गोरखपुर बनेगा तकनीकी हब: सीएम योगी और टाटा संस के चेयरमैन करेंगे 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' का उद्घाटन, 15 संस्थानों के छात्रों की चमक जाएगी किस्मत

गोरखपुर|15 अप्रैल 2026
सीएम योगी और टाटा संस के चेयरमैन करेंगे 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' का उद्घाटन, 15 संस्थानों के छात्रों की चमक जाएगी किस्मत

गोरखपुर जिले में महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में टाटा कंसल्टेंसी सर्विस के सहयोग से स्थापित पूर्वी उत्तर प्रदेश के पहले 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' का भव्य उद्घाटन बुधवार, 15 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया जाएगा। यह कार्यक्रम इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें वैश्विक व्यापार जगत के दिग्गज और टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की उपस्थिति रहेगी।

करीब 50 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार यह केंद्र केवल एक भवन नहीं, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक और नवाचार का वह मंदिर है, जो आने वाले समय में पूर्वांचल के हजारों युवाओं के भविष्य की दिशा और दशा तय करेगा। देश की आजादी से पहले से शिक्षा की अलख जगाने वाली महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद अब नई सदी की चुनौतियों के लिए अपने छात्रों को तैयार कर रही है। उद्घाटन के साथ ही यहां विश्व रिकॉर्ड बनाने के इरादे से आयोजित 'एआई अवेयरनेस फॉर आल' वर्कशॉप की भी शुरुआत होगी, जो तकनीक को जन-जन तक पहुंचाने का काम करेगी।

तकनीकी क्रांति का नया गढ़— एमपीआईटी गोरखपुर

गोरखपुर का महाराणा प्रताप इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी अब वैश्विक स्तर के तकनीकी संस्थानों की कतार में खड़ा हो गया है। टीसीएस के सहयोग से बने इस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को विश्व स्तरीय मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है। यह सेंटर न केवल तकनीक सिखाएगा, बल्कि युवाओं को रोजगार के नए अवसरों के लिए तैयार भी करेगा।

सरकार का करोड़ों का निवेश और फ्यूचर की लैब्स

50 करोड़ रुपये के इस भव्य प्रोजेक्ट का बजट विवरण इसकी भव्यता बयां करता है। इसके बुनियादी ढांचे पर 19.35 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि आधुनिक लैब्स के निर्माण में मोटी रकम निवेश की गई है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर: 9.56 करोड़ रुपये

साइबर सिक्योरिटी सेंटर: 6.19 करोड़ रुपये

थ्री-डी प्रिंटिंग और ड्रोन टेक्नोलॉजी: करीब 8.63 करोड़ रुपये

स्पेस टेक्नोलॉजी सेंटर: 2.09 करोड़ रुपये

इन लैब्स के माध्यम से छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान से लेकर ड्रोन निर्माण और साइबर सुरक्षा जैसी जटिल तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान मिल सकेगा।

15 संस्थानों के छात्रों को मिलेगा ग्लोबल एक्स्पोजर

एमपीआईटी के निदेशक सुधीर अग्रवाल के अनुसार, इस सेंटर का लाभ केवल उनके संस्थान तक सीमित नहीं रहेगा। यह समूचे पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए एक 'नॉलेज हब' के रूप में कार्य करेगा। एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त 15 अन्य संस्थानों, जिनमें मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, राजकीय पॉलिटेक्निक और आईटीएम गीडा जैसे बड़े नाम शामिल हैं, के छात्र भी यहाँ आकर ग्लोबल कोर्सेज और अत्याधुनिक उपकरणों का लाभ उठा सकेंगे।

एआई की 60 दिवसीय वर्कशॉप: विश्व कीर्तिमान की तैयारी

उद्घाटन के साथ शुरू होने वाली 60 दिवसीय वर्कशॉप एक अनूठी पहल है। इसमें युवाओं को जेनेरेटिव एआई, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और साइबर हाइजीन की ट्रेनिंग दी जाएगी। खास बात यह है कि इसमें 'एआई फॉर फार्मर्स' सत्र भी रखा गया है, जहां किसानों को एआई के जरिए मौसम की सटीक जानकारी और फसल योजना बनाना सिखाया जाएगा। यह वर्कशॉप प्रतिभागियों की संख्या के लिहाज से एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की दिशा में भी कदम है।

इस सेंटर का मुख्य उद्देश्य 'इंटीग्रेटेड इनोवेशन ईकोसिस्टम' बनाना है। यहां कौशल विकास के जरिए नवाचार को प्रेरित किया जाएगा, जिससे न केवल स्टार्टअप्स को पंख मिलेंगे, बल्कि गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों के युवाओं की वैश्विक बाजार में मांग बढ़ेगी।

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