कैल्शियम की कमी से बढ़ती है थकान: हार्ट बीट को रखता है कंट्रोल, मांसपेशियों, दांतों और नसों को करता है प्रभावित

1 घंटा पहले
हार्ट बीट को रखता है कंट्रोल, मांसपेशियों, दांतों और नसों को करता है प्रभावित

शरीर को स्वस्थ और मजबूत बनाने में कैल्शियम की मुख्य भूमिका होती है। इसकी कमी केवल हड्डियों को ही कमजोर नहीं बनाती, बल्कि मांसपेशियों, दांतों, नसों और दिल की कार्यप्रणाली पर भी असर डाल सकती है। ऐसे में शरीर के शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचानना और खानपान पर ध्यान देना जरूरी होता हैं।

कैल्शियम शरीर के लिए एक आवश्यक खनिज है, जो हड्डियों और दांतों को मजबूती देने के साथ-साथ मांसपेशियों के संकुचन, नसों के सही कामकाज और दिल की धड़कन को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है। जब शरीर में इसकी कमी होने लगती है, तो सबसे पहले लगातार थकान, मांसपेशियों में ऐंठन, हाथ-पैरों में झुनझुनी, दांतों की कमजोरी और नाखूनों के आसानी से टूटने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

मांसपेशियों में ऐंठन और दर्द के साथ हाथ-पैर में झुनझुनी

कैल्शियम शरीर की मांसपेशियों के सही संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी होने पर मांसपेशियों में अचानक खिंचाव, दर्द और ऐंठन की समस्या हो सकती है। यह समस्या खासतौर पर पैरों, हाथों और कमर की मांसपेशियों में अधिक महसूस की जाती है। रात के समय पैरों में ऐंठन होना भी कैल्शियम की कमी का संकेत हो सकता है। साथ ही शरीर में कैल्शियम का स्तर कम होने से नसों की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। इसके कारण हाथों, पैरों, और उंगलियों में झुनझुनी, चुभन या सुन्नपन महसूस हो सकता है। कई बार व्यक्ति इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देता है, लेकिन बार-बार ऐसा होना कैल्शियम की कमी का संकेत हो सकता है।

हड्डियों और दांतों का कमजोर होना

कैल्शियम हड्डियों की मजबूती बनाए रखने के लिए जरूरी होता है। जब शरीर में इसकी कमी होती है, तो शरीर हड्डियों से कैल्शियम लेना शुरू कर देता है, जिससे हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है। लंबे समय तक कमी रहने पर ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्या का खतरा बढ़ सकता है और हल्की चोट में भी फ्रैक्चर होने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं दांतों को मजबूत बनाए रखने के लिए भी कैल्शियम जरूरी होता है। इसकी कमी से दांत कमजोर हो सकते हैं और उनमें दर्द, संवेदनशीलता या कैविटी की समस्या बढ़ सकती है। बच्चों में कैल्शियम की कमी होने पर दांतों के विकास पर भी असर पड़ सकता है।

थकान और कमजोरी के साथ नाखूनों का टूटना

कैल्शियम शरीर की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में मदद करता है। इसकी कमी होने पर व्यक्ति को लगातार थकान, कमजोरी और ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है। पर्याप्त आराम करने के बाद भी अगर कमजोरी बनी रहती है, तो शरीर में पोषक तत्वों की कमी की जांच कराना उपयोगी हो सकता है। कैल्शियम की कमी का असर त्वचा, बालों और नाखूनों पर भी दिखाई दे सकता है। नाखून पतले, कमजोर और जल्दी टूटने वाले हो सकते हैं।

समय पर ले डॉक्टर की सलाह

विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक कैल्शियम की कमी रहने पर हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है। इससे बचने के लिए रोजाना दूध, दही, पनीर, तिल, सोया उत्पाद और हरी पत्तेदार सब्जियों को आहार में शामिल करें। साथ ही, पर्याप्त मात्रा में विटामिन-डी और नियमित धूप लेना भी जरूरी है, क्योंकि इसके बिना शरीर कैल्शियम को ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता। यदि लंबे समय तक ऐसे लक्षण बने रहें, तो डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक होता हैं।

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