गधों से दूर हो रहा डिप्रेशन और एंग्जाइटी: फ्रांस की अनोखी एनिमल थेरेपी, सुधर रही मरीजों की मानसिक स्थिति

निवेदिता चंद|16 घंटे पहले
फ्रांस की अनोखी एनिमल थेरेपी, सुधर रही मरीजों की मानसिक स्थिति

मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दुनिया भर में तेजी से बढ़ती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल हो चुकी हैं। एंग्जाइटी, डिप्रेशन, ऑटिज्म और अन्य मानसिक विकारों से जूझ रहे करोड़ों लोगों के लिए उपचार के नए और प्रभावी विकल्प तलाशे जा रहे हैं। इसी दिशा में फ्रांस की राजधानी पेरिस के एक मनोरोग अस्पताल ने एक अनोखी पहल शुरू की है। जहां मरीजों की थेरेपी के लिए गधों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ‘एनिमल थेरेपी’ या ‘एनिमल मेडिसिन’ के नाम से चर्चित यह प्रयोग मानसिक रोगियों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि इस थेरेपी से कई मरीजों की मानसिक स्थिति में सुधार देखने को मिला है।

हाल ही में एक वैश्विक अध्ययन के अनुसार, वर्तमान समय में दुनिया भर में लगभग 120 करोड़ लोग किसी न किसी मानसिक विकार से प्रभावित हैं। इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्युएशन (आईएचएमई) और यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड द्वारा किए गए इस अध्ययन में 1990 से 2023 के बीच 204 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 34 वर्षों में मानसिक रोगों से प्रभावित लोगों की संख्या लगभग दोगुनी हो चुकी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा, सोशल मीडिया का दबाव, भविष्य को लेकर असुरक्षा और सामाजिक अलगाव जैसी परिस्थितियां युवाओं में मानसिक तनाव और अवसाद के प्रमुख कारण बन रही हैं।

गधों के साथ समय बिताकर मिल रही मानसिक राहत

पेरिस के इस अस्पताल में मरीजों को दवाओं और पारंपरिक चिकित्सा के साथ-साथ विशेष एनिमल थेरेपी सत्रों में शामिल किया जाता है। अस्पताल परिसर में प्राकृतिक वातावरण, हरियाली और कृषि क्षेत्र विकसित किए गए हैं। जहां मरीज गधों के साथ समय बिताते हैं, उन्हें सैर कराते हैं और उनकी देखभाल करते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि जानवरों के साथ यह भावनात्मक जुड़ाव मरीजों के तनाव को कम करने और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद करता है। कई मरीजों ने बताया कि इन सत्रों के बाद उन्हें वैसी ही मानसिक शांति और सुकून महसूस होता है। जैसा दवा लेने के बाद अनुभव होता है।

मरीजों की हालत में दिखा सकारात्मक बदलाव

अस्पताल की एनिमल थेरेपी यूनिट से जुड़ी विशेषज्ञ नर्सों के अनुसार, इस कार्यक्रम से जुड़ने वाले अनेक मरीजों की मानसिक स्थिति में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है। कुछ मरीज, जो पहले सामाजिक गतिविधियों से पूरी तरह दूर रहते थे। अब आत्मविश्वास के साथ लोगों से संवाद करने लगे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि गधे स्वभाव से शांत, संवेदनशील और इंसानों के प्रति सहज व्यवहार करने वाले जानवर होते हैं। यही कारण है कि मरीज उनके साथ जल्दी भावनात्मक संबंध स्थापित कर लेते हैं। जिससे अकेलेपन और तनाव की भावना कम होती है।

आधुनिक मानसिक चिकित्सा का पूरक बन रही एनिमल थेरेपी

साल 2022 में इस कार्यक्रम को अस्पताल में आधिकारिक स्वास्थ्य सेवा इकाई का दर्जा दिया गया था। बाद में इसका विस्तार करते हुए गिनी पिग, खरगोश, बकरियां, कछुए, मुर्गियां और कबूतर जैसे अन्य जानवरों को भी शामिल किया गया। एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह थेरेपी एंग्जाइटी, डिप्रेशन, ऑटिज्म, सिजोफ्रेनिया और अन्य मानसिक विकारों से पीड़ित मरीजों के लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित हो रही है। हालांकि चिकित्सक स्पष्ट करते हैं कि एनिमल थेरेपी दवाओं या चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं है, बल्कि यह एक सहायक माध्यम है। जो मरीजों को आत्मविश्वास, सामाजिक जुड़ाव और भावनात्मक संतुलन वापस पाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यही कारण है कि यह अनूठा प्रयोग अब दुनिया भर में मानसिक हेल्थ एक्सपर्ट्स का ध्यान आकर्षित कर रहा है।

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