छात्राओं को डराने के लिए थाने में कंप्लेन की धमकी दे रहीं वार्डन: अलकनंदा हॉस्टल की छात्राओं से सादे कागज पर साइन कराया, बोलीं- अब ठिकाने आएगी अक्ल

DDU गोरखपुर यूनिवर्सिटी के अलकनंदा हॉस्टल में खराब खाने से शुरू हुआ विवाद अब डर, दबाव और धमकी तक पहुंच गया है। छात्राओं ने हॉस्टल वार्डन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित छात्राओं का कहना है कि शिकायत उठाने पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। हॉस्टल के अंदर ऐसा माहौल बना दिया गया है कि छात्राएं खुलकर बोलने से डर रही हैं। घटिया खाने की कंप्लेन करने वाली छात्राओं का आरोप है कि अब वार्डन उन्हें डरा-धमकाकर आवाज बंद कराने में लगी हैं।
हॉस्टल से निकालने की धमकी
इससे पहले छात्राओं ने हॉस्टल के जिम्मेदारों से शिकायत की थी। जब सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने वीडियो और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए वार्डन तक बात पहुंचाई। इसके बाद भी जब हालात नहीं सुधरे तो पीड़िताओं ने सोशल मीडिया पर वीडियो और चैट्स के स्क्रीन शॉट शेयर कर मदद की गुहार लगाई। मीडिया संस्थानों में खबर प्रकाशित होने के बाद हॉस्टल प्रशासन बौखला गया। सोमवार की शाम हॉस्टल पहुंची वार्डन आवाज उठाने वाली छात्राओं को हॉस्टल से निकालने की धमकी देने लगीं। पीड़ित छात्राओं का आरोप है कि वार्डन ने कहा, तुम दूसरी लड़कियों से मिसबिहेव करती हो। अब तुम्हारे खिलाफ थाने में तहरीर दी जाएगी। तभी दिमाग ठिकाने आएगा। एक छात्रा ने बताया कि आवाज उठाने पर उसे टारगेट किया जा रहा है। छात्रा का आरोप है कि उसे निकालने के लिए वार्डन अन्य छात्राओं पर झूठे आरोप लगाने का दबाव बना रही हैं। उसने कहा कि अपना अपराध छिपाने के लिए वे किसी भी लेवल पर जा सकती हैं। छात्रा ने वार्डन से खतरा होने की आशंका जताई है। वहीं, अन्य छात्राएं भी हॉस्टल वार्डन पर माहौल डरावना बनाने का आरोप लगा रही हैं।
सादे कागज पर कराए साइन
पीड़ित छात्राओं ने सबसे गंभीर आरोप सादे कागज पर साइन कराने को लेकर लगाए हैं। उनका कहना है कि वार्डन ने कई छात्राओं को बिना कुछ बताए सादे कागज पर साइन करवा लिया है। उन्हें डर है कि इन कागजों पर फर्जी एप्लीकेशन लिखकर उनके खिलाफ इस्तेमाल किया जाएगा। कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया कि उन्हें रात में ही धमकी मिली कि आवाज बंद नहीं हुई तो हॉस्टल से तो बाहर किया ही जाएगा, एग्जाम में भी सबक मिलेगा। लगातार मिल रही धमकियों से पीड़ित छात्राएं अपने भविष्य को लेकर चिंतित हो गई हैं। साथ में रहने वाली अन्य छात्राएं इसी डर से खुलकर सामने नहीं आ रहीं। छात्राओं के मुताबिक उन्हें पुलिस कार्रवाई का डर दिखाया गया। वार्डन ने कहा कि थाने में कंप्लेन दर्ज कराई जाएगी। पीड़ित छात्राओं के मुताबिक यह पूरा प्रयास दबाव बनाने के लिए किया गया ताकि कोई भी छात्रा दोबारा शिकायत करने की हिम्मत न कर सके।
हक की आवाज उठाने पर छात्राओं को बताया जा रहा ‘कैरेक्टरलेस’
छात्राओं ने हॉस्टल की वार्डन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जो छात्राएं आवाज उठा रही हैं, उन्हें बदनाम किया जा रहा है। विरोध करने वाली लड़कियों को “कैरेक्टरलेस” कहा जा रहा है। इससे छात्राओं के आत्मसम्मान को ठेस पहुंच रही है। एक छात्रा ने बताया कि उसने केवल खाने की शिकायत की थी। इसके बाद उसे लगातार मानसिक दबाव में रखा गया। छात्रा का आरोप है कि उसे डराया गया। अन्य लड़कियों को डराकर उसके खिलाफ किया जा रहा है। उसका गुनाह सिर्फ इतना है कि उसने अपने हक की आवाज उठा दी। अब उसके साथ अपराधी जैसा व्यवहार किया जा रहा है। कुछ अन्य छात्राओं ने भी वार्डन पर अलग-थलग करने के प्रयास का आरोप लगाया है।

पहले भी उठते रहे खाने की गुणवत्ता पर सवाल
अलकनंदा हॉस्टल में खाने की समस्या नयी नहीं है। छात्राओं के मुताबिक लंबे समय से शिकायतें चल रही थीं। खाने की गुणवत्ता बेहद खराब बताई जा रही है। कई बार खाने में घुन, बदबू और गंदगी मिली। छात्राओं का कहना है कि मेस की हालत लगातार खराब होती गई। इसके बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। शिकायतों को हल्के में लिया गया। कई छात्राओं ने कहा कि मजबूरी में वही खाना खाना पड़ता है। जब मामला सार्वजनिक हुआ तो सुधार करने की बजाय दबाव बढ़ा दिया गया। छात्राओं का कहना है कि समस्या खत्म करने की जगह शिकायत करने वालों को ही निशाना बनाया जा रहा है। इसी बात से छात्राओं में भारी नाराजगी है।
छात्राओं ने लगाई मदद की गुहार
डरी और सहमी छात्राओं ने अब बाहरी मदद मांगनी शुरू कर दी है। अलकनंदा हॉस्टल की कई छात्राओं ने नव्य जागरण के रिपोर्टर से संपर्क किया। छात्राओं ने कहा कि उनकी बात सुनी जाए। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो। उन्हें धमकाया न जाए। जबरन सादे कागज पर साइन कराए गए हैं। हॉस्टल से निकालने की चेतावनी दी गई है। यह सब बंद होना चाहिए। छात्राओं का कहना है कि वे केवल सुरक्षित माहौल चाहती हैं। उन्होंने मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन से भी हस्तक्षेप की मांग की, लेकिन उन्हें मदद नहीं मिली। छात्राओं ने कहा कि पढ़ाई के लिए आए हैं। डर और तनाव में रहना मुश्किल हो रहा है। कई छात्राओं ने कहा कि अब हॉस्टल में भरोसे का माहौल खत्म हो गया है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
पूरे विवाद के बावजूद यूनिवर्सिटी प्रशासन की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यही चुप्पी अब सवाल खड़े कर रही है। छात्र संगठनों ने भी मामले को गंभीर बताया है। कई छात्र नेता छात्राओं के समर्थन में आवाज उठाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि छात्राओं को परेशान करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा सबसे जरूरी है। उधर, यूनिवर्सिटी कैंपस में भी मंगलवार को पूरे दिन छात्राओं की समस्या पर चर्चा होती रही। हालांकि, मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन की चुप्पी बड़े सवाल खड़े कर रही है। अगर यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में यह मामला आंदोलन का रूप ले सकता है।
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