इंजीनियर सुसाइड केस में पत्नी अरेस्ट: वीडियो बनाकर पत्नी को ठहराया था जिम्मेदार, कोर्ट केस और जॉब की वजह से था परेशान

गोरखपुर|18 मई 2026
वीडियो बनाकर पत्नी को ठहराया था जिम्मेदार, कोर्ट केस और जॉब की वजह से था परेशान

कुसम्ही जंगल में इंजीनियर प्रद्युम्न यादव की आत्महत्या मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। एम्स थाना पुलिस ने मृतक की पत्नी अर्पिता यादव उर्फ उषा को अरेस्ट कर लिया है । रविवार दोपहर उसे हिरासत में लेने के बाद अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। पुलिस इस मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों की जांच कर रही है।

गौरतलब है कि 14 मई को कुशीनगर जिले के स्वामी विवेकानंद नगर निवासी 33 वर्षीय प्रद्युम्न यादव ने कुसम्ही जंगल स्थित बुढ़िया माता मंदिर के पास फंदा लगाकर जान दे दी थी। आत्महत्या से पहले उसने मोबाइल फोन पर वीडियो रिकॉर्ड किया था। वीडियो में उसने अपनी मौत के लिए पत्नी को जिम्मेदार ठहराया था। घटना के बाद यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया था।

भाई ने दर्ज कराया केस

मृतक के बड़े भाई राघवेंद्र यादव ने 16 मई को एम्स थाने में एप्लीकेशन देकर पत्नी अर्पिता, सास और ससुर के खिलाफ केस दर्ज कराया था। आरोप लगाया गया कि पारिवारिक विवाद और लगातार मानसिक प्रताड़ना की वजह से प्रद्युम्न अवसाद में चले गए थे। पुलिस ने शुरुआती जांच और वीडियो साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए पत्नी को गिरफ्तार किया। परिजनों के मुताबिक प्रद्युम्न की शादी करीब सात वर्ष पहले हुई थी। दंपती की पांच साल की एक बेटी भी है। परिवार का कहना है कि पति-पत्नी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी कारण अर्पिता पिछले तीन वर्षों से मायके में रह रही थी। इस तनाव का असर प्रद्युम्न की मानसिक स्थिति पर पड़ा और वह लगातार परेशान रहने लगे थे।

मां और बहन ने सुनाई दर्दभरी कहानी

प्रद्युम्न की मां कलावती देवी ने बेटे की मौत पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि बहू की प्रताड़ना ने उनके बेटे की जिंदगी छीन ली। रोते हुए उन्होंने कहा कि अब घर में केवल बेटे की यादें बची हैं। मां का कहना है कि उन्होंने अपने बेटे को हमेशा शांत और जिम्मेदार स्वभाव का देखा था। वहीं बहन पूनम ने कहा कि प्रद्युम्न परिवार का सबसे सीधा और मिलनसार सदस्य था। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार मानसिक दबाव ने उसके जीवन को खत्म कर दिया। परिवार अब मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई और न्याय की मांग कर रहा है।

नौकरी और कोर्ट केस के दबाव में था इंजीनियर

भाई राघवेंद्र यादव ने बताया कि प्रद्युम्न ऑटोमोबाइल सेक्टर में इंजीनियर था और वर्तमान में मध्य प्रदेश की एक कंपनी में कार्यरत था। उसकी कार्यक्षमता को देखते हुए कंपनी ने उसे प्रमोशन भी दिया था। परिवार खेती-किसानी से जुड़ा है और पिता सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। राघवेंद्र ने बताया कि पत्नी द्वारा भरण-पोषण का केस दर्ज कराने के बाद प्रद्युम्न काफी तनाव में रहने लगा था। केस की सुनवाई के लिए उसे बार-बार नौकरी से छुट्टी लेकर आना पड़ता था। 10 मई को वह इंदौर से कुशीनगर कोर्ट की तारीख पर आया था। सुनवाई के बाद अगली तारीख 21 जुलाई तय हुई थी। परिवार का कहना है कि कानूनी दबाव और पारिवारिक तनाव ने उसे पूरी तरह तोड़ दिया था।

नव्य जागरण

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