दिल्ली-NCR की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: पूछा- निर्भया कांड से क्या सबक लिया?, तीन वारदातों ने बढ़ाई देश की चिंता

दिल्ली-NCR में नाबालिगों से गैंगरेप की हालिया घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस से जवाब मांगा है। अदालत ने तीन मामलों का स्वत: संज्ञान लिया। इनमें ग्रेटर नोएडा-दिल्ली चलती बस, आस्था कुंज पार्क और स्वरूप नगर की घटनाएं शामिल हैं। जस्टिस जेबी पारदीवाला और के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि इन मामलों में 2012 के निर्भया कांड की याद आती है। सवाल यह है कि उस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्या सबक लिया गया।
चार अगस्त को 16 वर्षीय नाबालिग के साथ चलती बस में गैंगरेप का मामला सामने आया। पीड़िता ग्रेटर नोएडा के परी चौक से बस में बैठी थी और आरोपियों ने उसे कश्मीरी गेट पर उतारा। बस करीब 47 किलोमीटर तक चली। 12 सितंबर को स्वरूप नगर में 16 वर्षीय नाबालिग से गैंगरेप के बाद हत्या का मामला सामने आया। अगले दिन उसका शव खेत के पास खुले मैदान में मिला। मामले में चार आरोपी गिरफ्तार किए गए, जिनमें तीन नाबालिग हैं। 21 सितंबर को कालकाजी मंदिर के पास आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय छात्रा के साथ तीन युवकों ने कथित तौर पर पुलिसकर्मी बनकर रेप किया। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कोर्ट ने इस मामले में सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और कहा कि पहले शिकायतों के बावजूद जरूरी सुधार नहीं किए गए।
रोशनी, निगरानी और पेट्रोलिंग पर दिया जोर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि खराब रोशनी, कमजोर निगरानी और पेट्रोलिंग की कमी के कारण सार्वजनिक जगहों को हाई रिस्क जोन नहीं बनने दिया जा सकता। केवल संवेदना जताना पर्याप्त नहीं है। अपराध रोकने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी कदम जरूरी हैं।
सम्मान के साथ जीवन जीना मौलिक अधिकार
पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 21 का भी उल्लेख किया। अदालत के अनुसार हिंसा से मुक्त होकर सम्मान के साथ जीवन जीना मौलिक अधिकार है। 2012 के निर्भया कांड में चलती बस में 23 वर्षीय युवती से गैंगरेप हुआ था और बाद में उसकी मौत हो गई थी। इस घटना के बाद देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे।










