गोरखपुर में नीलकंठ मंदिर के शिवलिंग की जांच शुरू: नागपुर भेजे गए नमूने, अरबी-फारसी लेख एक हजार साल पुराना होने का अनुमान

खजनी क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक नीलकंठ महादेव मंदिर के शिवलिंग की प्राचीनता को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम ने जांच की। करीब तीन घंटे चली जांच के बाद टीम शिवलिंग के निचले हिस्से से मिले पत्थर के टुकड़े और उस पर अंकित अरबी-फारसी लेख से संबंधित नमूने वैज्ञानिक परीक्षण के लिए लेकर नागपुर रवाना हो गई। अब इन साक्ष्यों की जांच के बाद ही शिवलिंग और लेख के वास्तविक कालखंड को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
एएसआई के पुरालेख यानी एपिग्राफी विभाग के निदेशक डॉ. के. मुनिराथनम के निर्देश पर टीम मंदिर पहुंची थी। नागपुर स्थित एएसआई कार्यालय से आए वरिष्ठ सुपरिटेंडिंग एपिग्राफिस्ट डॉ. मुहम्मद आफताब जेया ने बताया कि शिवलिंग पर दिखाई दे रहा अरबी-फारसी लेख पहली नजर में करीब एक हजार वर्ष पुराना प्रतीत होता है। उन्होंने इसे उस दौर से जोड़ने की संभावना जताई, जब भारत पर कुतुबुद्दीन ऐबक और मुहम्मद गजनवी के आक्रमण हुए थे। हालांकि उन्होंने इसे अंतिम निष्कर्ष नहीं बताया। उनके अनुसार वैज्ञानिक जांच के बाद ही इसकी वास्तविक उम्र प्रमाणित हो सकेगी।
ब्राह्मी लिपि ने बढ़ाई प्राचीनता की संभावना
शिवलिंग के निचले हिस्से में ब्राह्मी लिपि के संकेत भी दिखाई देने की बात सामने आई है। डॉ. मुहम्मद आफताब जेया के अनुसार यह लिपि करीब 2500 वर्ष पुरानी हो सकती है। ऐसे में शिवलिंग को अशोककालीन कालखंड से जोड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उस समय पत्थरों और प्रतिमाओं पर उनके महत्व या विवरण से जुड़ी बातें अंकित किए जाने की परंपरा थी। हालांकि उन्होंने साफ किया कि फिलहाल यह केवल संभावना है, प्रमाणित तथ्य नहीं। ब्राह्मी लिपि से जुड़ा साक्ष्य पहले ही एएसआई निदेशक डॉ. के. मुनिराथनम को भेजा जा चुका है। संस्कृति मंत्रालय के स्तर से जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ी। उनका कहना है कि अब एएसआई टीम द्वारा लिए गए नमूनों की वैज्ञानिक रिपोर्ट आने के बाद लेख और शिवलिंग के कालखंड को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
मंदिर को पौराणिक धरोहर की मान्यता दिलाने की कोशिश
धरणीधर राम त्रिपाठी ने बताया कि मंदिर को प्राचीन पौराणिक धरोहर के रूप में मान्यता दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मंदिर क्षेत्र से जुड़े ऐतिहासिक साक्ष्यों में गोरखपुर विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग की ओर से पुण्यहवां पोखरे की खुदाई में मिले मुगलकालीन तलवार, खंडित सूर्य प्रतिमा और अन्य पुरावशेषों का भी उल्लेख किया जाता है। गांव में 12वीं शताब्दी की चपटी आयताकार ईंटें मिलने की बात भी सामने आई है।
महाशिवरात्रि और सावन में उमड़ते हैं श्रद्धालु
सरयां तिवारी के युवा भागवताचार्य पंडित अतुल राम त्रिपाठी ने कहा कि नीलकंठ महादेव मंदिर से स्थानीय लोगों की गहरी धार्मिक आस्था जुड़ी है। यहां पूरे वर्ष श्रद्धालुओं का आना-जाना रहता है। महाशिवरात्रि, सावन और पुरुषोत्तम मास में जलाभिषेक व पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से मंदिर के जीर्णोद्धार, धर्मशाला निर्माण सहित विभिन्न कार्यों के लिए 1.79 करोड़ रुपये का अनुदान दिए जाने की जानकारी है। अब सभी की नजर एएसआई की वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट पर है, जिससे शिवलिंग की वास्तविक प्राचीनता और उस पर अंकित लेख के कालखंड को लेकर स्थिति साफ हो सकेगी।










