H-1B वीजा एक्सटेंशन महंगा करने की तैयारी: भारतीय पेशेवरों पर बढ़ेगा असर, एक्सटेंशन पर भी लगेगी अतिरिक्त फीस

भारतीय पेशेवरों पर बढ़ेगा असर, एक्सटेंशन पर भी लगेगी अतिरिक्त फीस

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन H-1B और L-1 वर्क वीजा के एक्सटेंशन को महंगा करने की तैयारी में है। प्रस्तावित नियम लागू होने के बाद वीजा अवधि बढ़ाने की प्रक्रिया पर अतिरिक्त शुल्क देना होगा। जिससे विदेशी पेशेवरों पर निर्भर बड़ी अमेरिकी कंपनियों का खर्च बढ़ सकता है। इसका सबसे अधिक असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। क्योंकि H-1B वीजा एक्सटेंशन का बड़ा हिस्सा भारतीय नागरिकों को मिलता है।

अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (डीएचएस) के रेगुलेटरी एजेंडा के अनुसार, अंतिम नियम जारी होने के बाद H-1B और L-1 वीजा एक्सटेंशन याचिकाओं पर भी 9-11 रिस्पॉन्स फीस और बायोमेट्रिक एंट्री-एक्जिट फीस लागू की जाएगी। अभी तक यह अतिरिक्त शुल्क शुरुआती आवेदन या नियोक्ता बदलने की स्थिति में ही लागू होता था। मौजूदा नियमों के तहत जिन कंपनियों में 50 से अधिक कर्मचारी हैं और उनमें आधे से ज्यादा H-1B या L-1 वीजा धारक हैं, उन्हें H-1B याचिका पर 4,000 डॉलर तथा L-1 याचिका पर 4,500 डॉलर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है। प्रस्तावित संशोधन के बाद यही शुल्क वीजा एक्सटेंशन पर भी लागू होगा।

तीन वर्ष के लिए किया जाता है जारी

आमतौर पर H-1B वीजा तीन वर्ष के लिए जारी किया जाता है, जिसके बाद उसका नवीनीकरण कराना पड़ता है। ऐसे में नए प्रस्ताव का सबसे अधिक प्रभाव उन भारतीय पेशेवरों पर पड़ सकता है, जो लंबे समय से अमेरिका में कार्यरत हैं। यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025 में कुल 4,06,685 H-1B याचिकाएं मंजूर हुईं। इनमें 2,91,542 मंजूरियां पहले से कार्यरत कर्मचारियों के रोजगार को जारी रखने के लिए थीं। इनमें से 2,26,359 मंजूरियां भारतीय नागरिकों को मिलीं, जो कुल H-1B रिन्यूअल का 77.6 प्रतिशत हैं। इसके बाद चीन दूसरे स्थान पर रहा, जिसे 31,581 मंजूरियां प्राप्त हुईं।

इमिग्रेशन लागत में हो सकती है बढ़ोतरी

प्रस्तावित बदलाव से विदेशी कुशल कर्मचारियों पर निर्भर टेक कंपनियों और आईटी सेवा प्रदाताओं का खर्च बढ़ने की आशंका है। नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी के आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025 में नौकरी जारी रखने के लिए स्वीकृत H-1B याचिकाओं में सबसे अधिक मंजूरियां अमेजन को मिलीं। इसके बाद टीसीएस, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा, एप्पल और गूगल का स्थान रहा। यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी फेडरल अपील्स कोर्ट ने नए H-1B वीजा पर प्रस्तावित एक लाख डॉलर शुल्क को रद्द करने वाले निचली अदालत के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। माना जा रहा है कि नए नियम लागू होने पर कंपनियों की इमिग्रेशन लागत में बढ़ोतरी हो सकती है।

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