DDU के अलकनंदा हॉस्टल में मिल रहा जहरीला खाना: सब्जी में कीड़ा निकलने के बाद फूटा छात्राओं का गुस्सा, जिम्मेदार 'घुन' को 'जीरा' बता रहे; वार्डन मामले को झूठा साबित करने में जुटीं

आशीष गिरि|11 मई 2026
सब्जी में कीड़ा निकलने के बाद फूटा छात्राओं का गुस्सा, जिम्मेदार 'घुन' को 'जीरा' बता रहे; वार्डन मामले को झूठा साबित करने में जुटीं

DDU गोरखपुर यूनिवर्सिटी के अलकनंदा गर्ल्स हॉस्टल से चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां रहने वाली छात्राओं ने मेस के खाने, हॉस्टल की साफ-सफाई और प्रशासनिक रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं। छात्राओं का आरोप है कि हॉस्टल के खाने में अक्सर कीड़े निकल आते हैं। सब्जी और छाेले में घुन तैरते हैं। खाने के साथ ही नास्ता व चाय की क्वालिटी भी काफी खराब रहती है। फिसड्डी चाय व दाल छात्राओं का मन फीका कर देती है। किचन में जहां खाना पकाया जाता है वहां भी साफ-सफाई नहीं बरती जाती। इसके चलते उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं का आरोप है जब इसकी ​शिकायत वे मेस के जिम्मेदारों से करती हैं तो वे 'घुन' को 'जीरा' बताकर चुप कराने में जुट जाते हैं। वहीं, एक छात्रा ने आरोप लगाया कि कमरे में दीमक लगने के चलते सभी किताबें खराब हो जा रही हैं। उसने कहा कि हॉस्टल में कोई कमरा ऐसा नहीं बचा है जहां की आलमारी सही हो, सभी के दरवाजे खराब हो चुके हैं। छात्राओं के द्वारा बनाए गए वीडियो और हॉस्टल ग्रुप की व्हाट्सएप चैट सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अलकनंदा हॉस्टल में हड़कंप मच गया है। दिन भर हॉस्टल कैंपस और उसके आस-पास इसकी चर्चा होती रही। हॉस्टल की खस्ताहाल व्यवस्था के चलते छात्राओं में काफी राेष है।

बाहर का खाना खाने को मजबूर छात्राएं

सोशल मीडिया और छात्राओं के ग्रुप में वायरल वीडियो ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया। वीडियो में छोले के अंदर घुन दिखाई दे रहे हैं। दाल बेहद पतली और पानी जैसी नजर आ रही है। कई तस्वीरों में खराब सब्जियां भी दिखाई दे रही हैं। (हालांकि, नव्य जागरण इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।) हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं का आरोप है कि कई बार खाना बनाते वक्त सड़ी हुई सब्जी इस्तेमाल होती है। खाने की क्वालिटी लगातार खराब बनी रहती है। सलाद तक बेहद घटिया क्वॉलिटी का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, हॉस्टल में छात्राओं की मेस कमेटी बनाकर खाने की क्वालिटी सुधारने की व्यवस्था बनाई गई है लेकिन यह अभी कवायदों तक ही सीमित है। फिलहाल घटिया खाना देने के चलते छात्राओं में हॉस्टल प्रशासन व यूनिवर्सिटी प्रशासन के ​खिलाफ काफी नाराजगी है। छात्राओं का कहना है कि कई बार खाना देखने के बाद भूख मर जाती है। घटिया खाना खाकर बीमार होने से अच्छा है कि हम भूखे ही रह जाएं। मजबूरी में कई बार ज्यादातर छात्राएं लंच व डिनर तक छोड़ने को विवश हो जाती हैं। वहीं, जब भूख बेहाल कर देती है तो कुछ छात्राएं बाहर से खाना मंगाकर खाती हैं।

दो दिन सुधार, फिर वही गंदगी

छात्राओं का कहना है कि यह शिकायतें नई नहीं हैं। लंबे समय से मेस व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। हर बार शिकायत के बाद कुछ दिन सुधार दिखता है। फिर व्यवस्था पुराने पैटर्न पर लौट आती है। छात्राओं ने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन भी कई बार वार्डन को फटकार लगा चुका है, लेकिन इसके बाद भी सिस्टम नहीं बदला। छात्राओं के मुताबिक, मेस स्टाफ पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती। सिर्फ औपचारिक चेतावनी देकर मामला शांत कर दिया जाता है। इसका असर उनकी सेहत पर पड़ रहा है। कई छात्राओं ने कहा कि पढ़ाई से ज्यादा तनाव अब खाने को लेकर होने लगा है।

