मदद के लिये भारत समेत कई देशों ने बढ़ाये हाथ: नेपाल ने किया इनकार, कहा खुद सक्षम हैं हमारी सरकार

नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड में मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हो गई है। भोटे कोशी-त्रिशूली कॉरिडोर के आसपास पानी में बह गए और फंसे सैकड़ों लोगों की तलाश के लिए बचाव अभियान लगातार जारी है। इस तबाही के बाद भारत समेत कई देशों ने नेपाल की मदद के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन नेपाल ने फिलहाल विदेशी सहायता लेने से इनकार कर दिया है। नेपाल सरकार का कहना है कि उसकी अपनी सुरक्षा एजेंसियां राहत और बचाव अभियान संभालने में सक्षम हैं।
नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर क्षेत्री ने शुक्रवार को बताया कि देश की सुरक्षा एजेंसियां राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। उन्होंने कहा कि दूसरे देशों की ओर से मदद की पेशकश स्वाभाविक है, लेकिन फिलहाल नेपाल को ऐसी विदेशी सहायता की जरूरत नहीं है। सुरक्षा एजेंसियां खोज और बचाव अभियान चला रही हैं।
2015 की आपदा से सीख लेते हुए नहीं दी रेस्क्यू टीमों को मंजूरी
रिपोर्ट के अनुसार, 2015 की आपदा के अनुभव से सीख लेते हुए सरकार ने इस बार किसी बाहरी देश की रेस्क्यू टीम को अनुमति नहीं दी है। नेपाल सरकार का कहना है कि उसके अपने सुरक्षा बल राहत और बचाव कार्य चलाने में पूरी तरह सक्षम हैं। भारत के नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स के अलावा चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश ने अपनी टीमें भेजने की पेशकश की थी। नेपाल ने इन प्रस्तावों को विनम्रता से ठुकरा दिया। विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने द काठमांडू पोस्ट को बताया कि चीन और अन्य देशों से भी इसी तरह के अनुरोध मिले थे, लेकिन उन्हें अस्वीकार करना पड़ा।
करीब 1,000 अब भी लापता
नेपाल पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि त्रासदी में अब तक 469 लोगों की मौत हो चुकी है। 1,545 लोगों को बचाया गया है, जबकि कुछ लोग घायल हुए हैं। आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार, करीब 1,000 लोग अब भी लापता हैं। इनमें 28 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।चाहें तो मैं दोनों खबरों की हेडिंग और सबहेडिंग को और ज्यादा अखबारी/कसावदार शैली में भी कर सकता हूं।










