वंदे मातरम के पूर्ण गायन पर छिड़ी बहस: शशि थरूर ने उठाए सवाल, बोले- हर कार्यक्रम में छह छंद गाना व्यावहारिक नहीं

राष्ट्रगीत वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण के गायन को लेकर देश में नई बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकारी और औपचारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम के सभी छह छंदों के अनिवार्य गायन पर सवाल उठाया है। उन्होंने इसे आम लोगों के लिए व्यावहारिक रूप से कठिन और बोझिल बताया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान और श्रद्धा को लेकर कोई विवाद नहीं है। इसके गायन को लेकर ऐसा तरीका अपनाया जाना चाहिए जो परंपरा, सुविधा और राष्ट्रीय सहमति के अनुरूप हो।
तिरुवनंतपुरम में थरूर ने कहा कि वंदे मातरम देश का राष्ट्रगीत है। जब भी इसे गाया या बजाया जाता है। लोग सम्मान में खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश नागरिकों को इसके शुरुआती एक या दो छंद ही याद हैं। जिन्हें लंबे समय से सार्वजनिक कार्यक्रमों में गाने की परंपरा रही है। ऐसे में हर सरकारी आयोजन की शुरुआत और समापन पर पूरे गीत का गायन करवाना व्यवहारिक चुनौतियां पैदा कर सकता है।
परंपरा और व्यावहारिकता के बीच संतुलन की जरूरत
शशि थरूर ने फरवरी में दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम का उल्लेख किया। कहा कि वहां कार्यक्रम के आरंभ और समापन दोनों अवसरों पर वंदे मातरम का पूर्ण संस्करण बजाया गया था। उनके अनुसार, लंबे समय तक लगातार खड़े रहने और पूरे गीत को दो बार सुनने की व्यवस्था कई लोगों के लिए असुविधाजनक साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर कोई मतभेद नहीं है।इसकी प्रस्तुति के स्वरूप पर व्यापक सहमति बनाई जानी चाहिए। थरूर ने यह भी कहा कि संसद द्वारा ऐसा कोई स्पष्ट कानून पारित नहीं किया गया है जो वंदे मातरम के सभी छंदों के गायन को अनिवार्य बनाता हो। उनका मानना है कि इस विषय पर राजनीतिक विवाद के बजाय संवाद और सहमति का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।
भाजपा पर राजनीतिक एजेंडे का आरोप
कांग्रेस सांसद ने इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौर से ही वंदे मातरम के शुरुआती छंदों का सार्वजनिक गायन होता रहा है। वही व्यापक रूप से स्वीकार्य परंपरा रही है। थरूर ने भाजपा नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे पूर्ण गायन की वकालत कर रहे हैं, तो उन्हें स्वयं राष्ट्रगीत के सभी छंद सार्वजनिक रूप से गाकर दिखाने चाहिए।
केंद्र के नए दिशा-निर्देशों पर बढ़ी चर्चा
दरअसल, केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में जारी दिशा-निर्देशों में सरकारी कार्यक्रमों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य औपचारिक आयोजनों में वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण के गायन पर जोर दिया गया है। नए प्रावधानों के अनुसार राष्ट्रगीत के सभी छह अंतरों का गायन किया जाएगा। जिसकी कुल अवधि लगभग तीन मिनट दस सेकेंड है। इसके साथ ही गीत के दौरान सभी उपस्थित लोगों का सम्मानपूर्वक खड़ा रहना आवश्यक होगा। हालांकि, इस विषय पर विभिन्न राज्यों और राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग राय सामने आ रही है। केरलम सरकार का कहना है कि पूर्ण संस्करण का गायन वैकल्पिक माना जा सकता है। कुछ संवैधानिक पदों पर बैठे प्रतिनिधियों का मत इससे भिन्न है। ऐसे में वंदे मातरम के पूर्ण गायन को लेकर शुरू हुई यह बहस आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।
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