महराजगंज में नेपाल के पानी का अलर्ट: 1.27 लाख क्यूसेक पहुंचा बहाव, नदियों पर 24 घंटे निगरानी

महाराजगंज|27 अगस्त 2026
1.27 लाख क्यूसेक पहुंचा बहाव, नदियों पर 24 घंटे निगरानी

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और अचानक बढ़े जलप्रवाह के बाद महराजगंज और कुशीनगर के सीमावर्ती इलाकों में प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। नेपाल के रसुवा जिले के टिमुरे क्षेत्र में भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने की सूचना के बाद गंडक समेत सीमावर्ती नदियों और कटान प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है। गंडक बैराज में नेपाल की ओर से डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसके बाद महराजगंज की ओर आने वाले जलप्रवाह में 1.27 लाख क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। वहीं, गुरुवार सुबह कुशीनगर में करीब 92 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज हुआ। फिलहाल प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में बता रहा है, लेकिन लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

नेपाल के रसुवा जिले के सीमावर्ती टिमुरे क्षेत्र में अचानक भारी मात्रा में पानी आने से भोटेकोशी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। जानकारी के मुताबिक, तिब्बत की ओर से अधिक पानी आने के कारण नदी में अचानक बाढ़ जैसे हालात बन गए। टिमुरे बाजार और आसपास के नदी तटीय इलाकों में नुकसान की शुरुआती सूचना के बाद नेपाल से सटे भारतीय क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई। प्रशासन ने संभावित असर का आकलन शुरू करते हुए संवेदनशील इलाकों की स्थिति पर नजर रखनी शुरू कर दी।

नारायणी होते हुए गंडक में आता है भोटेकोशी का पानी

एडीएम डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि भोटेकोशी नदी का पानी त्रिशूला नदी के रास्ते नारायणी में पहुंचता है। भारतीय सीमा में नारायणी नदी को गंडक के नाम से जाना जाता है। उन्होंने बताया कि सीधे बहाव नहीं होने के कारण फिलहाल नुकसान की आशंका कम है, लेकिन प्रशासन आपदा की संभावना को देखते हुए पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बढ़ते जलप्रवाह का असर नदी किनारे और निचले इलाकों में पहुंचने की आशंका के चलते अधिकारियों ने संवेदनशील क्षेत्रों का जायजा लिया है।

कुशीनगर में रातभर बाढ़ के खतरे से दहशत

कुशीनगर के सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ की आशंका के चलते ग्रामीणों में रातभर चिंता बनी रही। नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ने और गंडक बैराज से पानी छोड़े जाने की संभावना को देखते हुए खड्डा तहसील के कई गांवों पर खतरा मंडराता रहा। सुबह जलस्तर में कमी आने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। सुबह सात बजे तक नारायणी नदी का डिस्चार्ज करीब 92 हजार क्यूसेक दर्ज किया गया। दूसरी ओर, वाल्मीकिनगर बैराज के सभी फाटक खोल दिए गए हैं। नदी के बढ़ते जलप्रवाह को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी थी।

संवेदनशील गांवों में एनडीआरएफ-एसडीआरएफ तैनात

खड्डा तहसील के संवेदनशील गांवों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें अभी भी तैनात हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पीएसी और जल पुलिस को भी अलर्ट पर रखा गया है। प्रशासनिक टीमें लगातार नदी के जलस्तर और आसपास के गांवों की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। रातभर बाढ़ की आशंका के कारण कई ग्रामीण जागकर नदी के पानी की स्थिति देखते रहे। कुछ गांवों के संपर्क मार्गों पर एक-दो स्थानों पर पानी पहुंचने से आवागमन प्रभावित हुआ। हालांकि, फिलहाल जलस्तर घटने से स्थिति पहले की तुलना में बेहतर है।

गंडक, दर्जनिया और टेल फाल पर पैनी निगाह

नेपाल की ओर से अचानक पानी बढ़ने की आशंका को देखते हुए महराजगंज प्रशासन गंडक नदी के साथ दर्जनिया और टेल फाल जैसी सीमावर्ती नदियों पर भी लगातार निगरानी कर रहा है। नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों को विशेष निगरानी में रखा गया है। स्थानीय कर्मचारियों से नियमित फीडबैक लिया जा रहा है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि जलस्तर में असामान्य वृद्धि दिखाई देने पर तत्काल उच्चाधिकारियों को सूचना दें। बुधवार देर रात एडीएम डॉ. प्रशांत कुमार ने संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण कर तैयारियों की समीक्षा की।

डीएम के निर्देश पर विभागों को किया गया अलर्ट

डीएम गौरव सिंह सोगरवाल के निर्देश पर संबंधित तहसीलों, राजस्व विभाग, पुलिस, एसडीआरएफ और अन्य विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। संभावित बाढ़ की स्थिति में लोगों को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर पहुंचाने की तैयारियां पूरी रखी गई हैं। प्रशासन ने राहत सामग्री की उपलब्धता, बचाव अभियान और प्रभावित क्षेत्रों तक तत्काल मदद पहुंचाने की व्यवस्था भी तैयार रखी है। अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर तेजी से बढ़ने की स्थिति में राहत एवं बचाव अभियान तत्काल शुरू किया जाएगा। नदी, नालों और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की अपील की गई है। बच्चों, बुजुर्गों और पशुओं को विशेष रूप से सुरक्षित रखने को कहा गया है।

एडीएम बोले- अफवाहों पर ध्यान न दें

अपर जिलाधिकारी डॉ. प्रशांत कुमार ने कहा कि नेपाल में आई आपदा को देखते हुए महराजगंज प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। सीमावर्ती नदियों के जलस्तर और जलप्रवाह की लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने लोगों से अफवाहों और सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट सूचनाओं से बचने की अपील की। एडीएम ने कहा कि प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। खतरे की स्थिति में चेतावनी जारी होते ही लोग तत्काल सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाएं। जिले में हालात पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है।

आपात स्थिति में इन नंबरों पर करें संपर्क

जिला आपातकालीन संचालन केंद्र का नंबर 05523-222162 है। इसके अलावा आपदा हेल्पलाइन 1077 पर संपर्क किया जा सकता है। प्रशासन ने मोबाइल नंबर 9628819145 और 9621333537 भी जारी किए हैं। किसी भी आपात स्थिति में प्रभावित लोग इन नंबरों पर सूचना दे सकते हैं।

नव्य जागरण

पूरी खबर पढ़ें ऐप पर

ऐप डाउनलोड करने के लिए QR कोड
ऐप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करें

अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर

ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।