संतकबीरनगर में अवैध मदरसे पर बुलडोजर एक्शन: विदेशी फंडिंग और सरकारी जमीन कब्जे के आरोप, 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात

संतकबीरनगर|26 अप्रैल 2026
विदेशी फंडिंग और सरकारी जमीन कब्जे के आरोप, 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात

संतकबीरनगर में रविवार सुबह प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया। ब्रिटिश नागरिक मौलाना शमसुल हुदा खान के मदरसे पर बुलडोजर चला दिया गया। सुबह करीब 10 बजे से शुरू हुए इस अभियान में 6 बुलडोजर लगाए गए। सबसे पहले मदरसे की चारदीवारी तोड़ी गई। इसके बाद बिल्डिंग के पिलर गिराए जाने लगे। पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील रहा। मौके पर 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए। इनमें 30 महिला सिपाही भी शामिल रहीं। इसके अलावा पीएसी की दो कंपनियां भी सुरक्षा के लिए मौजूद थीं।

प्रशासन के अनुसार यह मदरसा सरकारी जमीन पर बनाया गया था। करीब 640 वर्गमीटर जमीन पर तीन मंजिला इमारत खड़ी की गई थी। इसमें 25 कमरे बनाए गए थे। इस निर्माण पर करीब 5 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। अधिकारियों का दावा है कि इस प्रोजेक्ट में विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल किया गया था। बताया जा रहा है कि साल 2024 से यह मदरसा बंद पड़ा था। इससे पहले यहां करीब 400 बच्चे पढ़ते थे। प्रशासन को लंबे समय से इस निर्माण पर आपत्ति थी। जांच में इसे अवैध पाया गया, जिसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई।

कानूनी प्रक्रिया के बाद लिया गया एक्शन

यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई। इसके पीछे लंबी कानूनी प्रक्रिया रही है। 2024 में गांव के एक व्यक्ति ने एसडीएम कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी। नवंबर 2025 में कोर्ट ने मदरसे को गिराने का आदेश दिया था। इसके लिए 15 दिन का समय भी दिया गया था। मदरसा प्रबंधन ने इस फैसले के खिलाफ डीएम के पास अपील की लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। बाद में मामला कमिश्नर तक पहुंचा। 25 अप्रैल को बस्ती मंडल के कमिश्नर ने भी एसडीएम के आदेश को सही ठहराया। इसके बाद प्रशासन ने अंतिम नोटिस जारी कर कार्रवाई शुरू कर दी।

विदेशी फंडिंग और सरकारी जमीन कब्जे के आरोप, 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात

मौलाना पर कई गंभीर आरोप

मौलाना शमसुल हुदा खान फिलहाल ब्रिटेन में रह रहा है। उसने वहां की नागरिकता ले रखी है। लेकिन भारत में उसके खिलाफ कई केस दर्ज हैं। उस पर विदेशी फंडिंग, धोखाधड़ी और आर्थिक गड़बड़ी के आरोप हैं। तीन मामलों में केस दर्ज हो चुके हैं। इनमें से दो मामलों में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। जांच में यह भी सामने आया कि मौलाना 2017 में देश छोड़ने के बाद भी भारत के एक मदरसे से वेतन लेता रहा। उसने करीब 16 लाख रुपए अवैध तरीके से प्राप्त किए। बाद में उसे वीआरएस भी दे दिया गया। इस मामले में विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई।

एटीएस जांच में सामने आया नेटवर्क

एटीएस की जांच में मौलाना के कई चौंकाने वाले कनेक्शन सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार वह 2007 से संदिग्ध गतिविधियों में शामिल था। वह पाकिस्तान के कई शहरों में जाता रहा और वहां के धार्मिक संगठनों से संपर्क में था। भारत में भी उसके कुछ संदिग्ध व्यक्तियों और अलगाववादी तत्वों से संबंध बताए गए हैं। आरोप है कि वह ‘दावते इस्लाम’ नाम की गतिविधि के जरिए कट्टरपंथ फैलाने की कोशिश कर रहा था। विदेशी फंडिंग के स्रोत को छिपाने की भी कोशिश की गई।

पहले भी सील हो चुके हैं मदरसे

प्रशासन ने इससे पहले भी मौलाना के मदरसों पर कार्रवाई की थी। 2024 में एक मदरसा सील किया गया था। इसके बाद उसने पास में दूसरा मदरसा खोल लिया। 2025 में उसे भी सील कर दिया गया। इसके अलावा एक मकान में गर्ल्स हॉस्टल भी चलाया जा रहा था। यहां अलग-अलग जिलों की लड़कियां रहती थीं। प्रशासन को शक है कि यही संस्थान पूरे नेटवर्क का हिस्सा थे।

प्रशासन का सख्त संदेश

इस कार्रवाई के जरिए प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि अवैध निर्माण और संदिग्ध गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि कानून के अनुसार ही कार्रवाई की गई है।

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