घंटों कुर्सी पर बैठने से बढ़ रहा पीठ दर्द: एक्सपर्ट्स ने बताए राहत दिलाने वाले योगासन, डिजिटल लाइफस्टाइल और वर्क फ्रॉम ऑफिस से हो रही समस्या

आधुनिक जीवनशैली और लगातार बढ़ते स्क्रीन टाइम ने लोगों की सेहत पर गहरा असर डालना शुरू कर दिया है। विशेष रूप से कॉर्पोरेट सेक्टर, आईटी उद्योग, बैंकिंग और अन्य कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों के बीच कमर और पीठ दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है। दिनभर कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठकर काम करने, शारीरिक गतिविधियों में कमी और गलत बैठने की आदतों के कारण रीढ़ की हड्डी तथा पीठ की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि शुरुआत में सामान्य दिखाई देने वाला यह दर्द समय के साथ गंभीर रूप धारण कर सकता है। व्यक्ति की कार्यक्षमता के साथ-साथ जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकता है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार लगातार आठ से नौ घंटे तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से रीढ़ की प्राकृतिक संरचना प्रभावित होती है। इससे कमर, गर्दन और कंधों में जकड़न बढ़ने लगती है। यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए तो आगे चलकर यह स्लिप डिस्क, मांसपेशियों की कमजोरी और अन्य ऑर्थोपेडिक समस्याओं का कारण बन सकती है। ऐसे में नियमित योगाभ्यास न केवल दर्द को कम करने में सहायक होता है। साथ ही शरीर की लचक, संतुलन और मांसपेशियों की मजबूती को भी बढ़ाता है।
भुजंगासन: रीढ़ को मजबूती देने वाला प्रभावी योग
पीठ और कमर दर्द से राहत पाने के लिए भुजंगासन को सबसे प्रभावी योगासनों में शामिल किया जाता है। इस आसन के दौरान शरीर के ऊपरी हिस्से को पीछे की ओर उठाया जाता है। जिससे रीढ़ की हड्डी और पीठ की मांसपेशियों में सकारात्मक खिंचाव उत्पन्न होता है। नियमित अभ्यास से पीठ की जकड़न कम होती है। रीढ़ अधिक लचीली बनती है। लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए यह आसन विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।
बालासन: तनाव और थकान दूर करने का प्राकृतिक तरीका
बालासन को शरीर और मन दोनों को आराम देने वाला योगासन माना जाता है। यह आसन पीठ, कमर और कंधों की मांसपेशियों को रिलैक्स करता है। तनावजनित दर्द को कम करने में मदद करता है। व्यस्त दिनचर्या और मानसिक दबाव के कारण होने वाली शारीरिक थकान को दूर करने के लिए भी बालासन काफी उपयोगी माना जाता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस आसन का नियमित अभ्यास मानसिक शांति और बेहतर एकाग्रता में भी सहायक होता है।
सेतु बंधासन: कमर और हिप्स की मांसपेशियों को बनाता है मजबूत
सेतु बंधासन शरीर के निचले हिस्से को सक्रिय करने वाला महत्वपूर्ण योगासन है। इसे करने से कमर, हिप्स और रीढ़ से जुड़ी मांसपेशियां मजबूत होती हैं। रक्त संचार बेहतर होता है। लंबे समय तक बैठकर काम करने से शरीर के निचले हिस्से पर जो दबाव बनता है। उसे कम करने में यह आसन मददगार साबित होता है। नियमित अभ्यास से कमर दर्द में राहत मिलने के साथ शरीर की कार्यक्षमता भी बेहतर होती है।
अधोमुख श्वानासन: बेहतर पोस्चर और स्वस्थ रीढ़ की कुंजी
अधोमुख श्वानासन पूरे शरीर को स्ट्रेच करने वाला एक लोकप्रिय योगासन है। यह रीढ़ की हड्डी को आराम देने के साथ शरीर के पोस्चर को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस आसन के अभ्यास से पीठ, कंधों और पैरों की मांसपेशियों में लचीलापन आता है। लंबे समय तक बैठे रहने से होने वाली जकड़न कम होती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि इन योगासनों को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए तो कमर और पीठ दर्द की समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है। शरीर को दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं।
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