टीईटी पास करने की मोहलत बढ़ी: सुप्रीम कोर्ट ने दी एक साल की राहत, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर भी जोर

देशभर के हजारों शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने की समय सीमा एक वर्ष के लिए बढ़ा दी है। अब शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी परीक्षा अनिवार्य रूप से उत्तीर्ण करनी होगी। इससे पहले यह अंतिम तिथि 31 अगस्त 2027 निर्धारित थी। अदालत के इस फैसले से उन शिक्षकों को राहत मिलेगी, जो अब तक परीक्षा पास नहीं कर सके हैं। अपनी सेवा को लेकर असमंजस में थे।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए यह भी स्पष्ट कर दिया कि शिक्षा की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने शिक्षकों की उस मांग को खारिज कर दिया है। जिसमें वर्ष 2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से बाहर रखने की अपील की गई थी। अदालत ने साफ कहा कि शिक्षक केवल अपनी नौकरी बचाने तक सीमित न रहें। यह भी सुनिश्चित करें कि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
‘बच्चों के भविष्य से समझौता नहीं’
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों को लेकर सख्त लेकिन महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। न्यायालय ने कहा कि शिक्षक समाज के भविष्य का निर्माण करते हैं। इसलिए उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से समझना होगा। अदालत ने दोहराया कि टीईटी केवल औपचारिक परीक्षा नहीं, बल्कि शिक्षकों की क्षमता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने का माध्यम है। कुछ दिन पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में टिप्पणी करते हुए कहा था कि शिक्षक स्वार्थी रवैया न अपनाएं और यह सोचें कि बच्चों को बेहतर शिक्षा कैसे उपलब्ध कराई जाए। कोर्ट के इन बयानों को शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में अहम माना जा रहा है।
NCTE के नियमों को लेकर उठा था विवाद
दरअसल, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने देशभर में शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा पास करना अनिवार्य किया था। इसके बाद कई राज्यों में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक सामने आए। जिन्होंने वर्षों से सेवा में होने के बावजूद अब तक टीईटी क्वालिफाई नहीं किया है। इसी को लेकर समय सीमा बढ़ाने की मांग सुप्रीम कोर्ट में की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि लंबे समय से पढ़ा रहे शिक्षकों को अचानक सेवा से बाहर करना उचित नहीं होगा। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुभव महत्वपूर्ण है। योग्यता और गुणवत्ता शिक्षा की मूल शर्त है।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में अहम फैसला
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है। एक तरफ शिक्षकों को अतिरिक्त समय देकर राहत दी गई है। वहीं दूसरी ओर गुणवत्ता शिक्षा के मानकों को भी बरकरार रखा गया है। अब शिक्षकों के सामने स्पष्ट संदेश है कि उन्हें निर्धारित समय के भीतर टीईटी परीक्षा पास करनी ही होगी। जिससे भविष्य में किसी प्रकार की प्रशासनिक या कानूनी परेशानी का सामना न करना पड़े।
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