सब्जी में कीड़ा निकलने के बाद फूटा छात्राओं का गुस्सा, जिम्मेदार 'घुन' को 'जीरा' बता रहे; वार्डन मामले को झूठा साबित करने में जुटीं
सब्जी में कीड़ा निकलने के बाद फूटा छात्राओं का गुस्सा, जिम्मेदार 'घुन' को 'जीरा' बता रहे; वार्डन मामले को झूठा साबित करने में जुटीं

चैट में फूटा छात्राओं का गुस्सा

वायरल चैट में छात्राओं ने हॉस्टल के मेस मैनेजमेंट के खिलाफ खुलकर नाराजगी जताई है। एक छात्रा ने लिखा कि दाल बेहद पानी जैसी थी। उसकी क्वालिटी सही करने की मांग की गई है। दूसरी छात्रा ने लिखा कि तुरई की सब्जी इतनी खराब थी कि पूरी सब्जी कड़वी लग रही थी। एक अन्य मैसेज में लिखा गया कि “गाय-भैंस भी शायद ऐसा खाना न खाएं"। मिठाई और चाय की क्वालिटी को भी छात्राओं ने बेहद घटिया बताया है। उनका कहना है कि हॉस्टल में कच्ची मिठाई दी जाती है। छात्राओं की ​शिकायत पर जिम्मेदारों का रवैया सबसे ज्यादा हैरान करने वाला है। इस संबंध में जब नव्य जागरण रिपोर्टर ने वार्डन मीतू सिंह से उनका पक्ष जानने की को​शि​श की तो उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो पुराना है और रानी लक्ष्मीबाई हॉस्टल का है, जबकि वायरल चैट में वार्डन मीतू सिंह खुद छात्राओं से बात करती दिख रही हैं। वायरल चैट के स्क्रीन शॉट में व्हाट्सएप ग्रुप का नाम भी अलकनंदा महिला छात्रावास लिखा है। उधर, छात्राओं ने कहा कि वार्डन और मेस के कर्मचारी खाने में निकले घुन को “जीरा” साबित करने में लगे हैं। इससे छात्राओं की नाराजगी बढ़ गई है। उनका कहना है कि आंखों के सामने खराब खाना दिख रहा है, बावजूद इसके जिम्मेदार मानने को तैयार नहीं हैं।

हेल्थ के साथ हो रहा खिलवाड़

छात्राओं ने साफ कहा कि यह सिर्फ खाने की शिकायत नहीं है। यह उनकी हेल्थ और भविष्य का मामला है। कई छात्राएं परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं। कुछ प्रोफेशनल कोर्स कर रही हैं। ऐसे में खराब खाना उनकी पढ़ाई और मानसिक स्थिति दोनों प्रभावित कर रहा है। छात्राओं ने कहा कि हॉस्टल सिर्फ रहने की जगह नहीं होती। यह छात्रों की दूसरी दुनिया होती है। अगर वहीं सुरक्षित माहौल न मिले, तो पढ़ाई पर असर पड़ना तय है। छात्राओं ने मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

सब्जी में कीड़ा निकलने के बाद फूटा छात्राओं का गुस्सा, जिम्मेदार 'घुन' को 'जीरा' बता रहे; वार्डन मामले को झूठा साबित करने में जुटीं

वार्डन शिकायत पर कैरेक्टरलेस बनाती हैं

पूरी घटना में सबसे गंभीर आरोप हॉस्टल की वार्डन पर लगाए गए हैं। हॉस्टल में रहने वाली कुछ छात्राओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब वे शिकायत लेकर जाती हैं, तब उन्हें मानसिक रुप से परेशान किया जाता है। कुछ छात्राओं का आरोप है कि शिकायत करने वाली लड़कियों को “कैरेक्टरलेस” बताने की कोशिश की जाती है। इससे कई छात्राएं खुलकर सामने आने से डर जाती हैं। उन्हें यह कहकर भी डराया जाता है कि रहना तो तुमको यहीं है। बाद में परेशानी होने के डर से वे मौन हो जाती हैं। छात्राओं का दावा है कि वार्डन ने हॉस्टल में डर का माहौल बना रखा है। इसके चलते ज्यादातर छात्रांए घटिया खाना व व्यवस्था मिलने पर भी ​शिकायत नहीं करतीं।

क्या पढ़ाई छोड़कर मेस का निरीक्षण करें?

