फर्जी अफसरों का बड़ा खेल उजागर: दो नकली IAS और एक IPS अरेस्ट, करोड़ों की ठगी और रंगदारी का पर्दाफाश

गोरखपुर|18 घंटे पहले
दो नकली IAS और एक IPS अरेस्ट, करोड़ों की ठगी और रंगदारी का पर्दाफाश

प्रशासनिक सेवाओं की चमक-दमक और सरकारी रुतबे का फर्जी मुखौटा पहनकर लोगों को ठगने वाले दो कथित IAS और एक नकली IPS अधिकारी के कारनामों का गोरखपुर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। अलग-अलग मामलों में अरेस्ट किए गए इन तीनों आरोपियों की कहानियां किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं हैं। किसी ने खुद को आईएएस अधिकारी बताकर करोड़ों रुपये की ठगी की। कई युवतियों को प्रेमजाल में फंसाया। बड़े कारोबारियों से संबंध बनाए। वहीं किसी ने प्रशासनिक अधिकारी बनकर संपन्न परिवार में शादी रचा ली। वहीं एक अन्य आरोपी ने आईपीएस अधिकारी का भेष धारण कर व्यापारियों को धमकाना और रंगदारी वसूलना शुरू कर दिया था। पुलिस कार्रवाई के बाद तीनों आरोपी जेल पहुंच चुके हैं। जहां उनके कारनामे चर्चा का विषय बने हुए हैं।

बिहार के सीतामढ़ी जिले के मेहसौल गांव निवासी ललित किशोर ने स्वयं को भारतीय प्रशासनिक सेवा का अधिकारी बताकर वर्षों तक लोगों को भ्रमित किया। एमएससी तक शिक्षित ललित ने कुछ समय तक कोचिंग संस्थानों में पढ़ाने का काम किया। आलीशान जीवनशैली और सामाजिक प्रतिष्ठा हासिल करने की चाह में उसने फर्जी आईएएस अधिकारी का रूप धारण कर लिया। अपने प्रभाव को विश्वसनीय बनाने के लिए उसने आठ निजी गनर तक रखे हुए थे। कई लग्जरी वाहनों का काफिला लेकर चलता था। गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र में उसने एक आलीशान मकान किराए पर लिया था। जहां घर के बाहर आईएएस अधिकारी का बोर्ड भी लगा रखा था।

चार युवतियों को भी फंसाया

जांच में सामने आया कि उसने बड़े ठेकेदारों और कारोबारियों को सरकारी टेंडर दिलाने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की वसूली की। इतना ही नहीं, उसने चार युवतियों को प्रेम संबंधों में फंसाया था। आरोप है कि इनमें से कुछ युवतियां गर्भवती भी हुई थीं। उसका प्रभाव इतना अधिक था कि एक बार बिहार में निरीक्षण के दौरान उसने कथित रूप से एक एसडीएम को थप्पड़ तक मार दिया। एसडीएम ने उसे वास्तविक आईएएस समझकर शिकायत दर्ज नहीं कराई। हाल ही में बिहार चुनाव के दौरान 99 लाख रुपये नकदी के साथ पकड़े गए एक व्यक्ति की जांच में उसका नाम सामने आया। जिसके बाद खुफिया एजेंसियों और गोरखपुर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई कर उसे अरेस्ट कर लिया। पूछताछ में उसके नेटवर्क के उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश तक फैले होने की जानकारी मिली।

