रोजाना मोमोज खाना पड़ेगा भारी: मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर का बढ़ता है खतरा, डाइजेस्टिव सिस्टम पर पड़ता है निगेटिव इफेक्ट

तेजी से बदलती खानपान की आदतों के बीच मोमो आज बच्चों, युवाओं और कामकाजी लोगों का पसंदीदा स्ट्रीट फूड बन चुका है। शहरों से लेकर कस्बों तक मोमो की दुकानों पर बड़ी संख्या में लोग इसकी विभिन्न वैरायटी का स्वाद लेते दिखाई देते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्वाद के लिए कभी-कभार मोमो खाना नुकसानदायक नहीं है। इसे नियमित आहार का हिस्सा बनाना स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। विशेष रूप से सड़क किनारे बिकने वाले मोमो में उपयोग होने वाली सामग्री, तेल, मसाले और सॉस कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को जन्म दे सकते हैं।
एक्सपर्ट्स के अनुसार अधिकांश मोमो मैदे से तैयार किए जाते हैं। जिसमें फाइबर की मात्रा बेहद कम होती है। लगातार अधिक मात्रा में मैदा युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने से डाइजेस्टिव सिस्टम प्रभावित हो सकता है। इसके कारण कब्ज, गैस, अपच और पेट फूलने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। लंबे समय तक ऐसी आदत बने रहने पर पाचन संबंधी विकार गंभीर रूप भी ले सकते हैं।
बढ़ सकता है मोटापा और हृदय रोगों का जोखिम
मोमो के साथ परोसी जाने वाली मेयोनीज और मसालेदार चटनियों में कैलोरी, फैट और सोडियम की मात्रा काफी अधिक होती है। नियमित रूप से इनका सेवन शरीर में अतिरिक्त वसा जमा कर सकता है। जिससे वजन बढ़ने की आशंका रहती है। मोटापा आगे चलकर मधुमेह, हृदय रोग और अन्य जीवनशैली संबंधी बीमारियों का कारण बन सकता है। वहीं अधिक सोडियम का सेवन उच्च रक्तचाप की समस्या को भी जन्म दे सकता है। जो हृदय और किडनी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
फूड पॉइजनिंग और इंफेक्शन का बढ़ता खतरा
हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि सड़क किनारे बिकने वाले खाद्य पदार्थों में स्वच्छता का स्तर हमेशा संतोषजनक नहीं होता। कई बार मोमो तैयार करने और परोसने के दौरान साफ-सफाई के मानकों का पालन नहीं किया जाता। दूषित पानी, खराब गुणवत्ता वाली सामग्री या अस्वच्छ वातावरण में तैयार भोजन के कारण फूड पॉइजनिंग, पेट संक्रमण और अन्य बैक्टीरियल बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। गर्मियों और बरसात के मौसम में यह जोखिम और अधिक बढ़ जाता है।
कमजोर हो सकती है इम्यूनिटी
हालांकि मोमो स्वादिष्ट होते हैं। पोषण की दृष्टि से यह संतुलित आहार नहीं माने जाते। इनमें शरीर के लिए आवश्यक विटामिन, खनिज तत्व और पर्याप्त फाइबर नहीं होते। यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से मोमो जैसे जंक फूड पर निर्भर रहता है तो उसके शरीर में पोषण संबंधी असंतुलन विकसित हो सकता है। लंबे समय तक ऐसी खानपान की आदत रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी प्रभावित कर सकती है। जिससे शरीर इंफेक्शन और बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है।
एक्सपर्ट्स की सलाह
हेल्थ एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि मोमो का सेवन सीमित मात्रा में ही किया जाना चाहिए। यदि मोमो खाना पसंद हो तो घर पर स्वच्छ और पौष्टिक सामग्री के साथ तैयार किए गए स्टीम्ड मोमो बेहतर विकल्प हो सकते हैं। इसके अलावा अत्यधिक तीखी चटनी, मेयोनीज और तले हुए मोमो के सेवन से बचना चाहिए। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता देकर ही बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखा जा सकता है।
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