ज्यादा पानी पीना भी खतरनाक: बढ़ सकता है 'वॉटर इंटॉक्सिकेशन' का खतरा, ओवरहाइड्रेशन से किडनी पर पड़ता है बुरा असर

निवेदिता चंद|1 घंटा पहले
बढ़ सकता है 'वॉटर इंटॉक्सिकेशन' का खतरा, ओवरहाइड्रेशन से किडनी पर पड़ता है बुरा असर

गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह दी जाती है। डॉक्टरों से लेकर हेल्थ एक्सपर्ट्स तक सभी नियमित पानी सेवन को अच्छी सेहत की कुंजी मानते हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि पानी की अत्यधिक मात्रा भी शरीर के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट्सके अनुसार आवश्यकता से अधिक पानी पीने की आदत ओवरहाइड्रेशन या वॉटर इंटॉक्सिकेशन जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। यह समस्या शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को बिगाड़ने के साथ कई अंगों की कार्यप्रणाली को भी प्रभावित कर सकती है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक जब कोई व्यक्ति शरीर की आवश्यकता से कहीं अधिक पानी पी लेता है या शरीर अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने में सक्षम नहीं होता, तब ओवरहाइड्रेशन की स्थिति बनती है। इसके गंभीर रूप को वॉटर इंटॉक्सिकेशन या वॉटर पॉइजनिंग कहा जाता है। इस अवस्था में रक्त में सोडियम का स्तर असामान्य रूप से कम होने लगता है। जिसे हाइपोनेट्रेमिया कहा जाता है। सोडियम की कमी के कारण शरीर की कोशिकाओं में अतिरिक्त पानी जमा होने लगता है। जिससे उनमें सूजन आ सकती है। गंभीर मामलों में मस्तिष्क पर भी असर पड़ सकता है। जो जीवन के लिए जोखिमपूर्ण स्थिति पैदा कर सकता है।

किडनी पर बढ़ सकता है अतिरिक्त दबाव

किडनी का मुख्य कार्य शरीर में पानी और खनिजों का संतुलन बनाए रखना होता है। जब अत्यधिक मात्रा में पानी का सेवन किया जाता है तो किडनी को अतिरिक्त पानी बाहर निकालने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। लंबे समय तक यह स्थिति बने रहने पर शरीर के प्राकृतिक संतुलन पर असर पड़ सकता है। स्वस्थ व्यक्ति की किडनी सामान्य परिस्थितियों में अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने में सक्षम होती है। अत्यधिक जल सेवन फिर भी कई शारीरिक असुविधाओं का कारण बन सकता है।

लिवर रोगियों के लिए अधिक सावधानी जरूरी

हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि सामान्य व्यक्तियों में अधिक पानी सीधे लिवर को नुकसान नहीं पहुंचाता। लिवर सिरोसिस या एडवांस लिवर डिजीज से पीड़ित मरीजों के लिए स्थिति अलग हो सकती है। ऐसे रोगियों के शरीर में पहले से ही तरल पदार्थ जमा होने की समस्या रहती है। अधिक पानी पीने से शरीर में सूजन, पेट में पानी भरने और सोडियम स्तर में गिरावट जैसी जटिलताएं बढ़ सकती हैं। इसी वजह से कई मामलों में चिकित्सक लिवर रोगियों को नियंत्रित मात्रा में पानी पीने की सलाह देते हैं।

दूषित पानी भी बन सकता है खतरे की वजह

एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि केवल पानी की मात्रा ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है। दूषित पानी में मौजूद भारी धातुएं, बैक्टीरिया और अन्य प्रदूषक शरीर में पहुंचकर विभिन्न अंगों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। लंबे समय तक अशुद्ध पानी का सेवन शरीर में विषैले तत्वों का संचय बढ़ा सकता है। जिससे स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

शरीर देता है ओवरहाइड्रेशन के संकेत

बार-बार पेशाब आना, बिल्कुल रंगहीन पेशाब, सिरदर्द, मतली, हाथ-पैरों में सूजन, अत्यधिक थकान और मांसपेशियों में ऐंठन जैसे लक्षण इस बात का संकेत हो सकते हैं कि शरीर में पानी की मात्रा आवश्यकता से अधिक हो गई है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर जल सेवन की मात्रा पर ध्यान देना आवश्यक है।

संतुलित मात्रा में पानी पीना है सबसे बेहतर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्रत्येक व्यक्ति की पानी की आवश्यकता उसकी उम्र, वजन, मौसम, शारीरिक गतिविधियों और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है। इसलिए यह मान लेना सही नहीं है कि हर व्यक्ति को प्रतिदिन समान मात्रा में पानी पीना चाहिए। शरीर की जरूरत के अनुसार पानी का सेवन करना चाहिए। पेशाब के हल्के पीले रंग को सामान्य हाइड्रेशन का संकेत मानना बेहतर माना जाता है। संतुलित जल सेवन ही स्वस्थ जीवनशैली की सबसे महत्वपूर्ण शर्त है।

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