बद्रीनाथ में वीआईपी दर्शन शुल्क पर विवाद: 1.63 करोड़ की आय पर उठे सवाल , बोर्ड मंजूरी को लेकर गहराया मतभेद

1 घंटा पहले
1.63 करोड़ की आय पर उठे सवाल , बोर्ड मंजूरी को लेकर गहराया मतभेद

बद्रीनाथ धाम में चढ़ावा विवाद के बीच अब वीआईपी दर्शन शुल्क और वित्तीय प्रबंधन को लेकर नया विवाद सामने आ गया है। श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के भीतर ही वीआईपी दर्शन के लिए प्रति श्रद्धालु 1100 रुपये शुल्क वसूले जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। दावा किया गया है कि इस व्यवस्था से अब तक करीब 1.63 करोड़ रुपये की आय हुई है। वहीं वीआईपी मेहमानों के ठहरने और खानपान के नाम पर कथित फर्जी बिल तैयार किए जाने का मामला भी चर्चा में है।

चारधाम यात्रा के पीक सीजन के दौरान जून के अंतिम सप्ताह से बद्रीनाथ धाम में विशेष व्यवस्था के तहत वीआईपी दर्शन की सुविधा शुरू की गई। इसके लिए प्रत्येक श्रद्धालु से 1100 रुपये शुल्क लिया गया और आधिकारिक रसीद भी जारी की गई। विवाद तब शुरू हुआ जब समिति के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने सवाल उठाया कि इस व्यवस्था को लागू करने से पहले बीकेटीसी बोर्ड की औपचारिक मंजूरी नहीं ली गई।

सीईओ ने दी व्यवस्था की सफाई

बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने कहा कि वीआईपी दर्शन शुल्क कोई नई व्यवस्था नहीं है, बल्कि पहले से चली आ रही प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया गया है। उनके अनुसार यात्रा सीजन में बड़ी संख्या में लोग प्रोटोकॉल और वीआईपी श्रेणी के माध्यम से दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इससे सामान्य श्रद्धालुओं की कतार और भीड़ प्रबंधन प्रभावित होता है। उन्होंने बताया कि मानक संचालन प्रक्रिया के तहत शुल्क आधारित व्यवस्था लागू की गई, ताकि वीआईपी प्रोटोकॉल का अनावश्यक उपयोग रोका जा सके और दर्शन व्यवस्था सुचारु बनी रहे। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ बाहरी लोगों द्वारा दिव्यांग और अन्य विशेष श्रेणियों का दुरुपयोग कर श्रद्धालुओं से अवैध वसूली की शिकायतें मिल रही थीं। इसी पर रोक लगाने के लिए अधिकृत और रसीद आधारित व्यवस्था लागू की गई।

समिति के खाते में जमा हुई पूरी राशि

सीईओ के अनुसार वीआईपी दर्शन से प्राप्त पूरी राशि सीधे मंदिर समिति के खाते में जमा की गई है और प्रत्येक श्रद्धालु को आधिकारिक रसीद जारी की गई। उनका दावा है कि अब तक लगभग 1.63 करोड़ रुपये समिति के खाते में जमा हो चुके हैं। पूरी प्रक्रिया का दस्तावेजी रिकॉर्ड सुरक्षित रखा गया है। हालांकि बोर्ड की मंजूरी और अन्य वित्तीय मामलों को लेकर उठे सवालों के बीच यह विवाद फिलहाल चर्चा का विषय बना हुआ है।

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