सुरों की दुनिया की एक और स्वरलहरी हुई खामोश: दिग्गज गायिका सुमन कल्याणपुर का निधन, 89 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

भारतीय फिल्म संगीत जगत की प्रख्यात पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का रविवार शाम 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहीं सुमन ने मुंबई स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम संगीत युग का एक और महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया। संगीत जगत, फिल्म उद्योग और उनके प्रशंसकों ने इस खबर पर गहरा शोक व्यक्त किया है। आज मुंबई के पवनहंस श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। अपने पीछे वे बेटी चारू और करोड़ों संगीत प्रेमियों की यादों का विशाल संसार छोड़ गई हैं। वर्ष 2023 में भारत सरकार ने उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मभूषण से सम्मानित किया था।
सुमन कल्याणपुर ने 1960 और 1970 के दशक में अपनी मधुर, कोमल और भावपूर्ण आवाज के दम पर फिल्म संगीत में एक अलग मुकाम हासिल किया। उस दौर में जब पार्श्व गायन पर कई दिग्गज कलाकारों का दबदबा था, तब भी उन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’, ‘ना ना करते प्यार तुम्हीं से’ और ‘तुमने पुकारा और हम चले आए’ जैसे उनके गीत आज भी संगीत प्रेमियों की पसंदीदा प्लेलिस्ट का हिस्सा हैं। उन्होंने हिंदी के अलावा मराठी, बंगाली, कन्नड़, असमी, ओड़िया सहित 11 भाषाओं में तीन हजार से अधिक गीत गाकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया।
लता मंगेशकर से तुलना बनी चर्चा का विषय
सुमन कल्याणपुर की आवाज की तुलना अक्सर स्वर कोकिला लता मंगेशकर से की जाती थी। उनकी गायन शैली और सुरों की शुद्धता इतनी प्रभावशाली थी कि कई बार श्रोता दोनों की आवाज में अंतर नहीं कर पाते थे। हालांकि सुमन हमेशा इस तुलना से दूरी बनाकर रखती थीं। उन्होंने कई अवसरों पर कहा कि लता मंगेशकर उनके लिए एक प्रिय मित्र की तरह थीं। उनके प्रति मन में हमेशा सम्मान का भाव रहा। यही वजह थी कि उन्होंने कभी भी इस तुलना को प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं देखा।
मोहम्मद रफी के साथ दिए कई कालजयी गीत
संगीत जगत में एक समय ऐसा भी आया जब लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी के बीच पेशेवर मतभेदों के कारण कई संगीतकारों ने सुमन कल्याणपुर को प्राथमिकता दी। इस दौरान उन्होंने रफी के साथ अनेक सुपरहिट और सदाबहार गीत रिकॉर्ड किए। उनकी आवाज की मधुरता और भावनात्मक अभिव्यक्ति ने उन्हें संगीत निर्देशकों की पसंदीदा गायिकाओं में शामिल कर दिया। आज भी उनके कई गीत रेडियो, डिजिटल प्लेटफॉर्म और संगीत समारोहों में समान लोकप्रियता के साथ सुने जाते हैं।
संघर्ष, सादगी और समर्पण की मिसाल
सुमन कल्याणपुर का रुझान बचपन से ही चित्रकला और संगीत दोनों की ओर था। वे मूल रूप से चित्रकार बनना चाहती थीं। उनकी प्रतिभा को पहचानने वाले गुरुओं ने उन्हें संगीत की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उस्ताद खान अब्दुल रहमान खान और मास्टर नवरंग जैसे प्रतिष्ठित गुरुओं से उन्होंने संगीत की शिक्षा प्राप्त की। अपने पूरे करियर में वे विवादों से दूर रहीं और सादगीपूर्ण जीवन जीती रहीं। उनका निधन भारतीय संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनके गीत आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरों की अमूल्य धरोहर बने रहेंगे।
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