प्रयागराज हाईकोर्ट का सख्त निर्देश: निजी निर्माण तोड़ने से पहले नोटिस जरूरी, कार्रवाई के दौरान प्रोसेस का करें पालन

प्रयागराज|24 अप्रैल 2026
निजी निर्माण तोड़ने से पहले नोटिस जरूरी, कार्रवाई के दौरान प्रोसेस का करें पालन

प्रयागराज हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि किसी भी निजी जमीन पर बने निर्माण को गिराने से पहले संबंधित व्यक्ति को नोटिस देना अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा कि बिना नोटिस और सुनवाई का मौका दिए सीधे कार्रवाई करना कानून के खिलाफ है। यह फैसला आम लोगों के अधिकारों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। कोर्ट ने प्रशासन और विकास प्राधिकरण को स्पष्ट संदेश दिया है कि वे कार्रवाई के दौरान तय प्रक्रिया का पालन करें। मनमाने तरीके से ध्वस्तीकरण की अनुमति नहीं दी जा सकती।

यह निर्देश न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने दिया। दोनों जजों ने गोपाल कृष्ण और अन्य की याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की संपत्ति से जुड़े मामले में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत लागू होंगे। यानी पहले नोटिस दिया जाएगा। फिर जवाब मांगा जाएगा। उसके बाद ही कोई कार्रवाई की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि सुनवाई का अवसर देना जरूरी है। बिना इसके की गई कार्रवाई को अवैध माना जा सकता है।

मामले की पूरी पृष्ठभूमि

यह मामला प्लॉट संख्या 27 और 28 से जुड़ा था। दोनों प्लॉट के बीच सीमा विवाद सामने आया था। राजस्व विभाग की पैमाइश रिपोर्ट में बताया गया कि प्लॉट संख्या 27 सरकारी जमीन है। इसे ‘नवीन परती’ भूमि बताया गया। वहीं प्लॉट संख्या 28 निजी स्वामित्व वाली जमीन है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनकी निजी जमीन पर भी अवैध तरीके से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है। इस पर कोर्ट ने पूरे मामले की गंभीरता से सुनवाई की।

सरकारी और निजी जमीन पर अलग नियम

कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने का अधिकार प्रशासन के पास है। अगर कोई व्यक्ति सरकारी जमीन पर कब्जा करता है, तो उसे हटाया जा सकता है लेकिन निजी जमीन के मामले में नियम अलग हैं। कोर्ट ने कहा कि निजी संपत्ति पर कार्रवाई करने से पहले सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी है। सीधे बुलडोजर चलाना उचित नहीं है। पहले नोटिस देना होगा। फिर जवाब का इंतजार करना होगा। उसके बाद ही फैसला लिया जा सकता है।

विकास प्राधिकरण को चेतावनी

कोर्ट ने विकास प्राधिकरण को भी स्पष्ट निर्देश दिए। कहा गया कि मास्टर प्लान के उल्लंघन पर कार्रवाई की जा सकती है लेकिन इसके लिए तय कानूनी प्रक्रिया जरूरी है। बिना प्रक्रिया के की गई कार्रवाई को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। इससे प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठ सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि कानून का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है। चाहे वह आम नागरिक हो या सरकारी संस्था।

लोगों के अधिकारों को मिली मजबूती

इस फैसले को आम लोगों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है। कई बार बिना सूचना के तोड़फोड़ की शिकायतें सामने आती हैं। अब इस फैसले के बाद ऐसे मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी। लोगों को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा। प्रशासन को भी अपनी कार्रवाई को कानूनी दायरे में रखना होगा।

नव्य जागरण

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