यूपीआई शुल्क पर मायावती का हमला: बोलीं- जनता पर बढ़ेगा खर्च, जनकल्याण पर ध्यान दे सरकार

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क की नई व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि इससे आम जनता की जेब पर असर पड़ेगा और उसका खर्च बढ़ेगा। ‘एक्स’ पर पोस्ट में मायावती ने कहा कि सरकार ने पहले यूपीआई के जरिए डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा दिया और अब इस पर शुल्क लेने की नई व्यवस्था शुरू की जा रही है। उनके मुताबिक, यह जनता से अतिरिक्त आर्थिक बोझ वसूलने जैसा है। उन्होंने कहा कि इसको चाहे कोई भी नाम दिया जाए, अंततः इसका असर आम लोगों पर पड़ेगा और उनका खर्च बढ़ेगा।
मायावती ने कहा कि देश की बड़ी आबादी पहले से गरीबी और महंगाई की मार झेल रही है। ऐसे में सरकार को ऐसी नीतियों पर ध्यान देना चाहिए, जिनका केंद्र जनकल्याण हो, न कि लाभ कमाने वाली व्यावसायिक सोच। उन्होंने कहा कि जब जनता आर्थिक तंगी और परेशानियों से जूझ रही हो, तब सरकार को उसकी चिंता करनी चाहिए। गौरतलब है कि 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर कारोबारियों से शुल्क लेने की छूट दी गई है। वहीं, 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर कारोबारियों के लिए 0.4 प्रतिशत शुल्क तय किया गया है। 75,000 रुपये या इससे अधिक के भुगतान पर शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है।
स्मार्ट स्कूलों पर भी सरकार को घेरा
मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार की करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश के लगभग 14,500 स्कूलों को ‘स्मार्ट स्कूल’ बनाने की घोषणा पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे अच्छी पहल बताया, लेकिन कहा कि बच्चों को स्मार्ट पढ़ाई से पहले स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्कूलों में पक्की छत, बेंच-कुर्सी, किताबें, शौचालय, खेल का मैदान और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
प्रति स्कूल बजट पर उठाया सवाल
बसपा प्रमुख ने सवाल उठाया कि प्रति स्कूल करीब दो लाख रुपये के बजट में इन सभी मूलभूत व्यवस्थाओं को किस तरह पूरा किया जा सकेगा। उन्होंने सरकार से इस पर गंभीरता से विचार करने को कहा। मायावती ने कहा कि जब बड़ी आबादी आर्थिक परेशानियों से गुजर रही है, तब सरकारी नीतियों में आम लोगों की जरूरतों और जनकल्याण को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।