छात्राओं ने प्रशासन के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कई बार वार्डन उनसे खाने बनने का स्वयं निरीक्षण करने की बात कहती हैं। इस बात से उनमें गहरा असंतोष है। कुछ छात्राओं ने यह सवाल खड़े किए हैं कि क्या अब वे पढ़ाई छोड़कर मेस की निगरानी करेंगी। एक छात्रा ने कहा कि मेस इंस्पेक्शन करना उनका काम नहीं है। वे यहां पढ़ाई करने आई हैं। प्रशासन का काम है कि वह अच्छी व्यवस्था सुनिश्चित करे। छात्राओं ने कहा कि यह जिम्मेदारी उल्टा उन पर थोप दी जाती है।

सब्जी में कीड़ा निकलने के बाद फूटा छात्राओं का गुस्सा, जिम्मेदार 'घुन' को 'जीरा' बता रहे; वार्डन मामले को झूठा साबित करने में जुटीं

छात्रा और रिपोर्टर के बीच बातचीत के कुछ अंश...

रिपोर्टर: क्या खाने की क्वालिटी और हॉस्टल की व्यवस्थाओं को लेकर अलकनंदा हॉस्टल के जो वीडिया और व्हाट्सएप चैट वायरल हो रहे हैं वे सही हैं?

छात्रा: हां, फोटो और वीडियो सब असली हैं।

रिपोर्टर: सबसे बड़ी परेशानी क्या है?

छात्रा: जी, यहां बेहद खराब क्वालिटी का खाना दिया जाता है।

रिपोर्टर: क्या पहले भी शिकायत हुई थी?

छात्रा: जी, कई बार पहले भी ​शिकायत हो चुकी है लेकिन हर बार हमें अलग-अलग तरीके से धमकाकर आवाज दबा दी जाती है।

रिपोर्टर: ​शिकायत के बाद कोई सुधार नहीं हुआ?

छात्रा: थोड़ा सुधार होता है, फिर सब वैसा हो जाता।

रिपोर्टर: वार्डन क्या करती हैं?

छात्रा: वार्डन को यूनिवर्सिटी प्रशासन भी फटकार चुका है, लेकिन सिस्टम नहीं बदला।

रिपोर्टर: खाने में क्या-क्या खराब मिला?

छात्रा: आपने वीडियो में देखा ही होगा सब्जी और छोले में घुन पड़ा था, ये लोग कई बार सड़ा सामान भी बना देते हैं।

रिपोर्टर: ऐसे खाने से तो आपकी हेल्थ खराब हो रही होगी?

छात्रा: बिल्कुल, हमारी सेहत लगातार खराब होती जा रही है।

रिपोर्टर: क्या हॉस्टल के जिम्मेदारों को पूरा मामला पता है?

छात्रा: जी, सबको जानकारी है, बस कोई सुधार नहीं करना चाहता।

दूसरी छात्रा व रिपोर्टर के बीच हुई बातचीत...

रिपोर्टर: क्या खाने में घुन मिलने की बात सही है?

छात्रा: हां, आज के खाने में घुन निकले थे।

रिपोर्टर: इसकी शिकायत की गई थी?

छात्रा: हां, आज भी ​शिकायत की गई है पहले भी इसकी ​शिकायत की जा चुकी है।

रिपोर्टर: ​​शिकायत के बाद प्रशासन ने क्या कार्रवाई की?

छात्रा: बस वार्डन और मेस स्टॉफ को डांट-फटकार लगाई गई। व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ।

रिपोर्टर: क्या खाने की क्वालिटी बदली या नहीं?

