भारत-बांग्लादेश सीमा पर तेज हुई फेंसिंग की कवायद: ग्रामीणों में जगी सुरक्षा की नई उम्मीद, किसानों ने कहा- अब फसल और परिवार दोनों रहेंगे सुरक्षित

कोलकाता|1 घंटा पहले
ग्रामीणों में जगी सुरक्षा की नई उम्मीद, किसानों ने कहा- अब फसल और परिवार दोनों रहेंगे सुरक्षित

भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में फेंसिंग और आधारभूत सुरक्षा ढांचे के निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी है। लंबे समय से खुली सीमा और घुसपैठ की समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत किया है। मुर्शिदाबाद जिले के जलंगी क्षेत्र स्थित सकारपाड़ा गांव में जब बीएसएफ की टीम सीमांकन और फेंसिंग की तैयारी के लिए पहुंची, तो स्थानीय लोगों ने मिठाइयां बांटकर उनका स्वागत किया। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों बाद उन्हें अपनी जमीन, फसल और परिवार की सुरक्षा को लेकर भरोसा महसूस हो रहा है।

भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे इस गांव की स्थिति बेहद संवेदनशील मानी जाती है। यहां आबादी का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है। गांव के खेत सीधे इंटरनेशनल बॉर्डर से लगे हुए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, सीमा पर फेंसिंग नहीं होने के कारण वर्षों से उन्हें फसल चोरी, अवैध घुसपैठ और विवाद जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। किसानों का आरोप है कि कई बार पड़ोसी देश के लोग भारतीय सीमा में घुसकर खेतों की फसल काट ले जाते थे। जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। स्थिति ऐसी थी कि शाम के बाद ग्रामीण अपने खेतों तक जाने से भी कतराते थे।

किसानों ने बताया वर्षों का दर्द

ग्राम पंचायत सदस्य ने बताया कि सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए यह केवल सुरक्षा का नहीं बल्कि आजीविका का भी सवाल है। उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों से ग्रामीण लगातार असुरक्षा के माहौल में जी रहे थे। खेतों की निगरानी करना मुश्किल हो जाता था। अक्सर विवाद की स्थिति पैदा हो जाती थी। अब फेंसिंग बनने से उम्मीद है। अवैध आवाजाही रुकेगी और किसानों की मेहनत सुरक्षित रह सकेगी। ग्रामीणों का मानना है कि बीएसएफ की सक्रिय मौजूदगी से सीमा क्षेत्र में कानून व्यवस्था भी मजबूत होगी।

सीमा सुरक्षा परियोजना को मिली रफ्तार

राज्य में नई प्रशासनिक पहल के बाद सीमा सुरक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट्स को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार अब तक सीमा क्षेत्र में 27 किलोमीटर लंबाई की जमीन बीएसएफ को हस्तांतरित की जा चुकी है। इनमें से 18 किलोमीटर क्षेत्र में फेंसिंग निर्माण का कार्य प्रस्तावित है। नौ किलोमीटर क्षेत्र में नए बॉर्डर आउटपोस्ट और सुरक्षा ढांचे विकसित किए जाएंगे। मुर्शिदाबाद, कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, सिलीगुड़ी और मालदा जैसे संवेदनशील जिलों को इस अभियान में प्राथमिकता दी गई है।प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक मुर्शिदाबाद जिले में सबसे अधिक भूमि सुरक्षा परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराई गई है। राज्य सरकार ने अगले 45 दिनों के भीतर लगभग 600 एकड़ भूमि बीएसएफ को हस्तांतरित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस भूमि का उपयोग कंटीले तारों की फेंसिंग, चौकियों के निर्माण और आधुनिक निगरानी तंत्र विकसित करने के लिए किया जाएगा।

सीमावर्ती इलाकों में बढ़ेगा सुरक्षा कवच

एक्सपर्ट का मानना है कि फेंसिंग और सुरक्षा ढांचे के विस्तार से न केवल अवैध घुसपैठ और तस्करी पर अंकुश लगेगा। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले हजारों परिवारों को भी राहत मिलेगी। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से जिस सुरक्षा कवच का इंतजार था। वह अब वास्तविकता का रूप लेता दिखाई दे रहा है। सीमा पर चल रही यह कवायद राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ सीमावर्ती नागरिकों के जीवन और आजीविका की रक्षा की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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