इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती: मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर जांच के आदेश, हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को दिए कड़े निर्देश

प्रयागराज|06 मई 2026
मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर जांच के आदेश, हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को दिए कड़े निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के उन डॉक्टरों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए जो प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त हैं। साथ ही दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा गया है।

कोर्ट ने साफ कहा कि सरकारी डॉक्टरों का प्राथमिक दायित्व अस्पताल में मरीजों का इलाज करना है। लेकिन अगर वे अपनी जिम्मेदारियों को छोड़कर निजी अस्पतालों में समय दे रहे हैं, तो यह गंभीर लापरवाही है। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई 26 मई तय की है और तब तक की कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

स्वरूपरानी अस्पताल की हालत पर कोर्ट की नाराजगी

कोर्ट ने स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल की बदहाल स्थिति पर भी कड़ी टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि अस्पताल की स्थिति फंड या संसाधनों की कमी से खराब नहीं है। असली वजह डॉक्टरों की कार्यशैली है। कोर्ट के अनुसार, कई प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और लेक्चरर सरकारी अस्पताल में मरीजों को पर्याप्त समय नहीं देते। इसके बजाय वे मरीजों को निजी नर्सिंग होम में ले जाकर इलाज और सर्जरी करते हैं। इस कारण सरकारी अस्पताल की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। न्यायालय ने यह भी कहा कि इस तरह की गतिविधियों से प्रयागराज में समानांतर मेडिकल इंडस्ट्री खड़ी हो गई है। इसका सीधा नुकसान आम मरीजों को उठाना पड़ रहा है।

20 साल से अधूरा कार्डियोलॉजी भवन, कोर्ट ने मांगा जवाब

कोर्ट ने अस्पताल में लंबे समय से अधूरे पड़े कार्डियोलॉजी भवन पर भी नाराजगी जताई। जानकारी के अनुसार, इस भवन का निर्माण साल 2006 में शुरू हुआ था। लेकिन दो दशक बाद भी यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका। कोर्ट ने कहा कि जब सरकार की ओर से फंड उपलब्ध कराया जा चुका है, तो इतनी देरी क्यों हो रही है। इस पर अधिकारियों ने बताया कि भवन अगस्त 2026 तक पूरा होकर चालू हो जाएगा। न्यायालय ने इस प्रोजेक्ट की निगरानी करने और समय पर पूरा कराने के निर्देश दिए हैं।

जमीन हस्तांतरण और कैबिनेट अनुमोदन पर भी सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अस्पताल के लिए जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया पर भी जानकारी मांगी। सरकारी पक्ष की ओर से बताया गया कि करीब 31,314 वर्गमीटर जमीन के लिए सभी विभागों से अनापत्ति मिल चुकी है। यह प्रस्ताव कैबिनेट अनुमोदन के लिए भेजा गया है। अनुमति मिलते ही जमीन अस्पताल को हस्तांतरित कर दी जाएगी। कोर्ट ने इस प्रक्रिया को भी जल्द पूरा करने पर जोर दिया है।

डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर

सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि कुछ डॉक्टरों के खिलाफ पहले ही कार्रवाई शुरू हो चुकी है। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार सिंह और उनकी पत्नी डॉ. एलाक्षी शुक्ला के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि वे मरीजों को निजी अस्पताल में ले जाकर इलाज करते थे। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कहा कि इस तरह की गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।

स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने पर जोर

कोर्ट की इस सख्ती को स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। न्यायालय ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकारी संस्थानों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर टिकी है। उम्मीद है कि इस मामले में ठोस कार्रवाई होगी और सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

नव्य जागरण

पूरी खबर पढ़ें ऐप पर

ऐप डाउनलोड करने के लिए QR कोड
ऐप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करेंGET IT ON Google Play

अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर

ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।