संतकबीरनगर में विकास कार्यों में बड़ा घोटाला: टीएसी जांच में 32 लाख से ज्यादा की अनियमितता उजागर, ग्राम प्रधान समेत कई अधिकारी दोषी

संतकबीरनगर|07 मई 2026
टीएसी जांच में 32 लाख से ज्यादा की अनियमितता उजागर, ग्राम प्रधान समेत कई अधिकारी दोषी

जिले के सेमरियावां ब्लॉक स्थित बढ़या माफी गांव में विकास कार्यों के नाम पर बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है। तकनीकी लेखा परीक्षा यानी टीएसी जांच में 32 लाख 53 हजार रुपये से अधिक की अनियमितता सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। जांच में ग्राम प्रधान, तीन ग्राम पंचायत अधिकारी, तकनीकी सहायक और एक कंसल्टिंग इंजीनियर को दोषी पाया गया है। जिलाधिकारी आलोक कुमार ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

पूरा मामला गांव निवासी शहजाद पुत्र मोहम्मद अमीन की शिकायत के बाद सामने आया। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि गांव में विकास योजनाओं के नाम पर भारी वित्तीय गड़बड़ी की गई है। इसके बाद प्रशासन ने तकनीकी लेखा परीक्षा कराई। जांच में पंचम वित्त और 15वें वित्त आयोग की योजनाओं में अनियमितता मिली। जांच रिपोर्ट के अनुसार, इन योजनाओं में 1 लाख 64 हजार 293 रुपये का गबन किया गया। वहीं मनरेगा योजना में 30 लाख 89 हजार 446 रुपये की वित्तीय गड़बड़ी की पुष्टि हुई। कुल मिलाकर 32 लाख 53 हजार रुपये से अधिक की अनियमितता सामने आई है।

ग्राम प्रधान समेत छह लोग दोषी

टीएसी जांच में ग्राम प्रधान अर्जुन प्रसाद को मुख्य आरोपी माना गया है। इसके अलावा तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव योगेंद्र कुमार गौड़, चंद्र प्रकाश और शिवमूरत मौर्य को भी दोषी ठहराया गया है। तकनीकी सहायक रमेश चंद गुप्ता और कंसल्टिंग इंजीनियर मनमोहन प्रजापति की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि विकास कार्यों में फर्जी भुगतान, अधूरे कार्यों को पूर्ण दिखाना और कागजों पर खर्च दिखाकर सरकारी धन निकालने जैसी गंभीर अनियमितताएं की गईं। कई परियोजनाओं में मौके पर काम नहीं मिला, जबकि भुगतान पहले ही कर दिया गया था।

जिलाधिकारी ने की सख्त कार्रवाई

मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी आलोक कुमार ने तुरंत सख्त कदम उठाए। उन्होंने ग्राम प्रधान अर्जुन प्रसाद के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार तत्काल प्रभाव से सीज कर दिए। साथ ही बीडीओ सेमरियावां को निर्देश दिया गया कि गांव के विकास कार्यों के संचालन के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित करने का प्रस्ताव तैयार किया जाए। जिलाधिकारी ने जिला पंचायत राज अधिकारी यानी डीपीआरओ को भी निर्देश दिए हैं कि दोषी ग्राम पंचायत सचिवों और कंसल्टिंग इंजीनियर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए। साथ ही गबन की गई सरकारी धनराशि की वसूली भी सुनिश्चित की जाए।

दूसरी ग्राम पंचायत में भी मिला गबन

इसी तरह का एक और मामला जिले की दूसरी ग्राम पंचायत से भी सामने आया है। पचपोखरी गांव निवासी इबरार खान और आफताब आलम ने दिसंबर 2025 में ग्राम्य विकास आयुक्त को शिकायत भेजी थी। शिकायत में गांव की 10 विकास परियोजनाओं में लाखों रुपये के गबन का आरोप लगाया गया था। इस मामले की जांच जिलाधिकारी ने उपायुक्त मनरेगा डॉ. प्रभात कुमार द्विवेदी और सहायक अभियंता अमरनाथ की संयुक्त टीम से कराई। जांच में चार लाख दो हजार 508 रुपये की वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुई। इस मामले में भी ग्राम प्रधान के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों पर रोक लगा दी गई है।

गांव में चर्चा का विषय बना मामला

बढ़या माफी गांव में घोटाले की खबर के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि गांव में कई विकास कार्य सिर्फ कागजों पर दिखाए गए। सड़कों, नालियों और अन्य योजनाओं के नाम पर पैसा निकाला गया, लेकिन जमीनी स्तर पर काम नहीं हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही थी। अब जांच में मामला सही पाए जाने के बाद लोगों को उम्मीद है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी और सरकारी धन की रिकवरी भी की जाएगी।

प्रशासन ने दिए पारदर्शिता के संकेत

जिलाधिकारी आलोक कुमार ने साफ कहा है कि विकास योजनाओं में भ्रष्टाचार किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों की नियमित निगरानी की जाए। साथ ही योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जांच व्यवस्था को और मजबूत किया जाए।

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