ई-फार्मेसी के विरोध में प्रदेशभर के मेडिकल स्टोर बंद: गोरखपुर समेत कई शहरों में दवा बाजारों पर शटर डाउन, पेशेंट परेशान

गोरखपुर|15 घंटे पहले
गोरखपुर समेत कई शहरों में दवा बाजारों पर शटर डाउन, पेशेंट परेशान

ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ बुधवार को लखनऊ, गोरखपुर समेत उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में मेडिकल स्टोर बंद रहे। बंद के चलते मरीजों और उनके परिजनों को दवाएं खरीदने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि दवा व्यापारियों ने दावा किया कि इमरजेंसी और जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। जिससे गंभीर मरीजों को परेशानी न हो। यह बंद ‘ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स’ (AIOCD) के आह्वान पर किया गया है। जिसका समर्थन प्रदेशभर के दवा व्यापारियों ने किया।

दवा व्यापारियों का आरोप है कि ई-फार्मेसी कंपनियां बिना पर्याप्त जांच और लाइसेंस प्राप्त फार्मासिस्ट की निगरानी के दवाओं की बिक्री कर रही हैं, जो मरीजों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। व्यापारियों के अनुसार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर फर्जी प्रिस्क्रिप्शन के जरिए दवाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। गलत इलाज और दवाओं के दुष्प्रभाव का खतरा बढ़ रहा है। इसके अलावा भारी डिस्काउंटिंग की वजह से पारंपरिक दवा कारोबार पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि यह सिर्फ कारोबार बचाने की लड़ाई नहीं, बल्कि आम लोगों की सेहत और सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील मामला है।

फार्मासिस्ट की अनिवार्यता खत्म करने की मांग करने वालों पर साधा निशाना

फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार ने कहा कि मेडिकल स्टोर बंदी का आह्वान करने वाले संगठन ने पहले दवा दुकानों पर फार्मासिस्ट की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग उठाई थी। उनका आरोप है कि संबंधित संगठन लगातार फार्मासिस्ट की अनिवार्यता खत्म करने के समर्थन में प्रदर्शन और धरना देता रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे में अब मरीजों की सुरक्षा और दवा व्यवस्था को लेकर उठाए जा रहे सवाल विरोधाभासी प्रतीत होते हैं।

बड़ी दवा दुकानों पर भारी छूट

प्रदेश महासचिव विष्णु यादव ने कहा कि प्रदेश की कई बड़ी रिटेल दवा दुकानों पर 20 से 22 प्रतिशत तक छूट देकर दवाएं बेची जा रही हैं, लेकिन उनके खिलाफ किसी प्रकार की प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों का पालन कराने के बजाय छोटे व्यापारियों और फार्मासिस्टों पर अनावश्यक दबाव बनाया जाता है।

ऑनलाइन फार्मेसी पर घट रहा लोगों का भरोसा

प्रदेश प्रभारी रजत कुमार राय ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री का ग्राफ पिछले कुछ समय में गिरा है। उन्होंने दावा किया कि नकली और अविश्वसनीय दवाओं की शिकायतों के कारण आम लोगों का भरोसा ऑनलाइन फार्मेसी प्लेटफॉर्म पर कमजोर हुआ है। उनका कहना है कि मरीज अब सुरक्षित और प्रमाणित दवा खरीदने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

मरीजों की सुविधा सर्वोपरि

प्रदेश संगठन मंत्री रजत कुमार सैनी ने दवाओं को आवश्यक वस्तु बताते हुए कहा कि जनता की सेवा सर्वोपरि है और मरीजों तक समय पर दवा पहुंचाना सभी फार्मासिस्टों और दवा विक्रेताओं की जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रदेश के सभी फार्मासिस्टों से अपील की कि 20 मई को दवा की दुकानें खुली रखें, ताकि आम मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

सड़कों पर उतरे दवा व्यापारी

ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट और लखनऊ केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले व्यापारियों ने शहर में विरोध प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शनकारियों ने ई-फार्मेसी कंपनियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियंत्रण की मांग की। एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित तिवारी ने कहा कि बिना फार्मासिस्ट की निगरानी के दवा वितरण कानून और स्वास्थ्य सुरक्षा दोनों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई ऑनलाइन कंपनियां मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री और प्रिस्क्रिप्शन की सही जांच किए बिना दवाएं भेज रही हैं, जिससे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो रहे हैं।

नशे में इस्तेमाल होने वाली दवाओं पर भी चिंता

दवा व्यापारियों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए नशीली और प्रतिबंधित दवाओं की आसान उपलब्धता पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि स्लीपिंग पिल्स, दर्द निवारक दवाएं और अन्य संवेदनशील मेडिसिन्स युवाओं तक बिना रोकटोक पहुंच रही हैं, जिससे दुरुपयोग और नशे की घटनाएं बढ़ सकती हैं। संगठनों ने दावा किया कि कई ई-फार्मेसी कंपनियां निर्धारित नियमों और ड्रग कंट्रोल मानकों का पालन नहीं कर रही हैं।

सरकार से सख्त नियम लागू करने की मांग

केमिस्ट संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए स्पष्ट और सख्त नियम लागू करने की मांग की है। व्यापारियों का कहना है कि फार्मासिस्ट की अनिवार्य निगरानी, वैध प्रिस्क्रिप्शन की जांच और सप्लाई चेन की पारदर्शिता सुनिश्चित किए बिना ऑनलाइन दवा बिक्री की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। वहीं आम लोगों को उम्मीद है कि सरकार जल्द ऐसा समाधान निकालेगी, जिससे मरीजों की सुविधा और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हो सकें।

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