पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने कहा- देश में तेल-गैस की कमी नहीं, घबराएं नहीं: 60 दिन का कच्चा तेल मौजूद, पीएम की अपील का न निकालें गलत मतलब

हरदीप सिंह पुरी ने देश में तेल और गैस संकट की आशंकाओं को खारिज किया है। उन्होंने साफ कहा कि भारत के पास फिलहाल पर्याप्त ऊर्जा भंडार मौजूद है। देश में 60 दिन का कच्चा तेल उपलब्ध है। इसके अलावा 60 दिन की LNG और 45 दिन की LPG का स्टॉक भी मौजूद है। उन्होंने कहा कि सप्लाई को लेकर घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है। सरकार पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
दिल्ली में आयोजित Confederation of Indian Industry (CII) के एनुअल बिजनेस समिट में बोलते हुए पुरी ने लोगों से अफवाहों से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की हालिया अपील का गलत मतलब निकाला जा रहा है। सोशल मीडिया पर बेवजह भ्रम फैलाया जा रहा है। दरअसल, नरेंद्र मोदी लगातार दो दिनों से लोगों से ईंधन बचाने की अपील कर रहे हैं। पीएम ने कहा था कि जहां संभव हो, पेट्रोल और डीजल का उपयोग कम करें। उन्होंने मेट्रो, इलेक्ट्रिक बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने की सलाह दी थी। साथ ही विदेशी यात्राओं से बचने की अपील भी की थी। पीएम की इन बातों के बाद कई जगहों पर लोगों में चिंता बढ़ गई। सोशल मीडिया पर तेल संकट की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ जगहों पर पैनिक बाइंग तक देखने को मिली। लोगों को लगा कि कहीं भविष्य में पेट्रोल पंपों पर सप्लाई प्रभावित न हो जाए। इसी को लेकर सरकार को सफाई देनी पड़ी।
“मनगढ़ंत मतलब निकालना गलत”
हरदीप पुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री की बातों को गंभीरता से समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएम केवल संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल की बात कर रहे थे। इसका मतलब यह नहीं कि देश में तेल खत्म होने वाला है। उन्होंने कहा कि अफरा-तफरी फैलाना पूरी तरह बेकार है। देश के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। पुरी ने कहा कि सरकार ने पश्चिम एशिया संकट का बोझ सीधे जनता पर नहीं डाला। इसके बावजूद तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
रोज 1000 करोड़ का घाटा झेल रहीं कंपनियां
पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि सरकारी तेल कंपनियां रोजाना करीब 1000 करोड़ रुपए का नुकसान उठा रही हैं। उन्होंने बताया कि कुल घाटा 1.98 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। तिमाही आंकड़ों में भी नुकसान करीब एक लाख करोड़ रुपए दर्ज हुआ है। उन्होंने कहा कि पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 64 से 65 डॉलर प्रति बैरल था। अब इसकी कीमत बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इसका सीधा असर भारत के आयात बिल पर पड़ रहा है।
होर्मुज संकट ने बढ़ाई चुनौती
पुरी ने कहा कि दुनिया की कुल ऊर्जा सप्लाई का बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है। भारत के 85 फीसदी कच्चे तेल का आयात भी इसी रास्ते से होता था। इसके अलावा देश की करीब 60 फीसदी LPG सप्लाई भी वहीं से आती थी। उन्होंने बताया कि संकट के बाद सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया। पहले देश में रोज 35 से 36 हजार मीट्रिक टन LPG बनती थी। अब उत्पादन बढ़ाकर 54 हजार मीट्रिक टन कर दिया गया है। उन्होंने इसे बड़ी उपलब्धि बताया।
कितने दिन का है ऊर्जा भंडार?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में रणनीतिक तेल भंडार बनाए गए हैं। यहां कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल रखा जा सकता है। फिलहाल यह भंडार करीब 64 फीसदी भरा हुआ है। अगर रणनीतिक भंडार और तेल कंपनियों के स्टॉक को जोड़ दिया जाए, तो देश के पास 60 दिनों का कच्चा तेल मौजूद है। साथ ही 60 दिन की प्राकृतिक गैस और 45 दिन की LPG भी उपलब्ध है।
फिर बचत की अपील क्यों?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि पीएम की अपील का मकसद तेल की कमी नहीं है। असली चिंता बढ़ता आयात बिल है। भारत अपनी जरूरत का करीब 88 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इसके लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। युद्ध और वैश्विक तनाव के कारण तेल महंगा हो चुका है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, भारत रोज करीब 50 लाख बैरल तेल इस्तेमाल करता है। पहले इस पर रोज 3141 करोड़ रुपए खर्च होते थे। अब खर्च बढ़कर करीब 4760 करोड़ रुपए पहुंच गया है। यानी हर दिन 1600 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च हो रहे हैं।
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