12% अल्कोहल वाली दवा पर सख्ती: अब बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेगी दवा, शेड्यूल एच1 में शामिल कई ओरल मेडिसिन

केंद्र सरकार ने अल्कोहल युक्त दवाओं की बिक्री को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब 12 प्रतिशत से अधिक अल्कोहल वाली ओरल दवाएं बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के नहीं खरीदी जा सकेंगी। सरकार ने ऐसी दवाओं को शेड्यूल एच1 श्रेणी में शामिल कर दिया है। इस फैसले के बाद मेडिकल स्टोर संचालकों को इन दवाओं की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा। नए नियम का असर खासतौर पर कई कफ सिरप और टॉनिक पर पड़ेगा, जिन्हें अब तक सामान्य तौर पर बिना पर्चे के खरीदा जा सकता था।
सरकार का यह कदम अल्कोहल युक्त दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। विभिन्न राज्यों से कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी और नशे के रूप में इस्तेमाल के कई मामले सामने आने के बाद नियमों को सख्त किया गया है। इसके अलावा पिछले वर्ष राजस्थान और मध्य प्रदेश में कफ सिरप से जुड़े मामलों में बच्चों की मौत के बाद भी इस विषय पर सख्ती की जरूरत महसूस की गई थी।
ड्रग्स रूल्स में संशोधन के बाद लागू हुआ नियम
सरकार ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन कर यह बदलाव लागू किया है। अक्टूबर 2025 में इसका प्रारूप सार्वजनिक कर लोगों से सुझाव मांगे गए थे। निर्धारित अवधि में कोई आपत्ति नहीं मिलने के बाद दवा तकनीकी सलाहकार बोर्ड से परामर्श कर इसे अंतिम रूप दिया गया।
क्या होगा नए नियम का असर?
नए प्रावधान के अनुसार 12 प्रतिशत से अधिक अल्कोहल वाली वे सभी ओरल दवाएं, जो 30 मिलीलीटर से बड़ी बोतल या पैक में बेची जाती हैं, अब शेड्यूल एच1 के दायरे में आएंगी। इस श्रेणी की दवाएं केवल डॉक्टर के पर्चे पर ही उपलब्ध होंगी। साथ ही दवा विक्रेताओं को प्रत्येक बिक्री का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना और प्रिस्क्रिप्शन का विवरण निर्धारित अवधि तक संरक्षित रखना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि इससे दवाओं के अनियंत्रित उपयोग और अवैध बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी।
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