गोरखपुर में बालिका हत्याकांड के बाद पुलिस महकमा सख्त: दागी पुलिसकर्मियों की बनेगी सूची, जांच और तबादलों की होगी समीक्षा

महाराजगंज|5 घंटे पहले
दागी पुलिसकर्मियों की बनेगी  सूची, जांच और तबादलों की होगी समीक्षा

शहर के चर्चित बालिका अपहरण, रेप और हत्या प्रकरण के बाद पुलिस महकमे में जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। डीआईजी गोरखपुर रेंज डॉ. एस चनप्पा ने गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज के पुलिस अधीक्षकों को ऐसे पुलिसकर्मियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिनके खिलाफ विभागीय जांच लंबित है या भ्रष्टाचार, महिला संबंधी अपराध, अनुशासनहीनता या अन्य गंभीर आरोप दर्ज हैं। सूची तैयार होने के बाद ऐसे कर्मियों के स्थानांतरण और लंबित मामलों के समयबद्ध निस्तारण की कार्रवाई की जाएगी।

हर जिले से मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट

डीआईजी के निर्देश के अनुसार संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक आरोपित पुलिसकर्मियों का पूरा विवरण तैयार करेंगे। रिपोर्ट में शिकायतों का स्वरूप, निलंबन, विभागीय कार्रवाई, दंड तथा वर्तमान स्थिति का उल्लेख किया जाएगा। उद्देश्य यह है कि गंभीर आरोपों का सामना कर रहे कर्मियों की नियमित समीक्षा हो और आवश्यकता पड़ने पर उनके विरुद्ध समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

रात्रिकालीन पिकेट व्यवस्था भी होगी मजबूत

कोतवाली क्षेत्र की घटना के बाद रात्रिकालीन पुलिस व्यवस्था की भी समीक्षा शुरू कर दी गई है। अधिकारियों से यह रिपोर्ट मांगी गई है कि प्रमुख मार्गों और संवेदनशील स्थानों पर रात के समय वाहनों और संदिग्ध व्यक्तियों की प्रभावी जांच क्यों नहीं हो रही थी। जिस मार्ग से आरोपी करीब 29 किलोमीटर तक आवाजाही करता रहा, उस दौरान पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवालों को देखते हुए पिकेट व्यवस्था में आवश्यक बदलाव की तैयारी की जा रही है।

पहले भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई

डीआईजी डॉ. एस चनप्पा ने बताया कि विभागीय जांच का सामना कर रहे पुलिसकर्मियों की सूची तैयार होने के बाद उनके स्थानांतरण की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही लंबित विभागीय जांचों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि पिपराइच क्षेत्र के महुआचाफी गांव में 15 सितंबर 2025 को नीट की तैयारी कर रहे छात्र के अपहरण और हत्या के मामले में भी पुलिस महकमे में बड़ी कार्रवाई हुई थी। एडीजी जोन की जांच रिपोर्ट के आधार पर पशु तस्करों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई न करने के आरोप में 39 पुलिसकर्मियों को हटाया गया था। अब कोतवाली कांड के बाद भी पुलिस व्यवस्था की व्यापक समीक्षा और जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

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