राम रहीम फिर 30 दिन की पैरोल पर बाहर: नौ वर्षों में 16वीं बार मिली राहत, सिरसा डेरे पहुंचते ही बढ़ी हलचल

हरियाणा की सुनारिया जेल में बंद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम एक बार फिर पैरोल पर जेल से बाहर आ गया। मंगलवार सुबह करीब 6:30 बजे वह रोहतक की सुनारिया जेल से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच निकला और लगभग सवा नौ बजे सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय पहुंच गया। उसके काफिले में टोयोटा लैंड क्रूजर, फॉर्च्यूनर लिजेंडर समेत आठ लग्जरी गाड़ियां शामिल रहीं। डेरा प्रमुख के सिरसा पहुंचते ही प्रशासन और पुलिस अलर्ट मोड पर आ गए। भीड़ जुटने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने पहले से ही विशेष निगरानी शुरू कर दी थी। जेल प्रशासन ने भीड़ और अव्यवस्था से बचने के लिए राम रहीम को तड़के ही जेल से रवाना किया। सिरसा डेरे में उसकी एंट्री पिछले गेट से कराई गई, ताकि मुख्य मार्ग पर समर्थकों की भीड़ न जुट सके।
साध्वियों से यौन उत्पीड़न के मामलों में 20 साल की सजा काट रहे राम रहीम को पिछले नौ वर्षों में 16वीं बार पैरोल या फरलो मिली है। वर्ष 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद से वह लगातार अलग-अलग अवधियों के लिए जेल से बाहर आता रहा है। इस वर्ष जनवरी में भी उसे 40 दिन की पैरोल मिली थी और फरवरी में वह वापस जेल लौटा था। उस दौरान वह सिरसा डेरे में ही रहा था। इससे पहले वह उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित डेरे के आश्रम में भी समय बिताता रहा है। मंगलवार को सिरसा पहुंचने के तुरंत बाद राम रहीम ने अपने अनुयायियों के लिए एक वीडियो संदेश भी जारी किया, जिसमें उसने डेरे की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की।
कई गंभीर मामलों में सजा काट रहा डेरा प्रमुख
राम रहीम 25 अगस्त 2017 से जेल में बंद है। उसे दो साध्वियों के यौन शोषण के मामले में 20 साल की सजा सुनाई गई थी। इसके अलावा पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड और डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह हत्या मामले में भी उसे दोषी ठहराया गया था। हालांकि बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने दोनों मामलों में उसे राहत दे दी, लेकिन यौन शोषण मामले में उसकी सजा बरकरार है। डेरा प्रमुख की हर पैरोल को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस भी छिड़ती रही है। विपक्षी दल कई बार सरकार पर विशेष रियायत देने के आरोप लगा चुके हैं।
क्या होती है पैरोल और फरलो?
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, पैरोल और फरलो दोनों ही जेल से अस्थायी राहत के प्रावधान हैं, लेकिन इनके नियम अलग होते हैं। पैरोल विशेष परिस्थितियों में दी जाती है, जैसे परिवार में मृत्यु, बीमारी या किसी जरूरी पारिवारिक कारण पर। इसमें कैदी को सीमित समय के लिए बाहर रहने की अनुमति मिलती है। वहीं फरलो कैदी का कानूनी अधिकार माना जाता है और इसके लिए किसी विशेष कारण की जरूरत नहीं होती। अलग-अलग राज्यों में इसके नियम और प्रक्रिया अलग हो सकती है। राम रहीम को अब तक कई बार दोनों प्रावधानों के तहत राहत मिल चुकी है।
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