बिजली उपभोक्ताओं को मिल सकती है राहत: 10% फ्यूल सरचार्ज पर आयोग ने उठाए सवाल, सात दिनों के भीतर मांगा स्पष्टीकरण

लखनऊ|1 घंटा पहले
10% फ्यूल सरचार्ज पर आयोग ने उठाए सवाल, सात दिनों के भीतर मांगा स्पष्टीकरण

उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं पर लगाए गए 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज (ईंधन अधिभार) को लेकर विवाद गहरा गया है। इस बीच प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बिजली वितरण निगमों की शीर्ष संस्था यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड से सात दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि जून माह के लिए लागू किए गए 10 प्रतिशत फ्यूल एवं पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट की गणना किस आधार पर की गई। इसमें दो वर्ष पुराने बकाया भुगतान को किस नियम के तहत शामिल किया गया।

गौरतलब है कि भीषण गर्मी, बढ़ती बिजली मांग और विभिन्न क्षेत्रों में हो रही बिजली कटौती के बीच यूपीपीसीएल ने जून माह के लिए उपभोक्ताओं पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज लागू किया था। इसके बाद उपभोक्ता संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों ने इस निर्णय का विरोध शुरू कर दिया। आरोप लगाया गया कि निगम ने नियामक प्रावधानों की अनदेखी की। उपभोक्ताओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने का प्रयास किया है।

आयोग ने मांगा जवाब

विद्युत नियामक आयोग के संज्ञान में यह मामला आने के बाद आयोग ने यूपीपीसीएल से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग का मानना है कि फ्यूल सरचार्ज की गणना सामान्यतः दो माह पूर्व की वास्तविक बिजली खरीद लागत और अनुमोदित लागत के बीच अंतर के आधार पर की जाती है। ऐसे में दो वर्ष पुराने बकाया भुगतान और देनदारियों को इसमें शामिल करने का आधार स्पष्ट किया जाना आवश्यक है। आयोग के अध्यक्ष ने संकेत दिया है कि यदि गणना में नियामकीय प्रावधानों का उल्लंघन पाया गया तो उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक निर्णय लिया जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद पूरे मामले पर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और उपभोक्ता संगठनों की नजर बनी हुई है।

उपभोक्ता परिषद ने उठाया विरोध का मुद्दा

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस मामले को जनहित और लोक महत्व का विषय बताया। उन्होंने आयोग के समक्ष औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई थी। परिषद का आरोप है कि यूपीपीसीएल ने मार्च 2026 की बिजली खरीद लागत के साथ-साथ करीब 1400 करोड़ रुपये के पुराने बकाया, एनटीपीसी के भुगतान और अन्य वित्तीय देनदारियों को भी एफपीपीसीए गणना में जोड़ दिया। जो मौजूदा नियमों के विपरीत है। परिषद का दावा है कि यदि निर्धारित नियमों के अनुसार गणना की जाती तो उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार पड़ने के बजाय बिजली बिलों में राहत मिल सकती थी। संगठन के अनुसार वास्तविक आंकड़ों के आधार पर फ्यूल सरचार्ज की दर लगभग दो प्रतिशत के आसपास बनती है।

आयोग की समीक्षा रिपोर्ट हो सकती है निर्णायक

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि आयोग की समीक्षा रिपोर्ट इस मामले में निर्णायक साबित हो सकती है। यदि यूपीपीसीएल दो वर्ष पुराने बकाया को फ्यूल सरचार्ज में शामिल करने का वैधानिक आधार प्रस्तुत नहीं कर पाता है, तो 10 प्रतिशत अधिभार में संशोधन संभव है। ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल सकती है। बिजली बिलों पर पड़ने वाला अतिरिक्त आर्थिक बोझ काफी हद तक कम हो सकता है। फिलहाल पूरे प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं की निगाहें आयोग की आगामी कार्रवाई और यूपीपीसीएल की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। इसका सीधा असर लाखों परिवारों और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल पर पड़ने वाला है।

नव्य जागरण

पूरी खबर पढ़ें ऐप पर

ऐप डाउनलोड करने के लिए QR कोड
ऐप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करेंGET IT ON Google Play

अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर

ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।