गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्शन से बचाएगी सादी खिचड़ी: कार्बोहाइड्रेट्स से मिलेगी तुरंत एनर्जी, डाइजेशन रहेगा दुरुस्त

निवेदिता चंद|11 घंटे पहले
 कार्बोहाइड्रेट्स से मिलेगी तुरंत एनर्जी, डाइजेशन रहेगा दुरुस्त

गर्मियों का मौसम आते ही पेट से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। तेज धूप, बाहर का खाना, कम पानी पीना और अनियमित खानपान पाचन तंत्र को कमजोर कर देता है। ऐसे में गैस, पेट दर्द, उल्टी, दस्त, पेट में इंफेक्शन और अपच जैसी परेशानियां आम हो जाती हैं। कई लोगों की भूख भी कम हो जाती है। इस दौरान मसालेदार और ऑयली खाना परेशानी को और बढ़ा सकता है। डॉक्टर भी ऐसी स्थिति में हल्का और सुपाच्य भोजन खाने की सलाह देते हैं। इन्हीं में सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है सादी खिचड़ी।

सादी खिचड़ी सिर्फ पेट को आराम ही नहीं देती, बल्कि शरीर को जरूरी पोषण भी पहुंचाती है। चावल और मूंग दाल से बनी खिचड़ी आसानी से पच जाती है। यह शरीर को एनर्जी देती है और कमजोरी दूर करने में मदद करती है। आयुर्वेद में भी खिचड़ी को रिकवरी फूड माना गया है। पेट खराब होने पर यह सबसे सुरक्षित और हल्का भोजन माना जाता है।

पेट के लिए क्यों फायदेमंद है खिचड़ी?

जब पेट खराब होता है, तब शरीर को ऐसा खाना चाहिए जो आसानी से पच जाए और पाचन तंत्र पर ज्यादा दबाव न डाले। सादी खिचड़ी में कम मसाले होते हैं। इसमें तेल और मिर्च का इस्तेमाल भी बहुत कम किया जाता है। यही वजह है कि यह पेट को आराम पहुंचाती है। खिचड़ी शरीर को धीरे-धीरे रिकवर करने में मदद करती है और पेट में जलन या भारीपन नहीं होने देती।

मूंग दाल में प्रोटीन और चावल में कार्बोहाइड्रेट होता है। दोनों मिलकर शरीर को जरूरी ताकत देते हैं। खिचड़ी खाने से शरीर में पानी की कमी भी कम होती है। गर्मियों में डिहाइड्रेशन की समस्या तेजी से बढ़ती है। ऐसे में हल्की खिचड़ी शरीर को हाइड्रेट रखने में भी मदद करती है।

ऐसे बनाएं हल्की और सादी खिचड़ी

सादी खिचड़ी बनाना बहुत आसान है। इसके लिए एक कप चावल और आधा कप धुली मूंग दाल लें। दोनों को अच्छी तरह धो लें। इसके बाद इन्हें प्रेशर कुकर में डालें। स्वाद के अनुसार थोड़ा नमक और हल्दी डालें। फिर पर्याप्त मात्रा में पानी मिलाएं ताकि खिचड़ी अच्छी तरह गल जाए। कुकर में तीन से चार सीटी आने तक पकाएं। खिचड़ी पूरी तरह नरम होनी चाहिए। चाहें तो ऊपर से थोड़ा देसी घी डाल सकते हैं। इससे स्वाद भी बढ़ता है और पाचन में भी मदद मिलती है। हालांकि ज्यादा घी या मसाले डालने से बचना चाहिए।

कब और कैसे खानी चाहिए खिचड़ी?

पेट खराब होने पर दिन में दो से तीन बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खिचड़ी खानी चाहिए। इसे हमेशा ताजा और हल्का गर्म खाएं। ठंडी या बासी खिचड़ी खाने से बचें। अगर डॉक्टर ने मना न किया हो तो खिचड़ी के साथ दही या छाछ भी लिया जा सकता है। इससे पेट को और राहत मिलती है। खिचड़ी खाने के दौरान बाहर का खाना, तला-भुना भोजन और कोल्ड ड्रिंक जैसी चीजों से दूरी बनाकर रखें। ज्यादा मसालेदार खाना पेट की समस्या बढ़ा सकता है। साथ ही पर्याप्त पानी पीना और आराम करना भी जरूरी है।

रिकवरी में तेजी से मदद करती है खिचड़ी

एक्सपर्ट्स के मुताबिक सादी खिचड़ी पेट की सूजन कम करने में मदद करती है। यह शरीर को हल्की एनर्जी देती है और कमजोरी दूर करती है। दस्त या उल्टी के बाद शरीर में आई थकान को भी कम करने में यह असरदार मानी जाती है। यही वजह है कि बीमारी के दौरान सबसे पहले खिचड़ी खाने की सलाह दी जाती है। गर्मियों में अगर पेट बार-बार खराब हो रहा है तो खानपान में सावधानी और हल्का भोजन ही सबसे अच्छा उपाय माना जाता है।

नव्य जागरण

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