यूपी में ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया होगी हाईटेक: पुलिस वेरिफिकेशन और डिजिटल टेस्ट की तैयारी,पासपोर्ट की तर्ज पर होगी नई व्यवस्था

कानपुर|8 घंटे पहले
पुलिस वेरिफिकेशन और डिजिटल टेस्ट की तैयारी,पासपोर्ट की तर्ज पर होगी नई व्यवस्था

उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया में बड़े बदलाव की तैयारी है। परिवहन विभाग जल्द नई व्यवस्था लागू करने जा रहा है। इसके तहत लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को पासपोर्ट प्रणाली की तर्ज पर अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया जाएगा। नई व्यवस्था में ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग, डिजिटल टोकन, बायोमेट्रिक सत्यापन, ऑटोमैटिक ड्राइविंग टेस्ट और तय परिस्थितियों में पुलिस वेरिफिकेशन जैसी व्यवस्थाएं शामिल होंगी।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ड्राइविंग लाइसेंस के लिए पहले ऑनलाइन स्लॉट बुक करना होगा। इसके बाद निर्धारित समय पर आरटीओ पहुंचकर अधिकारियों के समक्ष औपचारिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। फिर ड्राइविंग टेस्ट देना होगा। सरकार का उद्देश्य केवल उन्हीं आवेदकों को लाइसेंस जारी करना है, जो सुरक्षित वाहन संचालन और यातायात नियमों की पर्याप्त जानकारी रखते हों। परिवहन विभाग जल्द ही इन नए नियमों को अधिसूचित करने की तैयारी में है।

डिजिटल टोकन और पुलिस वेरिफिकेशन पर जोर

नई प्रणाली में पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तरह आरटीओ कार्यालयों में भी डिजिटल टोकन व्यवस्था लागू की जाएगी। आवेदकों को तय समय के अनुसार टोकन मिलेगा और स्क्रीन पर नंबर आने के बाद ही वे बायोमेट्रिक, फोटो या अन्य काउंटर की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। इससे कार्यालयों में भीड़ कम होने के साथ दलालों की भूमिका भी सीमित होने की उम्मीद है। ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने से पहले पुलिस वेरिफिकेशन का भी प्रावधान प्रस्तावित है। हालांकि यह सभी आवेदकों पर लागू नहीं होगा। परिवहन विभाग के अनुसार, बस, ट्रक, ऑटो और टैक्सी जैसे कमर्शियल वाहन चालकों के लिए चरित्र एवं आपराधिक रिकॉर्ड का सत्यापन अनिवार्य रहेगा। वहीं निजी वाहन चालकों के मामलों में केवल आधार डेटा मेल न खाने या गंभीर हिट एंड रन जैसे मामलों में पुलिस जांच कराई जाएगी।

कैमरे और सेंसर से होगी ड्राइविंग की जांच

मैन्युअल ड्राइविंग टेस्ट की जगह अब मान्यता प्राप्त हाईटेक ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटरों पर ऑटोमैटिक टेस्ट की व्यवस्था लागू की जाएगी। सेंसर, कैमरे और कंप्यूटर आधारित प्रणाली आवेदक की ड्राइविंग क्षमता का मूल्यांकन करेगी। लखनऊ, कानपुर, नोएडा और गाजियाबाद समेत प्रमुख आरटीओ को ऑटोमैटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक से जोड़ा जा रहा है। इन ट्रैक पर रिवर्स-एस, एट-शेप और अप-हिल जैसे परीक्षण होंगे। यदि वाहन का पहिया पीली लाइन को छूता है या सेंसर पोल से संपर्क होता है तो कंप्यूटर स्वतः आवेदक को फेल घोषित कर देगा। इस व्यवस्था में फेल होने की दर 40 प्रतिशत से अधिक बताई जा रही है।

बायोमेट्रिक सत्यापन और प्रशिक्षण को मिलेगी अहमियत

नई प्रक्रिया में आरटीओ पहुंचने पर आवेदक की लाइव फोटो और बायोमेट्रिक लेकर उसका आधार से मिलान किया जाएगा। ड्राइविंग टेस्ट से पहले भी दोबारा बायोमेट्रिक सत्यापन होगा। इससे किसी दूसरे व्यक्ति के माध्यम से टेस्ट दिलाने की संभावना समाप्त हो जाएगी। पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड तत्काल सरकारी सारथी पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। परिवहन विभाग ने यह भी प्रस्तावित किया है कि यदि कोई आवेदक सरकार से मान्यता प्राप्त ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर में 28 दिन का प्रशिक्षण पूरा कर फॉर्म-5 प्राप्त कर लेता है, तो उसे अलग से आरटीओ या ऑटोमैटिक ट्रैक पर ड्राइविंग टेस्ट नहीं देना होगा। ऐसे आवेदकों को सीधे स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया जा सकेगा। परिवहन विभाग के अनुसार प्रदेश में इस समय करीब 2.99 करोड़ सक्रिय ड्राइविंग लाइसेंस हैं। इनमें सबसे अधिक 13.66 लाख लाइसेंस लखनऊ आरटीओ से जारी हुए हैं। विभाग का मानना है कि सड़क सुरक्षा को मजबूत करने, नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और फर्जी लाइसेंस पर रोक लगाने के उद्देश्य से यह नई व्यवस्था लागू की जा रही है।

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