एडेड स्कूल शिक्षकों को ग्रेच्युटी का अधिकार: देरी आधार नहीं: हाईकोर्ट, खंडपीठ ने याचिका खारिज करने से किया इनकार

प्रयागराज|17 अप्रैल 2026
देरी आधार नहीं: हाईकोर्ट, खंडपीठ ने याचिका खारिज करने से किया इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सहायता प्राप्त (एडेड) शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों के अधिकारों को स्पष्ट करते हुए कहा है कि 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षक भुगतान ग्रेच्युटी अधिनियम, 1972 के तहत ग्रेच्युटी पाने के हकदार हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल देरी के आधार पर किसी कर्मचारी के इस कानूनी अधिकार को छीना नहीं जा सकता।

यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह की खंडपीठ ने रामपुर निवासी मेहर जहां की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याची 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हुई थीं और उन्हें पेंशन तो मिल रही थी, लेकिन ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किया गया था।

ग्रेच्युटी को बताया कानूनी अधिकार

याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि ग्रेच्युटी एक्ट 1972 के तहत उनकी मुवक्किल ग्रेच्युटी पाने की पूर्ण हकदार हैं। वहीं, राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि याची ने 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्ति का विकल्प नहीं चुना था। इसलिए शासनादेश के अनुसार वह पात्र नहीं हैं। हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि ग्रेच्युटी कर्मचारी का वैधानिक अधिकार है। जिसे केवल तकनीकी आधार या देरी के कारण रोका नहीं जा सकता।

शिक्षकों के लिए अहम फैसला

यह निर्णय एडेड संस्थानों में कार्यरत और सेवानिवृत्त शिक्षकों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। इससे भविष्य में ऐसे मामलों में स्पष्टता आएगी और शिक्षकों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकेगा।

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