150 इलेक्ट्रिक बसों के लिए बनेगा आधुनिक बस डिपो: गोरखपुर में दो स्थानों पर चिह्नित हुई जमीन, पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था होगी हाईटेक

गोरखपुर|19 मई 2026
गोरखपुर में दो स्थानों पर चिह्नित हुई जमीन, पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था होगी हाईटेक

महानगर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, स्मार्ट और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में नगर विकास विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। शहर में जल्द ही 150 नई इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। इन बसों के संचालन, चार्जिंग और रखरखाव के लिए शहर में एक अत्याधुनिक बस डिपो बनाया जाएगा। इसके लिए स्थानीय निकाय निदेशालय की ओर से नगर निगम से पांच एकड़ भूमि उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। अब नगर निगम प्रशासन ने इसके लिए जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है। अधिकारियों के मुताबिक एक ही स्थान पर पर्याप्त जमीन न मिलने के कारण दो अलग-अलग स्थानों की भूमि को मिलाकर इस परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा।

नगर आयुक्त के निर्देश पर अपर नगर आयुक्त अतुल कुमार को भूमि चयन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद उन्होंने अपनी टीम के साथ शहर के विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान सिक्टौर के कोनी क्षेत्र और बसंतपुर इलाके में उपलब्ध सरकारी जमीन का गहन परीक्षण किया गया। निरीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि नगर निगम के पास किसी एक स्थान पर पांच एकड़ भूमि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में प्रशासन ने व्यावहारिक समाधान निकालते हुए दो स्थानों पर जमीन चिह्नित की है, जिन्हें मिलाकर बस डिपो के निर्माण की आवश्यकता पूरी की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि दोनों स्थलों की रिपोर्ट लगभग तैयार कर ली गई है और जल्द ही इसे परिवहन निगम को सौंप दिया जाएगा।

इलेक्ट्रिक बसों से बदलेगी शहर की परिवहन व्यवस्था

नगर विकास विभाग की इस महत्वाकांक्षी योजना से गोरखपुर की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। वर्तमान में शहर की बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के कारण ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन आम लोगों को बेहतर और सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराएगा। ये बसें पूरी तरह वातानुकूलित होंगी और आधुनिक तकनीक से लैस रहेंगी। इससे यात्रियों को आरामदायक सफर के साथ-साथ समय की भी बचत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी, जिससे शहर में ट्रैफिक दबाव घटेगा।

प्रदूषण नियंत्रण और रोजगार के अवसर

इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ पर्यावरण संरक्षण के रूप में सामने आएगा। इलेक्ट्रिक बसें डीजल और पेट्रोल से चलने वाले वाहनों की तुलना में बेहद कम प्रदूषण फैलाती हैं। इससे शहर में वायु और ध्वनि प्रदूषण पर काफी हद तक नियंत्रण लगाया जा सकेगा। पर्यावरण एक्सपर्ट्स का कहना है कि ग्रीन ट्रांसपोर्ट सिस्टम भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत है। गोरखपुर इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही नए बस डिपो के निर्माण और बस संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। तकनीकी स्टाफ, ड्राइवर, चार्जिंग स्टेशन ऑपरेटर और रखरखाव कर्मचारियों की मांग बढ़ेगी।

जल्द शुरू होंगी औपचारिकताएं

अपर नगर आयुक्त अतुल कुमार ने बताया कि चिह्नित भूमि की पैमाइश और उससे संबंधित सभी आवश्यक जानकारियां जल्द ही क्षेत्रीय प्रबंधक परिवहन निगम को उपलब्ध करा दी जाएंगी। इसके बाद आगे की प्रशासनिक और तकनीकी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। नगर निगम और परिवहन विभाग की संयुक्त पहल से गोरखपुर को ग्रीन और स्मार्ट सिटी के रूप में नई पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि यह परियोजना समय पर पूरी हुई तो आने वाले वर्षों में गोरखपुर प्रदेश के आधुनिक परिवहन मॉडल वाले प्रमुख शहरों में शामिल हो सकता है।

नव्य जागरण

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