छात्रा: जी, फटकार मिलने के कुठ दिन तक चीजें ठीक रहती हैं ​फिर खराब क्वालिटी का खाना मिलने लगता है।

रिपोर्टर: क्या छात्राएं क्वालिटी के चलते खाना छोड़ देती हैं?

छात्रा: हां, कई बार स्किप करना पड़ता है।

रिपोर्टर: क्या छात्राओं से निरीक्षण करने को कहा जाता है?

छात्रा: हां, लेकिन वो हमारा काम नहीं है।

रिपोर्टर: हॉस्टल की सबसे बड़ी समस्या क्या लगती है?

छात्रा: हाइजीन और खराब क्वालिटी सबसे बड़ा मुद्दा है।

अन्य छात्राओं ने भी खोली मेस की पोल

बातचीत के क्रम में रिपोर्टर ने हॉस्टल की अन्य छात्राओं का भी पक्ष जाना। यहां रहने वाली ज्यादातर छात्राओं ने मेस की व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि शिकायतों के बाद सिर्फ दिखावटी कार्रवाई होती है। मेस स्टाफ को डांट दिया जाता है और मामल शांत हो जाता है। इसके कुछ दिन खाना ठीक मिलता है। फिर वही गोरखधंधा शुरु हो जाता है। एक छात्रा ने कहा कि कई बार बच्चे खाना छोड़ देते हैं। क्योंकि खराब खाना देखकर खाने की इच्छा मर जाती है। उसने कहा कि छात्राएं यहां पढ़ाई करने आई हैं। लेकिन उन्हें रोज बेसिक सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

सब्जी में कीड़ा निकलने के बाद फूटा छात्राओं का गुस्सा, जिम्मेदार 'घुन' को 'जीरा' बता रहे; वार्डन मामले को झूठा साबित करने में जुटीं

एक्शन सिर्फ कागजों में

छात्राओं का कहना है कि कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है। हकीकत में कोई भी बदलाव नहीं होता। पुरानी बिल्डिंगों में सफाई की ​िस्थति बेहद खस्ताहाल है। कई आलमारियों में दीमक का प्रकोप कुछ ऐसा है किताबें व कपड़े पूरी तरह नष्ट हो जा रहे हैं। छात्राओं ने कहा कि अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो यह बड़ा स्वास्थ्य संकट बन सकता है। उन्होंने मेस व्यवस्था की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

सब्जी में कीड़ा निकलने के बाद फूटा छात्राओं का गुस्सा, जिम्मेदार 'घुन' को 'जीरा' बता रहे; वार्डन मामले को झूठा साबित करने में जुटीं

छात्रों के भविष्य पर बड़ा सवाल

यह मामला अब सिर्फ मेस विवाद तक सीमित नहीं है। यह सीधे छात्राओं की हेल्थ, सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। छात्राओं ने कहा कि अगर यूनिवर्सिटी में रहने और खाने की बुनियादी सुविधाएं ही सुरक्षित नहीं होंगी, तो पढ़ाई का माहौल कैसे बनेगा। कई छात्राओं ने मांग की कि मेस संचालकों की नियमित निगरानी हो। खाने की क्वालिटी का रेग्युलर टेस्ट कराया जाए। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। छात्राओं ने कहा कि उन्हें सिर्फ दिखावटी सुधार नहीं चाहिए। स्थायी समाधान मिलना चाहिए।

कुलपति से नहीं हो सका संपर्क

मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन का पक्ष जानने के लिए जब नव्य जागरण रिपोर्टर ने वीसी प्रो. पूनम टंडन से बात करने की को​शिश की तो उनका फोन नहीं उठा। यूनिवर्सिटी का पक्ष आने पर हम इसे प्रमुखता से प्रका​शित करेंगे। वहीं, यूनिवर्सिटी की मीडिया सेल ने भी इस संबंध में कोई बयान नहीं जारी किया है। फिलहाल वीडियाे वायरल होने के बाद हॉस्टल के साथ ही यूनिवर्सिटी का माहौल तनावपूर्ण हो गया है। छात्राओं के आरोपों और वायरल वीडियो के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। कैंपस में चर्चा तेज है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए वार्डन पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।

नव्य जागरण

पूरी खबर पढ़ें ऐप पर

ऐप डाउनलोड करने के लिए QR कोड
ऐप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करेंGET IT ON Google Play

अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर

ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।