दो बालिगों के बीच सहमति से बने संबंध अपराध नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में सुनाया अहम फैसला, शादी न करने पर दर्ज कराया था केस

शादी का वादा कर दुष्कर्म से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि दो बालिगों के बीच सहमति से लंबे समय तक चलने वाले संबंध को, यदि बाद में विवाह का वादा पूरा नहीं होता है, तो उसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना ने ट्रायल कोर्ट में चल रही मुकदमे की कार्यवाही को रद्द कर दिया।
यह मामला अलीगढ़ के गांधी पार्क थाने में जितेंद्र कुमार के खिलाफ दर्ज एफआईआर से जुड़ा था। एक युवती ने उन पर 2014 से 2021 तक शादी का झूठा वादा कर यौन संबंध बनाने और गर्भपात कराने के आरोप लगाए गए थे। आरोपी के भाई और भाभी पर धमकी देने का आरोप लगाया था।
पढ़ाई के दौरान शुरू हुआ था प्रेम प्रसंग
आरोपियों ने चार्जशीट, संज्ञान आदेश सहित मुकदमे की पूरी कार्यवाही को रद्द करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में एक अर्जी दायर की थी। याची के अधिवक्ता ने अपनी दलील में कहा कि पीड़िता और आरोपी के बीच पढ़ाई के दौरान से ही प्रेम संबंध थे। दोनों वयस्क थे और अपनी सहमति से इस संबंध में थे। अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि पीड़िता ने आरोपी से 10 लाख रुपये की मांग की थी और रुपये न मिलने पर झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई।
धारा-69 के तहत दर्ज मामलों के लिए प्रासंगिक
वहीं, लड़की के वकील ने कहा कि आरोपी ने शादी का झूठा वादा करके संबंध बनाए थे। न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकल पीठ का यह फैसला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा-69 के तहत दर्ज मामलों के लिए प्रासंगिक है, जो शादी के झूठे वादे पर संबंध बनाने से संबंधित है।
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