हूतियों ने सऊदी पर दागे ड्रोन-मिसाइल: मोखा पर कब्जे से बढ़ा तनाव, चार हफ्तों में 1,000 से ज्यादा लड़ाके ढेर

यमन में सरकार और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। यमनी सेना ने लाल सागर के आसपास हूती ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए। इसके जवाब में हूतियों ने सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल से हमला करने का दावा किया। हमलों की आशंका के बीच सऊदी के अबहा और खमिस मुशैत शहरों में सायरन बजाए गए और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई। यमन सीमा के पास एक प्रोजेक्टाइल गिरने से दो लोग घायल हुए, जबकि एक मस्जिद और कुछ अन्य इमारतों को नुकसान पहुंचा। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, सितंबर की शुरुआत से अब तक 82 हजार से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं।
हूतियों ने पिछले सप्ताह यमन के पश्चिमी तट पर स्थित मोखा शहर पर कब्जा कर लिया था। लाल सागर के किनारे स्थित यह महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर है। इसके अलावा हूतियों ने बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट के एक द्वीप पर भी कब्जा किया है। बाब-अल-मंदेब दुनिया के प्रमुख समुद्री मार्गों में शामिल है और यहां से रोज बड़ी संख्या में मालवाहक जहाज गुजरते हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
500 से ज्यादा सरकारी लड़ाके मारे गए
सरकार समर्थक नेशनल रेजिस्टेंस फोर्स के मुताबिक, पिछले चार सप्ताह में हूतियों के खिलाफ लड़ाई में 500 से ज्यादा सरकारी लड़ाके मारे गए हैं। संगठन ने दावा किया कि इसी अवधि में होदेदा और ताइज प्रांतों में 1,000 से ज्यादा हूती लड़ाके भी मारे गए। हालांकि, हूतियों ने इन आंकड़ों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। यमनी सरकार ने लाल सागर के तट पर अतिरिक्त सैनिक भेजने का फैसला किया है। एक सरकारी अधिकारी ने पिछले सप्ताह की हार स्वीकार करते हुए कहा कि सरकारी बल दोबारा इलाके में लौटेंगे।
कई इलाकों में किए हवाई हमले
यमनी सेना ने मोखा, धुबाब और ताइज प्रांत के कई हिस्सों में हूती ठिकानों पर हवाई हमले किए। दूसरी ओर हूतियों ने ताइज में सरकार और सऊदी समर्थित बलों के हमलों तथा सादा प्रांत में तोपखाने से गोलाबारी की जानकारी दी। लगातार हमलों के बीच आम लोगों पर संकट गहरा गया है और बड़ी संख्या में परिवार अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।
2022 के सीजफायर के बाद फिर बढ़ा तनाव
यमन में सरकार और हूतियों के बीच करीब 12 साल से संघर्ष जारी है। सऊदी अरब यमन सरकार का समर्थन करता है, जबकि हूतियों को ईरान का समर्थन हासिल है। वर्ष 2022 में दोनों पक्षों के बीच सीजफायर हुआ था। इसके बाद बड़े पैमाने पर संघर्ष में कमी आई थी। अब हूतियों की बढ़त के बाद देश में एक बार फिर व्यापक गृहयुद्ध का खतरा बढ़ गया है।










