सपा ने परिमल नथवानी पर लगाया दांव: आलोक रंजन रेस से हुए आउट, तीसरे उम्मीदवार पर सस्पेंस बरकरार

लखनऊ|
आलोक रंजन रेस से हुए आउट, तीसरे उम्मीदवार पर सस्पेंस बरकरार

समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में अपने दूसरे उम्मीदवार के तौर पर धनराज परिमल नथवानी को उतारकर सियासी समीकरणों के बीच नई चर्चा छेड़ दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और नथवानी ने बुधवार को अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया। नथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज में ग्रुप प्रेसिडेंट हैं और उन्हें अंबानी परिवार के करीबी कारोबारी के तौर पर जाना जाता है। उनके पिता परिमल नथवानी भी झारखंड से निर्दलीय राज्यसभा सांसद हैं और उन्हें एनडीए का समर्थन प्राप्त है। ऐसे में सपा के इस फैसले को लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग तरह के सवाल उठ रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होना है। मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर सपा के दो उम्मीदवारों के जीतने का गणित बनता है, जबकि तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। सपा ने फिलहाल तीसरे प्रत्याशी के नाम का ऐलान नहीं किया है। राजनीतिक गलियारों में सलीम इकबाल शेरवानी और पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन के नाम चर्चा में हैं। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि नथवानी के नामांकन के बाद पार्टी नेतृत्व राजनीतिक माहौल और संभावित समर्थन का आकलन कर रहा है।

आलोक रंजन का नाम पीछे क्यों गया?

अखिलेश यादव सरकार में मुख्य सचिव रहे आलोक रंजन का नाम पहले राज्यसभा के संभावित उम्मीदवारों में प्रमुखता से लिया जा रहा था। 28 सितंबर को विधायकों के साथ बैठक में अखिलेश ने उनके पिछले चुनाव में रह जाने का जिक्र भी किया था। हालांकि, अंतिम सूची में नथवानी को जगह मिली। वर्ष 2024 में सपा ने आलोक रंजन को तीसरे उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारा था, लेकिन सात विधायकों की क्रॉस वोटिंग के बाद उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। सपा के भीतर उनके नाम को लेकर समर्थन और विरोध की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं।

नथवानी के जरिए कारोबारी संपर्क की चर्चा

नथवानी के चयन को लेकर एक तर्क यह दिया जा रहा है कि उनके कॉरपोरेट और कारोबारी संपर्क सपा के लिए उपयोगी हो सकते हैं। तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत है। ऐसे में पार्टी के सामने संख्या जुटाने की चुनौती है। नथवानी के जरिए उद्योग जगत और बड़े कारोबारी समूहों तक पार्टी की पहुंच बढ़ने की संभावना को भी राजनीतिक विश्लेषण का हिस्सा बनाया जा रहा है। आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले इसे सपा की रणनीति में एक नए कॉरपोरेट कनेक्शन के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, यह राजनीतिक विश्लेषण है, पार्टी की ओर से इसका कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है।

राजभर ने PDA पर साधा निशाना

कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अखिलेश यादव पर तंज कसा। उन्होंने सवाल उठाया कि सपा के प्रस्तावित तीनों राज्यसभा उम्मीदवार उसके PDA फॉर्मूले में कैसे फिट होते हैं। राजभर ने अपने पोस्ट में PDA की व्याख्या करते हुए परिवार, दौलतमंद और अपराधियों का उल्लेख किया। वहीं, वरिष्ठ पत्रकार आवेश तिवारी ने नथवानी को टिकट दिए जाने पर सवाल उठाते हुए इसे सपा की राजनीतिक मर्यादाओं से जोड़कर आलोचना की और दावा किया कि इसके पीछे दबाव की भूमिका हो सकती है। यह उनका राजनीतिक आकलन है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

नव्य जागरण

पूरी खबर पढ़ें ऐप पर

ऐप डाउनलोड करने के लिए QR कोड
ऐप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करें

अधूरी नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर

ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।