रिट्रोफिकेशन से संवरेगा GST कार्यालय: बीम-कॉलम होंगे मजबूत, एमएमयूटी की तकनीकी जांच में पास

गोरखपुर|1 घंटा पहले
बीम-कॉलम होंगे मजबूत, एमएमयूटी की तकनीकी जांच में पास

तारामंडल स्थित वाणिज्य कर (जीएसटी) कार्यालय भवन में जनवरी माह में लगी भीषण आग के बाद कराए गए स्ट्रक्चरल ऑडिट की रिपोर्ट से विभाग को बड़ी राहत मिली है। तकनीकी जांच में भवन के मुख्य ढांचे को सुरक्षित पाया गया है। एक्सपर्ट्स ने स्पष्ट किया है कि भवन को ध्वस्त करने की आवश्यकता नहीं है। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमयूटी) की विशेषज्ञ टीम ने अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट में आग से प्रभावित हिस्सों की मरम्मत एवं रिट्रोफिकेशन के बाद भवन को पुनः उपयोग के योग्य बताया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद विभाग ने भवन को दोबारा सुरक्षित बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

गौरतलब है कि गत 10 जनवरी की रात संदिग्ध परिस्थितियों में जीएसटी कार्यालय की पहली मंजिल पर भीषण आग लग गई थी। आग की चपेट में आने से कार्यालय का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। वहीं अनेक महत्वपूर्ण फाइलें, अभिलेख, कंप्यूटर और अन्य कार्यालयी संसाधन जलकर नष्ट हो गए थे। घटना रात के समय हुई थी। इसलिए किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। आग लगने के बाद व्यापारी संगठनों ने इसे अधिकारियों की कथित अनियमितताओं को छिपाने की साजिश बताते हुए गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में शॉर्ट सर्किट को आग लगने का प्रमुख कारण माना था।

परीक्षण में सुरक्षित मिला मुख्य ढांचा

आग की घटना के बाद भवन की संरचनात्मक स्थिति को लेकर कई तरह की आशंकाएं जताई जा रही थीं। इसी को देखते हुए वाणिज्य कर विभाग ने मुख्यालय के माध्यम से भवन का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने का निर्णय लिया था। एमएमयूटी की विशेषज्ञ टीम ने कई चरणों में भवन के बीम, कॉलम, स्लैब और अन्य संरचनात्मक हिस्सों की तकनीकी जांच की। जांच में पाया गया कि भवन का मूल ढांचा सुरक्षित है। लेकिन आग से प्रभावित बीम, कॉलम, प्लास्टर और कुछ अन्य हिस्सों को अतिरिक्त मजबूती प्रदान करने की आवश्यकता है। एक्सपर्ट्स ने रिट्रोफिकेशन तकनीक के माध्यम से भवन की संरचनात्मक क्षमता को पुनर्स्थापित करने की संस्तुति की है।

डीपीआर और लागत आकलन की प्रक्रिया शुरू

वाणिज्य कर विभाग अब भवन के मरम्मत एवं रिट्रोफिकेशन कार्य के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और लागत का आकलन तैयार करा रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित मानकों के अनुसार मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद भवन का सुरक्षित रूप से पुनः उपयोग किया जा सकेगा। डिप्टी कमिश्नर वाणिज्य कर आलोक कुमार सचान ने बताया कि तकनीकी रिपोर्ट में भवन को रिट्रोफिकेशन के बाद पूरी तरह सुरक्षित बताया गया है। एक्सपर्ट्स की संस्तुति के अनुसार बीम, कॉलम, पिलर और प्लास्टर को मजबूत बनाने का कार्य कराया जाएगा। जिसके लिए विस्तृत इस्टीमेट तैयार किया जा रहा है।

नव्य जागरण

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