आयुष्मान सारथी एप ने मृत बालिका को बताया जिंदा: इलाज के दौरान हुई मौत, पिता को भेजा बधाई संदेश

कुशीनगर|17 घंटे पहले
 इलाज के दौरान हुई मौत, पिता को भेजा बधाई संदेश

आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज में कथित अनियमितता का एक चौंकाने वाला मामला कुशीनगर से सामने आया है। यहां इलाज के दौरान एक 14 वर्षीय बालिका की मौत हो गई। लेकिन दाह संस्कार के दो दिन बाद आयुष्मान सारथी एप की ओर से उसके पिता के मोबाइल पर ऐसा संदेश पहुंचा। जिसने परिवार के जख्मों को फिर से हरा कर दिया। संदेश में बालिका के सफल इलाज के बाद सकुशल घर पहुंचने पर बधाई दी गई थी। इस घटना ने न केवल शोकाकुल परिवार को आहत किया, बल्कि आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों में होने वाले इलाज और रिकॉर्ड प्रबंधन की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कसया तहसील क्षेत्र के सुमही गांव निवासी जयप्रकाश प्रजापति ने अपनी 14 वर्षीय पुत्री राजनंदनी को पित्ताशय की पथरी के ऑपरेशन के लिए 23 मई को गोरखपुर स्थित एक निजी अस्पताल में आयुष्मान कार्ड के माध्यम से भर्ती कराया था। परिजनों का आरोप है कि 24 मई की रात ऑपरेशन के दौरान बालिका की मौत हो गई। पिता का कहना है कि ऑपरेशन के कई घंटे बाद तक अस्पताल कर्मी उन्हें यह बताते रहे कि सर्जरी जारी है। जब उन्होंने स्वयं जानकारी लेने का प्रयास किया तो बेटी को मृत अवस्था में पाया। इसके बाद वह बॉडी लेकर गांव लौट आए। परिजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया।

रिकॉर्ड में पांच दिन भर्ती, 27 मई को दिखाया डिस्चार्ज

परिवार का आरोप है कि 27 मई को उनके मोबाइल पर आयुष्मान सारथी एप से संदेश प्राप्त हुआ। जिसमें बताया गया कि उनकी बेटी इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर पहुंच गई है। इसके लिए उन्हें बधाई दी जाती है। संदेश में यह भी दर्ज था कि बालिका पांच दिनों तक अस्पताल में भर्ती रही और 27 मई को डिस्चार्ज हुई। जबकि परिजनों के अनुसार भर्ती होने के 24 घंटे के भीतर ही उसकी मौत हो चुकी थी। उसका अंतिम संस्कार भी किया जा चुका था।

जांच की मांग, अधिकारियों को सौंपा प्रार्थना पत्र

घटना से आहत जयप्रकाश प्रजापति ने जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी को शिकायती पत्र देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि अस्पताल और संबंधित प्रणाली में गंभीर लापरवाही हुई है। वहीं, इस प्रकरण ने आयुष्मान योजना के तहत मरीजों के इलाज, अस्पतालों द्वारा दर्ज किए जाने वाले डेटा और डिजिटल रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि जांच के माध्यम से सच्चाई सामने आएगी। दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई होगी।

नव्य जागरण

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