नकली IAS बनकर संपन्न परिवार में रचाई शादी

इटावा जिले के इकदिल क्षेत्र निवासी प्रीतम कुमार निषाद ने भी प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना नहीं, बल्कि उसका फर्जी किरदार गढ़कर लोगों को धोखा देने का रास्ता चुना। हाईस्कूल तक शिक्षित प्रीतम ने सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से खुद को आईएएस अधिकारी के रूप में प्रस्तुत किया। इसी दौरान गोरखपुर के एक संपन्न परिवार तक उसका रिश्ता पहुंचा। उसने सरकारी गाड़ी और प्रशासनिक रुतबे का प्रदर्शन करके परिवार को पूरी तरह विश्वास में ले लिया। शादी की तैयारियों के दौरान उसने कई जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और समाज के प्रभावशाली लोगों को कार्ड भी बांटे। कार्ड पर स्वयं को आईएएस अधिकारी दर्शाया गया था। जिसके कारण कई प्रतिष्ठित लोग विवाह समारोह में शामिल हुए। गोरखपुर के एक बड़े मैरिज हाउस में धूमधाम से विवाह संपन्न हुआ। दुल्हन विदा होकर उसके साथ चली गई। हालांकि, कुछ लोगों को उसकी पहचान पर संदेह हुआ। स्वतंत्र रूप से जानकारी जुटाने पर उसकी वास्तविकता सामने आने लगी। जब लड़की पक्ष के लोग इटावा स्थित उसके घर पहुंचे। वो लोग वहां की परिस्थितियां देखकर हैरान रह गए। पूछताछ के दौरान प्रीतम ने स्वीकार कर लिया। वह कोई आईएएस अधिकारी नहीं है। इसके बाद गोरखपुर में उसके खिलाफ केस दर्ज कराया गया। पुलिस ने सर्विलांस की मदद से उसे अरेस्ट कर जेल भेज दिया।

निलंबित कर्मचारी बना नकली IPS, व्यापारियों से मांगी रंगदारी

तीसरा मामला गोरखपुर के पीपीगंज क्षेत्र का है।, जहां डीडीयू गोरखपुर यूनिवर्सिटी के निलंबित कर्मचारी शनि शर्मा ने खुद को आईपीएस अधिकारी बताकर व्यापारियों को धमकाना शुरू कर दिया। आरोपी सोशल मीडिया पर पुलिस वर्दी में तस्वीरें साझा करता था। स्वयं को एसएसपी बताकर लोगों में भय पैदा करता था। उसने अपने घर में पुलिस जैसी वर्दी और अन्य सामग्री भी रखी हुई थी। आरोप है कि वह व्यापारियों को फोन कर झूठे मुकदमों में फंसाने और फर्जी एनकाउंटर कराने की धमकी देता था। एक कपड़ा व्यापारी से उसने दो लाख रुपये की रंगदारी मांगी। भुगतान न करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। व्यापारी को उसके व्यवहार पर संदेह हुआ। जिसके बाद उन्होंने उसकी पहचान की जांच कराई। जांच में पता चला कि वह कोई आईपीएस अधिकारी नहीं है। यूनिवर्सिटी का निलंबित कर्मचारी है। शिकायत मिलने पर पुलिस ने उसके घर पर छापा मारा। वहां से वर्दी समेत अन्य सामान बरामद किया। इसके बाद उसे अरेस्ट कर जेल भेज दिया गया।

रुतबे का भ्रम टूटा, जेल में बने ‘420 गुरु’

पुलिस अधिकारियों के अनुसार तीनों मामलों में आरोपियों ने सरकारी सेवा की प्रतिष्ठा और लोगों के विश्वास का दुरुपयोग किया। उन्होंने प्रशासनिक पदों के नाम पर समाज में अपनी पहचान बनाई। इसी के सहारे आर्थिक तथा सामाजिक लाभ हासिल करने का प्रयास किया। पुलिस जांच और तकनीकी निगरानी के चलते इनके झूठ का पर्दाफाश हो गया। अब तीनों आरोपी जेल में बंद हैं। जहां अन्य बंदी उनके कारनामों को सुनकर हैरान होते हैं। मजाक में उन्हें ‘420 गुरु’ कहकर पुकारते हैं। पुलिस का कहना है कि इन मामलों से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच जारी है। यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

नव्य जागरण

पूरी खबर पढ़ें ऐप पर

ऐप डाउनलोड करने के लिए QR कोड
ऐप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करेंGET IT ON Google Play

अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर

ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।