पर्यावरण और जैविक खेती के लिए कर्नल केसी मिश्र सम्मानित: सेना प्रमुख ने प्रदान किया ‘वेटरन्स एचीवर्स अवार्ड’, बस्ती का बढ़ाया गौरव

देश की सीमाओं की रक्षा करने के बाद पर्यावरण संरक्षण और जैविक खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले बस्ती के कर्नल केसी मिश्र को नेशनल लेवल पर प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया है। राजधानी लखनऊ में आयोजित समारोह में भारतीय थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने उन्हें ‘वेटरन्स एचीवर्स अवार्ड’ प्रदान किया। यह सम्मान सेना से सेवानिवृत्ति के बाद समाज, पर्यावरण और नई पीढ़ी के भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में किए गए उनके दीर्घकालिक और प्रेरणादायी कार्यों के लिए दिया गया है। इस उपलब्धि से कर्नल मिश्र का सम्मान बढ़ा है। बस्ती जिले को भी नेशनल लेवल पर नई पहचान मिली है।
कर्नल केसी मिश्र का जीवन समर्पण, अनुशासन और सामाजिक दायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। सेना में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद उन्होंने अपने अनुभव और ऊर्जा को पर्यावरण संरक्षण तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के विकास के लिए समर्पित कर दिया। पिछले लगभग 25 वर्षों से वह जैविक खेती को बढ़ावा देने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के अभियान में निरंतर सक्रिय हैं। उनका मानना है कि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए बिना भविष्य की चुनौतियों का सामना नहीं किया जा सकता।
जैविक कृषि केंद्र बना सीखने का केंद्र
शहर के निकट फुटहिया चौराहे के पास स्थापित राजेश्वरी मिश्र जैविक कृषि एवं बागवानी केंद्र आज पर्यावरण प्रेमियों, किसानों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन चुका है। यहां दुर्लभ प्रजातियों के फल, सब्जियां, अनाज, मसाले और औषधीय पौधों का संरक्षण किया जा रहा है। बदलते मौसम, बढ़ती गर्मी और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कई ऐसी प्रजातियों को संरक्षित रखा है। जो धीरे-धीरे विलुप्ति के कगार पर पहुंच रही हैं। जैविक खेती के माध्यम से वह रसायनमुक्त कृषि और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश भी दे रहे हैं।
बच्चों को प्रकृति से जोड़ने की अनूठी पहल
कर्नल मिश्र की सबसे विशेष पहल बच्चों को प्रकृति के करीब लाने की है। फलों के मौसम में वह विद्यार्थियों को अपने बाग में आमंत्रित करते हैं। उन्हें पेड़ों से स्वयं फल तोड़ने तथा प्रकृति को करीब से समझने का अवसर प्रदान करते हैं। उनका मानना है कि पर्यावरण संरक्षण की वास्तविक शुरुआत बचपन से ही होनी चाहिए। सम्मान प्राप्त करने के बाद उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ पर्यावरण, जागरूक समाज और संस्कारित पीढ़ी का निर्माण भी उतना ही आवश्यक है। बस्ती के लिए यह सम्मान पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में जिले की बढ़ती पहचान और प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जा रहा है।
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