ईरान ने अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप: सीजफायर समझौते का किया उल्लंघन, लेबनान में हमले जारी

पश्चिम एशिया में जारी तनाव एक बार फिर गहराता दिखाई दे रहा है। ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम (सीजफायर) के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा है कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन रही है। वहीं लेबनान, इजराइल और फिलिस्तीन से जुड़े घटनाक्रमों ने क्षेत्रीय हालात को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। बढ़ते तनाव के बीच इंटरनेशनल लेवल पर भी कूटनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने जारी बयान में दावा किया कि अमेरिका ने सीरिक क्षेत्र और केश्म द्वीप स्थित ईरानी तटीय रडार एवं निगरानी केंद्रों को निशाना बनाकर सीजफायर समझौते का उल्लंघन किया है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि अमेरिका तनाव कम करने के बजाय अपनी सैन्य गतिविधियों के माध्यम से हालात को और जटिल बना रहा है। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि इन हमलों के बाद यदि क्षेत्र में किसी प्रकार की अस्थिरता या संघर्ष की स्थिति पैदा होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी अमेरिका पर होगी। तेहरान का कहना है कि उसकी सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े किसी भी मुद्दे पर वह चुप नहीं बैठेगा।
लेबनान में ड्रोन हमले से घायल हुए इजराइली सैनिक
तनावपूर्ण माहौल के बीच दक्षिणी लेबनान में हुए एक ड्रोन हमले में चार इजराइली रिजर्व सैनिक घायल हो गए। इजराइली ब्रॉडकास्टिंग अथॉरिटी के अनुसार सभी सैनिकों की हालत स्थिर है और उनका इलाज किया जा रहा है। हालांकि हमले की जिम्मेदारी किसी संगठन ने सार्वजनिक रूप से नहीं ली है। दूसरी ओर हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि उसने दक्षिणी लेबनान में इजराइली सेना के ठिकानों, सैनिकों और एक मर्कावा टैंक को निशाना बनाया। संगठन के अनुसार इजराइली सैन्य ठिकानों के खिलाफ कम से कम 25 अभियान चलाए गए। हिजबुल्लाह ने कहा कि वह लेबनान की सुरक्षा और क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए अपनी कार्रवाई जारी रखेगा।
फिलिस्तीन के समर्थन में ब्रिटेन में प्रदर्शन
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर यूरोप में भी दिखाई दे रहा है। ब्रिटेन के मैनचेस्टर शहर में सैकड़ों लोगों ने फिलिस्तीन के समर्थन में मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने ब्रिटिश सरकार से इजराइल को समर्थन देना बंद करने और फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर कब्जा समाप्त कराने के लिए सक्रिय पहल करने की मांग की। ‘फ्रेंड्स ऑफ फिलिस्तीन इन ग्रेटर मैनचेस्टर’ के आह्वान पर आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और फिलिस्तीनी झंडे लहराते हुए समर्थन में नारे लगाए। यह मार्च 1967 के अरब-इजराइल युद्ध की 59वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया गया। इसके बाद वेस्ट बैंक, पूर्वी यरुशलम और गाजा पट्टी पर इजराइल का नियंत्रण स्थापित हुआ था।
जॉर्डन ने इजराइली कार्रवाई की निंदा की
लेबनानी सैन्य काफिले पर हुए हमले को लेकर जॉर्डन ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। जॉर्डन के विदेश मंत्रालय ने इस कार्रवाई को लेबनान की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता का उल्लंघन बताया है। मंत्रालय के प्रवक्ता फुआद माजाली ने कहा कि इजराइल को तत्काल ऐसे हमले रोकने चाहिए, क्योंकि इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ रही है। जॉर्डन ने हमले में मारे गए लेबनानी सैनिकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए इंटरनेशनल समुदाय से भी हस्तक्षेप की अपील की है।
इजराइल को अमेरिकी सैन्य सहायता पर बढ़ा विवाद
अमेरिका के भीतर भी इजराइल को दी जाने वाली सैन्य सहायता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने इजराइल को अतिरिक्त सैन्य मदद उपलब्ध कराने वाले प्रस्ताव का विरोध किया है। उनका कहना है कि प्रस्ताव को अलग तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। जबकि वास्तविक उद्देश्य इजराइल को अधिक अमेरिकी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। सैंडर्स ने आरोप लगाया कि अमेरिकी जनता युद्धों पर बढ़ते खर्च से नाराज है। लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस के माध्यम से सैन्य सहयोग बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। डेमोक्रेट सांसद रो खन्ना और रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी ने भी इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है।
ईरानी संपत्तियों के इस्तेमाल पर भी विचार
इस बीच अमेरिकी प्रशासन ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों के उपयोग को लेकर भी नई योजना पर विचार कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार ट्रम्प प्रशासन कुवैत, बहरीन और अन्य खाड़ी देशों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए इन संपत्तियों का इस्तेमाल करने की संभावना तलाश रहा है। प्रस्तावित योजना के तहत जब्त संपत्तियों का उपयोग पुनर्निर्माण, मरम्मत और भविष्य में संभावित हमलों से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए किया जा सकता है। इसके लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग संबंधित देशों से नुकसान और लागत का विस्तृत आकलन मांग सकता है। पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात के बीच कूटनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। हालांकि फिलहाल क्षेत्र में स्थायी शांति की संभावनाएं कमजोर दिखाई दे रही हैं। विभिन्न पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। ऐसे में इंटरनेशनल समुदाय की नजर आने वाले दिनों में होने वाले राजनीतिक और सैन्य घटनाक्रमों पर टिकी हुई है।
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