उठ रही आवाज से शासन-प्रशासन डर रहा है, यह लोकतंत्र की सच्चाई को दिखाता है।” उन्होंने आगे कहा कि तानाशाही के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा और जनता के मुद्दों को दबाया नहीं जा सकता। उनकी पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसके बाद समर्थकों और विरोधियों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव नजदीक आने के बीच इस तरह की घटनाएं प्रदेश की राजनीति को और अधिक आक्रामक बना सकती हैं।
गीडा में प्रदूषण बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
दरअसल, गीडा क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले प्रदूषण को लेकर स्थानीय लोगों में लंबे समय से नाराजगी बताई जा रही है। समाजवादी पार्टी इसी मुद्दे को लेकर आंदोलन की तैयारी कर रही थी। पार्टी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं और प्रदूषित पानी से आसपास के गांवों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं, लेकिन प्रशासन इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहा। हालांकि प्रशासन का कहना है कि बिना अनुमति प्रदर्शन से क्षेत्र में तनाव और अव्यवस्था की स्थिति बन सकती थी। इसी वजह से एहतियातन नेताओं को हाउस अरेस्ट किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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